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अमेठी में ओला-उबर की तर्ज पर साफ होंगे शौचालय टैंक, ऐप और टोल-फ्री नंबर से होगी बुकिंगभारत
5 अग॰ 2026, 10:15 am (57 दिन पहले)· 0

अमेठी में ओला-उबर की तर्ज पर साफ होंगे शौचालय टैंक, ऐप और टोल-फ्री नंबर से होगी बुकिंग

अमेठी जिले में डिजिटल इंडिया पहल के तहत शौचालय टैंक सफाई के लिए ऐप और टोल-फ्री बुकिंग सेवा शुरू की गई है। विकास भवन में बने कंट्रोल रूम से 17 पंजीकृत वाहनों की जीपीएस से लाइव निगरानी होगी।

ग्रामीण और शहरी इलाकों में स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में एक नई पहल की शुरुआत की गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय (डीपीआरओ) ने डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत शौचालय टैंक सफाई सेवा को पूरी तरह हाईटेक बना दिया है। अब जिस तरह कैब बुकिंग के लिए ओला या उबर और आपातकालीन सहायता के लिए डायल 112 का उपयोग किया जाता है, उसी आधार पर ग्रामीण इलाकों में शौचालय टैंक खाली कराने के लिए डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को उचित दर पर पारदर्शी सेवाएं देना और खुले में मल फेंकने की प्रथा पर पूरी तरह लगाम लगाना है।

विकास भवन में स्थापित हुआ विशेष कंट्रोल रूम

इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए अमेठी के विकास भवन परिसर में एक केंद्रीय कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। इस कंट्रोल रूम से जिलेभर में चलने वाले शौचालय टैंक सफाई वाहनों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। आम नागरिकों और विभिन्न संस्थाओं की सुविधा के लिए एक समर्पित टोल-फ्री नंबर और मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया गया है। जब भी किसी व्यक्ति या संस्थान को शौचालय टैंक खाली कराने की आवश्यकता होगी, तो वे ऐप या टोल-फ्री नंबर के माध्यम से अपना अनुरोध दर्ज करा सकेंगे। अनुरोध प्राप्त होते ही कंट्रोल रूम में तैनात टीम आवेदक की लोकेशन के सबसे पास मौजूद सफाई वाहन को तुरंत मौके पर रवाना कर देगी।

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अनियंत्रित दामों और खुले में गंदगी फेंकने से मिलेगी निजात

अमेठी में इस डिजिटल पहल को शुरू करने के पीछे एक बड़ी वजह स्थानीय स्तर पर आ रही स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं। अब तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शौचालय टैंक खाली करने वाले वाहन चालकों पर विभाग का कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता था। इस वजह से वाहन चालक आम लोगों से मनमाना किराया वसूलते थे और असहाय नागरिकों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता था। इससे भी गंभीर समस्या यह थी कि सफाई के बाद टैंक से निकाली गई गंदगी को कई चालक खुले खेतों, नालों या खाली पड़े स्थानों में बहा देते थे। खुले में मल बहाने के कारण संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता था और आसपास के रहवासियों को दुर्गंध तथा स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता था।

बेनीपुर एफएसटीसी प्लांट में होगा वैज्ञानिक निस्तारण

पर्यावरण सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एकत्र किए गए फीकल स्लज (शौचालय मल) का सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित किया गया है। इसके लिए अमेठी ब्लॉक क्षेत्र के बेनीपुर में एक आधुनिक फीकल स्लज ट्रीटमेंट सेंटर (एफएसटीसी) प्लांट तैयार किया गया है। टैंकरों के माध्यम से उठाया गया संपूर्ण मल सीधे इसी बेनीपुर एफएसटीसी प्लांट में ले जाया जाएगा, जहां उसका प्रसंस्करण किया जाएगा। इस व्यवस्था से खुले में गंदगी नहीं फैलेगी और भूजल तथा आसपास का वातावरण दूषित होने से बचेगा।

17 वाहन पंजीकृत, बिना रजिस्ट्रेशन संचालन पर कड़ी कार्रवाई

अमेठी के डीपीआरओ मनोज त्यागी के अनुसार, इस योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए प्रारंभिक चरण में जिले के 17 शौचालय टैंक सफाई वाहनों का विभागीय पंजीकरण पूरा कर लिया गया है। इन सभी वाहनों को जीपीएस और डिजिटल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किया गया है। कंट्रोल रूम से हर वाहन की लाइव लोकेशन पर निगरानी रखी जाएगी। योजना के तहत संबंधित व्यक्ति या संस्था को निर्धारित किराया और तय शुल्क का भुगतान करना होगा, जिससे सेवा शुल्क में पूरी पारदर्शिता बनी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पंजीकरण के किसी भी वाहन को ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में शौचालय टैंक की सफाई करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई वाहन चालक बिना रजिस्ट्रेशन के इस कार्य में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

सवाल-जवाब

अमेठी में शौचालय टैंक खाली कराने की नई बुकिंग व्यवस्था क्या है?
अमेठी में ओला और उबर की तर्ज पर डिजिटल व्यवस्था शुरू की गई है, जिसमें नागरिक टोल-फ्री नंबर या मोबाइल ऐप के जरिए शौचालय टैंक सफाई के लिए वाहन बुक कर सकते हैं।
वाहनों की निगरानी कहां से और कैसे की जाएगी?
विकास भवन में एक केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से जीपीएस के जरिए पंजीकृत 17 वाहनों की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक की जाएगी।
टैंक से निकाली गई गंदगी का निस्तारण कहां किया जाएगा?
एकत्र किए गए मल का वैज्ञानिक निस्तारण अमेठी ब्लॉक स्थित बेनीपुर एफएसटीसी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट सेंटर) प्लांट में किया जाएगा।
बिना रजिस्ट्रेशन वाले सफाई वाहनों के संचालन पर क्या नियम है?
डीपीआरओ मनोज त्यागी के अनुसार बिना पंजीकरण के शौचालय टैंक सफाई करने वाले वाहनों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध है और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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