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अमेरिका में अरबपति बेटों ने ठुकराया, जौनपुर के वृद्धाश्रम में दिन काट रहे हैं बुजुर्ग इंजीनियरभारत
8 सित॰ 2026, 12:10 pm (23 दिन पहले)· 3

अमेरिका में अरबपति बेटों ने ठुकराया, जौनपुर के वृद्धाश्रम में दिन काट रहे हैं बुजुर्ग इंजीनियर

कभी विदेशों में ऑयलफील्ड कंपनियों में काम करने वाले और लाखों कमाने वाले सिलविंदर सिंह आज जौनपुर के एक वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं। उनके तीनों बेटे अमेरिका के न्यू जर्सी में अरबपति हैं, लेकिन बुजुर्ग पिता की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

दौलत के अंबार और इंसानी रिश्तों के बीच की एक दर्दनाक दास्तान सामने आई है, जहां जीवन भर की गाढ़ी कमाई बच्चों पर लुटाने वाले एक पिता को बुढ़ापे में अपनों का साथ नहीं मिला। कभी विदेशों में बड़ी ऑयलफील्ड कंपनियों में अपनी सेवाएं देने वाले सिलविंदर सिंह आज उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के एक वृद्धाश्रम की चारदीवारी में अपने जीवन के आखिरी दिन गुजारने को मजबूर हैं। जिस शख्स ने अपने कंधों पर बिठाकर बच्चों को दुनिया दिखाई और उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया कि वे अमेरिका के न्यू जर्सी में बैठकर अरबों का कारोबार संभाल सकें, आज उसी पिता की सुध लेने के लिए उन सफल बेटों के पास वक्त नहीं है। भौतिक चकाचौंध और अथाह दौलत के बीच इंसानियत के तार-तार होने की यह कहानी किसी का भी दिल झकझोर देने के लिए काफी है।

सिलविंदर सिंह के तीनों बेटे अमेरिका के न्यू जर्सी में बेहद संपन्न जिंदगी जी रहे हैं और आज वे करोड़पति-अरबपति की श्रेणी में आते हैं। उनके बेटों के पेशे की बात करें तो उनमें एक बेटा चार्टर्ड अकाउंटेंट है, दूसरा मैकेनिकल इंजीनियर है और तीसरे बेटे का अपना खुद का बड़ा होटल और शराब का कारोबार है। इसके अलावा मुंबई में भी उनके आलीशान फ्लैट मौजूद हैं, लेकिन आज हालात यह हैं कि उन फ्लैटों में परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता बल्कि उन्हें रिश्तेदारों और जानकारों को दे दिया गया है। जब औलादें पिता को औपचारिकता निभाते हुए अमेरिका आने का न्योता देती हैं, तो ढलती उम्र और बीमारियों से जकड़े शरीर के लिए वह सात समंदर पार का सफर मौत के समान प्रतीत होता है। सिलविंदर सिंह बताते हैं कि उन्हें लगातार बीस घंटे तक हवाई जहाज में बैठने के लिए कहा जाता है, जबकि उनके लिए बिस्तर पर ठीक से बैठ पाना भी मुमुश्किल है। बेटों का यह कहना होता है कि पैसे भेज देते हैं और खाना बनाने के लिए एक बाई रख लो, लेकिन पैसे से पेट तो भर सकता है पर बुढ़ापे के इस अकेलेपन और दर्द को कोई मायनो में नहीं भर सकता।

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सिलविंदर सिंह की अपनी पृष्ठभूमि काफी शिक्षित और संपन्न परिवार की रही है, जहां उनके पिता फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे और बाद में इंग्लैंड चले गए थे। उन्होंने खुद मुंबई से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और इसके बाद विदेशों में कई बड़ी ऑयलफील्ड कंपनियों में लंबे समय तक काम किया, जहां उनकी मासिक सैलरी करीब ढाई लाख रुपए तक हुआ करती थी। उन्होंने अपनी जिंदगीभर की कमाई का एक-एक पैसा अपने बच्चों की बेहतरीन परवरिश, उच्च शिक्षा और उनकी शादियों पर खुलकर खर्च कर दिया। साल 1994 में उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा तब छिन गया जब उनकी पत्नी का कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के कारण निधन हो गया। मुंबई के नानावटी अस्पताल में उनकी पत्नी के दो बड़े ऑपरेशन कराए गए और उस दौर में करीब अट्ठाइस लाख रुपए पानी की तरह बहा दिए गए, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। बुजुर्ग बताते हैं कि जब तक बच्चों की मां जीवित थीं, तब तक पूरा परिवार एक सूत्र में बंधा रहा, लेकिन उनके जाते ही सब कुछ बिखर गया।

सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन भी सिलविंदर सिंह ने आराम से बिताने की बजाय काम करना जारी रखा और सूरत की एक हीरा कंपनी में बतौर मैनेजर अपनी सेवाएं दीं। उसी दौरान उनकी मुलाकात जौनपुर के रहने वाले दो भले लोगों से हुई, जिन्होंने उन्हें इस आश्रम के बारे में जानकारी दी। कंपनी का मालिक उन्हें छोड़ना नहीं चाहता था क्योंकि वे पढ़े-लिखे थे और बिना किसी हिसाब-किताब के पूरी ईमानदारी से काम संभालते थे, लेकिन साथियों के सुझाव पर वे जौनपुर चले आए। आज वे इस वृद्धाश्रम के प्रबंधकों की निःस्वार्थ सेवा और स्नेह से बेहद अभिभूत हैं और उनका मानना है कि इन लोगों ने उन्हें एक तरह से दूसरा जीवन दिया है। उनके अनुसार आश्रम के लोग दिन-रात बिना किसी स्वार्थ के उनकी सेवा करते हैं और उनसे एक पैसा तक नहीं लिया जाता, जितना प्यार और सम्मान उन्हें यहां मिल रहा है उतना उन्हें अपनों के बीच भी नसीब नहीं हुआ। सिलविंदर सिंह का यह जीवन आज इस कड़वे सच को उजागर करता है कि दौलत और शोहरत इंसान को भले ही बुलंदियों पर पहुंचा दे, लेकिन अपनों के दिलों से बेदखल कर दे तो उस कामयाबी का कोई मोल नहीं रह जाता।

सवाल-जवाब

सिलविंदर सिंह वर्तमान में कहां रह रहे हैं?
सिलविंदर सिंह वर्तमान में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के एक वृद्धाश्रम में रह रहे हैं।
सिलविंदर सिंह के बेटे कहां रहते हैं?
उनके तीनों बेटे अमेरिका के न्यू जर्सी में रहते हैं।
सिलविंदर सिंह के बेटे क्या काम करते हैं?
उनका एक बेटा चार्टर्ड अकाउंटेंट है, दूसरा मैकेनिकल इंजीनियर है और तीसरे का होटल और शराब का कारोबार है।
सिलविंदर सिंह की पत्नी का निधन कब हुआ था?
उनकी पत्नी का कैंसर के कारण वर्ष 1994 में निधन हो गया था।
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कहां काम किया था?
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सूरत की एक हीरा कंपनी में बतौर मैनेजर काम किया था।
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