दीपावली के पावन पर्व पर मां लक्ष्मी की आराधना के लिए घरों और मंदिरों में सोने और चांदी की भव्य थालियां सजाने की परंपरा रही है। इसी पावन अवसर को ध्यान में रखते हुए राजस्थान के उदयपुर में पारंपरिक कला का एक असाधारण नमूना सामने आया है। शहर के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सूक्ष्म स्वर्ण शिल्पी इकबाल सक्का ने एक ऐसी विलक्षण पूजा थाली तैयार की है, जिसे नंगी आंखों से स्पष्ट देखना लगभग नामुमकिन है। इस सूक्ष्म कृति की हर बारीक नक्काशी को निहारने के लिए मैग्नीफाइंग लेंस की आवश्यकता पड़ती है।
पान के आकार में सजी एक सेंटीमीटर की चांदी की थाली
इकबाल सक्का की यह कलाकृति भारतीय बारीक हस्तशिल्प का बेजोड़ उदाहरण है। उन्होंने महज एक सेंटीमीटर आकार की चांदी की थाली तैयार की है, जिसे बेहद सुरुचिपूर्ण पान का आकार दिया गया है। इस सूक्ष्म थाली के भीतर रखी गई पूजा सामग्री का आकार लगभग एक-एक मिलीमीटर का है, जो देखने में सरसों या राई के दाने से भी छोटा प्रतीत होता है। इतनी सूक्ष्म सामग्री को थाली पर व्यवस्थित रूप से सजाना शिल्पकला के उच्च स्तर को प्रमाणित करता है।
राई के दाने से भी छोटी पूजा सामग्री और लक्ष्मी पगल्या
इस अद्भुत थाली में दीपावली पूजन के लिए आवश्यक हर पारंपारिक वस्तु को पूरी श्रद्धा और सूक्ष्मता के साथ शामिल किया गया है। थाली के भीतर सोने की बत्ती से युक्त एक नन्हा दीपक स्थापित किया गया है। इसके अतिरिक्त पूजन के लिए अक्षत यानी चावल के दाने, जल अर्पण के लिए एक अत्यंत छोटा पानी का कटोरा, रोली-कुमकुम रखने की सूक्ष्म डिब्बी, एक सूक्ष्म नारियल और पूजा का पवित्र कलावा भी रखा गया है। थाली में एक ऐसा विशेष सिक्का भी शामिल है जो सोने और चांदी के मिश्रण से बना है और जिसमें बारीक छेद है। देवी लक्ष्मी के आगमन और आशीर्वाद के प्रतीक के तौर पर थाली में चांदी की दो नन्हीं पगल्या भी विशेष रूप से उकेरी गई हैं। इन सभी वस्तुओं की नक्काशी इतनी बारीक है कि लेंस के बिना इनके विवरण को समझ पाना संभव नहीं है।
तीन दिन का कठोर परिश्रम और एक ग्राम धातु का उपयोग
इस सूक्ष्म कृति के निर्माण के विषय में जानकारी देते हुए इकबाल सक्का ने बताया कि इसे पूर्ण रूप से गढ़ने में उन्हें लगातार तीन दिन का कठिन समय लगा। धातु के उपयोग की बात करें तो इसमें कुल मिलाकर मात्र आधा ग्राम चांदी और आधा ग्राम सोने का प्रयोग किया गया है। धातुओं की इतनी न्यूनतम मात्रा में इतनी सटीक, सुव्यवस्थित और आकर्षक पूजा सामग्री गढ़ना शिल्पी के दशकों के धैर्य, एकाग्रता और सूक्ष्म शिल्प के अनुभव का प्रमाण है। इकबाल सक्का के अनुसार, यह कलाकृति विश्व की सबसे छोटी दीपावली पूजा थाली का रिकॉर्ड प्रस्तुत करती है।
221 विश्व रिकॉर्ड दर्ज करा चुके हैं इकबाल सक्का
उदयपुर के इकबाल सक्का सूक्ष्म शिल्पकला की दुनिया में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वे अपनी अनूठी कलाकृतियों के दम पर अब तक 221 विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं और दुनिया की प्रतिष्ठित रिकॉर्ड पुस्तकों में अपनी जगह दर्ज करा चुके हैं। उनकी यह विशेषता रही है कि वे अपनी प्रत्येक उपलब्धि और रिकॉर्ड को देश के सम्मान को समर्पित करते हैं। उनका स्पष्ट उद्देश्य अपनी कला के माध्यम से वैश्विक मंच पर भारत का मस्तक ऊंचा करना है।
दीपावली के अवसर पर बनाई गई इस सूक्ष्म थाली को उन्होंने मां लक्ष्मी के चरणों में अपनी गहरी आस्था के रूप में समर्पित किया है। उनका यह भाव है कि देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद देश के प्रत्येक घर और नागरिक तक पहुंचे तथा सभी परिवारों में निरंतर सुख, समृद्धि और खुशहाली का वास हो। सोने और चांदी के अति सूक्ष्म कणों से तराशी गई यह थाली न केवल इस बार के दीपोत्सव को विशेष बना रही है, बल्कि पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और एक भारतीय कलाकार की अद्वितीय कल्पनाशक्ति की गूंज भी दुनिया भर में पहुंचा रही है।



















