दीपावली पर्व के फौरन बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की आबोहवा एक बार फिर गंभीर खतरे की जद में आ सकती है। मौसम से जुड़े पूर्वानुमानों के मुताबिक त्योहार बीतते ही प्रदूषण के स्तर में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। वातावरण में मौजूद हानिकारक कणों के बिखरने की रफ्तार हवा की धीमी गति के कारण बिल्कुल थम सकती है, जिससे प्रदूषक तत्व राष्ट्रीय राजधानी के ऊपर ही एक सघन चादर के रूप में कैद होकर रह जाएंगे। हालांकि राहत की बात केवल इतनी है कि त्योहार के दिन हवा की दिशा में होने वाले अस्थायी बदलाव से कुछ समय के लिए इस धुंधली चादर के छंटने में थोड़ी सहायता मिल सकती है।
हवा के रुख में बदलाव और 8 नवंबर का असर
मौसम विश्लेषण से जुड़े विशेषज्ञ महेश पलावत के अनुसार 7 नवंबर तक राजधानी दिल्ली में उत्तर-पश्चिमी राजस्थान की दिशा से आने वाली मध्यम गति की उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने की उम्मीद है। इसके बाद वातावरण की स्थिति में एक नया मोड़ आएगा। उन्होंने जानकारी दी कि 8 नवंबर की रात से हल्की गति वाली पूर्वी हवाएं बहना शुरू हो सकती हैं। हवा के इस नए रुख के चलते दीपावली के ठीक आसपास वातावरण में जमा हानिकारक कणों को कुछ हद तक बिखरने और छंटने में मदद मिलेगी, जिससे फौरी राहत के संकेत मिल सकते हैं।
9 नवंबर से प्रदूषण में उछाल का नया अंदेशा
महेश पलावत ने आगे आगाह किया कि यह अस्थायी सुधार बहुत लंबा नहीं टिकेगा और 9 नवंबर को वायु गुणवत्ता की स्थिति दोबारा काफी बिगड़ सकती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि पूर्वी हवाओं की ताकत और गति दोनों बेहद कमजोर पड़ने की आशंका है। हवा का प्रवाह मंद पड़ते ही पटाखों और अन्य स्रोतों से निकले प्रदूषक तत्व वातावरण की निचली सतह में ही तेजी से जमा होने लगेंगे। इस रुकावट के सीधे नतीजे के तौर पर दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI में अचानक बड़ा उछाल दर्ज किया जा सकता है, जो सांस के मरीजों के लिए मुश्किलें बढ़ाएगा।
हवा की चाल और पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता
मौसम वैज्ञानिक नवदीप दहिया ने बताया कि 6 और 7 नवंबर को हवा की गति में मामूली सुधार देखा जा सकता है। मौजूदा समय में 5 किलोमीटर प्रति घंटे से भी धीमी चल रही हवाओं की रफ्तार बढ़कर लगभग 10-20 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। हवा की यह तेज गति दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में छाए भारी धूम कोहरे को साफ करने में मददगार साबित होगी। इस गतिशीलता से दोपहर और शाम के वक्त वायु गुणवत्ता में 20-30 प्रतिशत तक तथा रात के समय 10-20 प्रतिशत तक सुधार होने की पूरी संभावना है।
हालांकि नवदीप दहिया ने आगाह किया कि एक नया पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे रहा है। इस मौसमी तंत्र के सक्रिय होने से 8 से 13 नवंबर के बीच हवा की गति फिर से बेहद धीमी पड़ सकती है। इस अवधि में जब हवा का संचार ठहर जाएगा, तब समूचे क्षेत्र में वायु प्रदूषण मौजूदा मौसम के सबसे चरम स्तर तक पहुंच सकता है।
क्या होता है धूम कोहरा और कैसे घटती है दृश्यता
धूम कोहरा जिसे बोलचाल में स्मॉग कहा जाता है, दरअसल धुएं और प्राकृतिक कोहरे के आपसी मिश्रण से तैयार होता है। यह वायु प्रदूषण की एक बेहद जटिल और खतरनाक स्थिति है, जिसमें वातावरण में उड़ने वाली धूल, वाहनों का धुंआ और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले विषैले रसायन प्राकृतिक कोहरे की बूंदों के साथ रासायनिक रूप से घुलमिल जाते हैं। इस मिश्रण के कारण पूरे आसमान पर एक मटमैली और घनी धुंधली परत छा जाती है। इसके असर से न केवल हवा जहरीली हो जाती है, बल्कि जमीन पर दृश्यता यानी विजिबिलिटी भी बहुत घट जाती है, जिससे यातायात और सामान्य जनजीवन सीधे तौर पर प्रभावित होता है।



















