अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम के ताजा संबोधन में, PM नरेंद्र मोदी ने सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त और अटूट रुख को एक बार फिर रेखांकित किया है. 'मन की बात' के 138वें एपिसोड के दौरान, PM ने साल 2016 में की गई ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक को याद किया. उन्होंने बताया कि किस तरह 28 और 29 सितंबर 2016 को भारतीय जांबाजों ने नियंत्रण रेखा (LOC) के पार जाकर आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक नष्ट किया था. PM मोदी के अनुसार, इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई ने पूरी दुनिया के सामने भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति का एक नया और ठोस उदाहरण पेश किया था, जिसे देखकर पूरी दुनिया हैरान रह गई थी.
सक्रिय रक्षा रणनीति का नया दौर
PM मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक दशक में भारत की सुरक्षा नीति में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर 'ऑपरेशन सिंदूर' तक, देश ने बार-बार दुश्मन ताकतों को यह स्पष्ट चेतावनी दी है कि भारत पर आंख उठाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. भारत अब आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' यानी शून्य सहनशीलता की नीति पर चल रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम देश की सीमाओं पर साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं. यह सैन्य आक्रामकता विशेष रूप से उरी हमले के बाद से शुरू हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों को आतंकवादियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की पूरी आजादी दी गई थी.
ऑपरेशन सिंदूर पर राजनीतिक विमर्श
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इन अभियानों को लेकर देश के भीतर राजनीतिक मंचों पर भी तीखी बहसें देखने को मिली हैं. जुलाई 2025 में लोकसभा के भीतर 'ऑपरेशन सिंदूर' पर एक विशेष और व्यापक चर्चा आयोजित की गई थी, जिसमें अनुराग सिंह ठाकुर सहित कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया था और स्वयं PM ने भी संसद को संबोधित किया था. इस रक्षा नीति पर राजनीतिक मतभेद भी उजागर हुए हैं, जहां जनवरी 2026 में मणिशंकर अय्यर जैसे नेताओं ने इस सैन्य अभियान को रोकने और पाकिस्तान के साथ बातचीत की मेज पर लौटने की वकालत की थी, जिसका सत्ताधारी दल ने जोरदार विरोध किया था.
देश की सुरक्षा और राजनीतिक नेतृत्व
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पीएम मोदी के देश की रक्षा के प्रति संकल्प की सराहना की है. अमित शाह ने स्पष्ट किया कि चाहे सर्जिकल स्ट्राइक हो, एयर स्ट्राइक हो या फिर ऑपरेशन सिंदूर, मोदी सरकार की मजबूत रक्षा नीतियों के कारण आज देश के दुश्मन थर-थर कांपते हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक नोकझोंक भी लगातार जारी है, जैसा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के खिलाफ राहुल गांधी की टिप्पणी पर तीखा पलटवार करने के दौरान देखा गया था. PM मोदी ने अपने संबोधन के अंत में विश्वास जताया कि देश की यह अटूट सुरक्षा नीति आगे भी भारत को सुरक्षित रखने का काम करती रहेगी.
















