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बाहर से फिट दिखने वाले भी क्यों हो रहे जिम में दिल के दौरे के शिकार, हृदय रोग विशेषज्ञ ने समझाए बड़े कारणहरियाणा
9 अक्तू॰ 2026, 7:45 pm (28 दिन पहले)· 2

बाहर से फिट दिखने वाले भी क्यों हो रहे जिम में दिल के दौरे के शिकार, हृदय रोग विशेषज्ञ ने समझाए बड़े कारण

शारीरिक रूप से तंदुरुस्त दिखने का मतलब यह नहीं कि दिल भी स्वस्थ है, अनजानी बीमारियों और अत्यधिक कसरत के खतरों को लेकर विशेषज्ञ ने दी सतर्क रहने की सलाह।

वर्कआउट के दौरान अचानक अस्वस्थ होने और दिल का दौरा पड़ने की बढ़ती घटनाओं ने कई लोगों को अचंभे में डाल दिया है। अक्सर यह सवाल सामने आता है कि बाहर से पूरी तरह तंदुरुस्त और सक्रिय दिखने वाले व्यक्ति को अचानक गंभीर हृदय रोग कैसे घेर सकता है। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. गौतम सिंघल के अनुसार, केवल बाहरी शारीरिक बनावट से यह तय नहीं होता कि भीतर से दिल भी उतना ही मजबूत और निरोगी है।

छिपी हुई बीमारियां और क्षमता से अधिक मेहनत का जोखिम

हृदय से जुड़ी कई ऐसी समस्याएं होती हैं जो व्यक्ति के शरीर के भीतर बिना किसी स्पष्ट संकेत के मौजूद रहती हैं। सामान्य दिनचर्या में इनके कोई विशेष लक्षण महसूस नहीं होते। जब कोई व्यक्ति अचानक जिम जाकर भारी वर्कआउट शुरू करता है, तो दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और ये छिपी हुई बीमारियां उभरकर सामने आ जाती हैं। इसके अलावा, कई लोग दूसरों की नकल करते हुए या जल्द परिणाम पाने के चक्कर में अपनी शारीरिक सीमा से अधिक भारी वजन उठा लेते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

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आयु वर्ग के अनुसार अलग होनी चाहिए वर्कआउट की रूपरेखा

डॉ. गौतम सिंघल स्पष्ट करते हैं कि व्यायाम अपने आप में हानिकारक नहीं है, बल्कि यह हर आयु वर्ग के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि किस उम्र में किस प्रकार का वर्कआउट उपयुक्त रहेगा। सत्तर वर्ष के बुजुर्ग, पचास वर्ष के प्रौढ़ व्यक्ति और बीस से चालीस वर्ष के युवाओं के लिए शारीरिक अभ्यास का स्वरूप, तीव्रता और तरीका एक जैसा नहीं हो सकता। हर व्यक्ति को अपनी उम्र और शारीरिक क्षमता के अनुसार ही कसरत चुननी चाहिए।

जिम में अचेत होना सामान्य नहीं, तुरंत जरूरी है ध्यान

व्यायाम के दौरान अचानक बेहोश होने के पीछे शरीर में पानी की कमी अथवा ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव जैसे कारण हो सकते हैं। लेकिन यह स्थिति वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया और वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन जैसी हृदय की गंभीर और प्राणघातक धड़कन संबंधी विसंगतियों का संकेत भी हो सकती है। इन गंभीर खतरों से निपटने के लिए हर फिटनेस सेंटर में ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर यानी AED की उपलब्धता अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। साथ ही, वहां मौजूद प्रशिक्षकों और लोगों को सीपीआर देने की बुनियादी प्रक्रिया की जानकारी होना आवश्यक है।

गंभीर चेतावनी संकेतों को सामान्य थकान समझने की भूल न करें

कसरत करते समय हल्का पसीना आना, दिल की गति थोड़ी तेज होना या सामान्य रूप से सांस भरना एक स्वाभाविक शारीरिक प्रतिक्रिया है। इसके विपरीत, यदि अचानक बहुत अधिक पसीना छूटने लगे, सांस अत्यधिक फूलने लगे, चक्कर आने लगें या छाती में दबाव का अहसास हो, तो इसे केवल सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई देते ही तुरंत कसरत रोक देनी चाहिए और बिना देर किए चिकित्सीय जांच करानी चाहिए।

तीस से चालीस की उम्र वालों के लिए पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी

भारतीयों में कम उम्र में ही हृदय संबंधी विकार सामने आने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। इसलिए तीस से चालीस वर्ष की आयु में नियमित व्यायाम शुरू करने से पहले बुनियादी स्वास्थ्य जांच करवा लेना बेहद जरूरी है। इसमें ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और आवश्यकता पड़ने पर ईसीजी एवं इको टेस्ट शामिल हैं। जिन परिवारों में कम उम्र में अचानक मृत्यु का इतिहास रहा हो, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। नियमित जांच, संतुलित व्यायाम और शरीर से मिलने वाले संकेतों की पहचान से हृदय से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

सवाल-जवाब

क्या बाहर से पूरी तरह फिट दिखने वाले व्यक्ति को भी दिल की बीमारी हो सकती है?
हां, शरीर से फिट दिखने का मतलब यह नहीं कि दिल भी स्वस्थ है। कई बार अंदरूनी हृदय संबंधी समस्याएं बिना किसी बाहरी लक्षण के शरीर में मौजूद रह सकती हैं।
जिम में अचानक बेहोश होने के क्या कारण हो सकते हैं?
बेहोश होने का कारण पानी की कमी या ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसके अलावा वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया और वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन जैसी गंभीर हृदय समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।
कसरत के दौरान किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
यदि सांस अत्यधिक फूलने लगे, सीने में दबाव महसूस हो, चक्कर आएं या बहुत ज्यादा पसीना आने लगे, तो कसरत तुरंत रोककर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
जिम शुरू करने से पहले 30 से 40 वर्ष की आयु के लोगों को कौन सी जांच करानी चाहिए?
इस उम्र के लोगों को ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और आवश्यकता पड़ने पर ईसीजी एवं इको टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
जिम परिसरों में आपातकालीन स्थिति के लिए क्या व्यवस्था होनी चाहिए?
हर जिम में ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) उपलब्ध होना चाहिए और वहां मौजूद लोगों को सीपीआर देने की जानकारी होनी चाहिए।
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टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·27 दिन पहले

शरीर बाहर से कितना भी कसा हुआ क्यों न दिखे, आंतरिक ग्रहों की चाल और जन्मपत्री के योग शरीर की असली ताकत बताते हैं। बिना सोचे-समझे जिम में पसीना बहाना काल को न्योता देना है।

Ravikash Gupta@ravikash·27 दिन पहले

जिम में आजकल जो हो रहा है वो डराने वाला है। फिटनेस का मतलब सिर्फ बाहर से बॉडी बनाना नहीं होता, अंदर का दिल भी ठीक होना चाहिए। बिना ट्रेनर की सलाह के भारी वजन उठाना और दूसरों की देखा-देखी करना बहुत भारी पड़ सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 दिन पहले

रविकेश भाई, बात सही है पर ट्रेनर को बीच में लाना हर बार ठीक नहीं। कई बार ट्रेनर खुद ही जोश में हद पार करवा देते हैं, असली गलती तो खुद की समझ की होती है।

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

कल ही जिम में एक लड़के को सीने में तेज दर्द की बात कहते सुना था, भगवान का शुक्र है कि उसने तुरंत वर्कआउट रोक दिया। आजकल लोग दूसरों की देखादेखी बिना अपनी क्षमता जाने इतना भारी वजन उठा लेते हैं कि दिल पर हद से ज्यादा दबाव पड़ जाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। दूसरों की होड़ में लोग भूल जाते हैं कि अंदर से शरीर की क्या हालत है, ये जिम की मौतें डराने वाली हैं।

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