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अरुणाचल प्रदेश में सीमावर्ती सड़कों का जाल होगा मजबूत, मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बीआरओ प्रोजेक्ट ब्रह्मांक की समीक्षा कीअरुणाचल प्रदेश
6 अक्तू॰ 2026, 6:05 pm (21 दिन पहले)· 3

अरुणाचल प्रदेश में सीमावर्ती सड़कों का जाल होगा मजबूत, मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बीआरओ प्रोजेक्ट ब्रह्मांक की समीक्षा की

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सियांग घाटी सहित दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सामरिक सड़कों के निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया।

अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम और सीमावर्ती इलाकों में आवागमन को सुगम बनाने के मकसद से मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन यानी बीआरओ के प्रोजेक्ट ब्रह्मांक की समीक्षा की। इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के दूरदराज क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क के विस्तार और सामरिक बुनियादी ढांचे के निर्माण को गति देने पर मुख्य जोर दिया गया।

सियांग घाटी में बुनियादी ढांचे और संपर्क मार्गों पर मंथन

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रोजेक्ट ब्रह्मांक के चीफ इंजीनियर कार्यालय का दौरा किया। वहां उन्होंने चीफ इंजीनियर पंकज गोयल के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक में विशेष रूप से सियांग घाटी के संपूर्ण इलाके में संपर्क तंत्र को बेहतर बनाने और सड़कों के चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया गया। चीफ इंजीनियर पंकज गोयल ने मुख्यमंत्री को विभिन्न चालू परियोजनाओं, दूरदराज के इलाकों में रणनीतिक सड़कों के रखरखाव और नए सड़क संपर्कों की स्थिति से अवगत कराया। इस दौरान यह रेखांकित किया गया कि मजबूत संपर्क मार्ग सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास को रफ्तार देने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

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पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण पर जोर

समीक्षा बैठक के दौरान बीआरओ की ओर से सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण सुरक्षा और जवानों के कल्याण से जुड़े कदमों की जानकारी भी दी गई। इनमें 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम और पर्यावरण जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां शामिल रहीं। इस दौरे के मौके पर मुख्यमंत्री ने एक पौधा भी लगाया, जिससे संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को बल मिला।

पर्यटन क्षमता और आपसी समन्वय को बढ़ावा

कार्यक्रम के दौरान कर्नल आशीष रायसिंघानी ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू को एक पुस्तक भेंट की, जिसमें अरुणाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, पर्वतीय दृश्यों, अल्पज्ञात पर्यटन स्थलों और पर्यटन विकास के नए अवसरों को संजोया गया है। इस पूरे दौरे का मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास, रणनीतिक पहुंच और साझा प्राथमिकताओं के मुद्दों पर राज्य प्रशासन और बीआरओ के बीच तालमेल को और सुदृढ़ करना था। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट ब्रह्मांक के अधिकारियों और जवानों से संवाद किया तथा अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके समर्पण की सराहना की।

सवाल-जवाब

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने किस परियोजना की समीक्षा की?
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के तहत संचालित प्रोजेक्ट ब्रह्मांक की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की।
प्रोजेक्ट ब्रह्मांक के किस अधिकारी ने मुख्यमंत्री को कार्यों की जानकारी दी?
प्रोजेक्ट ब्रह्मांक के चीफ इंजीनियर पंकज गोयल ने मुख्यमंत्री को चल रहे कार्यों और सड़क नेटवर्क के विकास की विस्तृत जानकारी दी।
सड़क निर्माण के अलावा बीआरओ की किन पहलों पर चर्चा हुई?
बैठक में 'एक पेड़ मां के नाम' के तहत पौधरोपण, स्वच्छता अभियान, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और पर्यावरण जागरूकता जैसी पहलों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री को अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन पर पुस्तक किसने भेंट की?
कर्नल आशीष रायसिंघानी ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू को राज्य की पर्यटन क्षमता पर केंद्रित एक पुस्तक भेंट की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·20 दिन पहले

दुर्गम पहाड़ों में सड़क बनाना कितना मुश्किल होता है, यह मैंने तब देखा था जब कुछ साल पहले आल्प्स के एक सुदूर रास्ते पर हमारी गाड़ी फंस गई थी। भारत के इन सरहदी इलाकों में काम करने वाले बीआरओ के जवानों की मेहनत वाकई कमाल की है, जो हर मौसम में डटे रहते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·20 दिन पहले

दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़कें बनाना वाकई बहुत चुनौती भरा काम है, खासकर तब जब मौसम अक्सर खराब रहता है। बीआरओ के जवान वहां इतनी मुश्किल परिस्थितियों में काम करते हैं, लेकिन क्या इन सड़कों के रखरखाव के लिए कोई ऐसा परमानेंट प्लान है जो हर साल भूस्खलन के बाद इन्हें जल्दी ठीक कर सके?

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·20 दिन पहले

रवि जी, बीआरओ चीफ पंकज गोयल जी से बात हुई होगी तो उन्होंने कोई स्थायी उपाय सोचा ही होगा, पर मौसम का हाल कौन टाल सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

सड़कें तो ज़रूरी हैं, पर हर बार पर्यावरण बचाने की बातें सिर्फ दिखावा ही लगती हैं जब पहाड़ों में इतना निर्माण हो।

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

रोहन भाई, आपकी बात सही है पर मैं जब तवांग गया था तब समझा कि फौज और स्थानीय लोगों के लिए ये सड़कें कितनी जीवनरेखा जैसी हैं।

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