ईटानगर के पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर 2 में हाल ही में मानवाधिकार जागरूकता, लैंगिक समानता और समावेशी शिक्षा जैसे अहम विषयों पर एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बुधवार को आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष मॉनिटर प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने मुख्य रूप से शिरकत की और स्कूल के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षकों से भी व्यापक चर्चा की।
अतिथियों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन में कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में ईटानगर स्थित राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी के सहायक निदेशक एस. बी. सिंह के साथ-साथ समर बहादुर भी मौजूद रहे। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के उप रजिस्ट्रार मामा तांग, विद्यालय के प्रधानाचार्य विनय कुमार और अन्य शिक्षक व छात्र भी इस सत्र का हिस्सा बने।
सत्र का मुख्य उद्देश्य और विचार
सत्र के दौरान समानता, मानवीय गरिमा, आपसी आदर और किसी भी तरह के भेदभाव से दूर रहने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को यह समझाया कि वे अपने दैनिक जीवन में सहिष्णुता, सामाजिक जिम्मेदारी और विभिन्न दृष्टिकोणों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करें। प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि मानवाधिकारों और लैंगिक संवेदनशीलता को स्कूली जीवन की दिनचर्या में शामिल किया जाना बेहद जरूरी है ताकि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार हो सकें जो समानता और मानवीय गरिमा को हमेशा सर्वोपरि रखें।
विद्यालय की पहल और गतिविधियां
विद्यालय के प्रधानाचार्य विनय कुमार ने इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए स्कूल की तरफ से चलाई जा रही उन तमाम पहलों का जिक्र किया जो मानवाधिकार जागरूकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने लैंगिक संवेदनशील बुनियादी ढांचे और विकलांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध समावेशी सुविधाओं पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार, युवा संसद, राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस और राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित न रहकर महत्वपूर्ण मंच का काम करती हैं।
छात्रों के विकास के अन्य आयाम
प्रधानाचार्य ने आगे बताया कि युवा संसद के माध्यम से छात्र लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संवैधानिक मूल्यों को गहराई से समझते हैं। इससे उनमें शोध करने की क्षमता, गंभीर सोच, जनसभाओं में बोलने का कौशल, सक्रिय रूप से सुनने की कला और अलग-अलग विचारों का सम्मान करने की योग्यता का विकास होता है। विज्ञान और गणित मंडलों की सक्रियता, विषय विशेषज्ञों के साथ चर्चा और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के शैक्षणिक दौरे विद्यार्थियों के ज्ञान को नया आयाम देते हैं। इसके अलावा, एक भारत श्रेष्ठ भारत, प्रयास और प्रेरणा जैसी योजनाएं भी बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को और अधिक समृद्ध बनाती हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप प्रतिबद्धता
यह पूरा कार्यक्रम विद्यालय की उस प्रतिबद्धता को पूरी तरह पुष्ट करता है जिसके तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना के अनुरूप विद्यार्थियों को एक सुरक्षित, समावेशी और समतामूलक शैक्षणिक माहौल मुहैया कराया जा रहा है। इस तरह के आयोजनों से छात्रों के भीतर नैतिक मूल्यों की मजबूत नींव पड़ती है जो उनके भविष्य के निर्माण में मददगार साबित होती है।



















