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बालाघाट के नांदगांव में लोकलाज के डर से नवजात की हत्या, राज खुलने पर आरोपी नाना ने खाया कीटनाशकमध्य प्रदेश
1 अग॰ 2026, 11:58 pm (88 दिन पहले)· 1

बालाघाट के नांदगांव में लोकलाज के डर से नवजात की हत्या, राज खुलने पर आरोपी नाना ने खाया कीटनाशक

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में सामाजिक बदनामी से बचने के लिए एक परिवार ने अविवाहित बेटी के नवजात शिशु को जिंदा गोबर के ढेर में दफना दिया, जिससे बच्चे की मौत हो गई।

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर देने वाली एक नृशंस वारदात सामने आई है। वारासिवनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नांदगांव के गोपीटोला गांव में सामाजिक बदनामी और लोकलाज के भय से एक परिवार ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। यहां एक अविवाहित युवती द्वारा शिशु को जन्म दिए जाने के बाद, उसके पिता यानी नवजात के नाना ने शिशु को जीवित ही गोबर के ढेर में दफना दिया। दो दिनों तक गोबर के घूरे में बंद रहने के कारण मासूम ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। इस घटना के सामने आते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।

अनचाहे गर्भ और घर में प्रसव का पूरा मामला

गोपीटोला की रहने वाली एक अविवाहित युवती का गांव के ही एक परिचित युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था, जिसके चलते वह गर्भवती हो गई थी। स्थानीय आशा कार्यकर्ता को युवती के गर्भवती होने की जानकारी पहले से थी। हालांकि, परिवार के लोगों ने इस पूरी बात को समाज और पड़ोसियों से छुपाकर घर के भीतर ही सीमित रखने का प्रयास किया। 29 और 30 जुलाई की मध्यरात्रि को युवती को अचानक तेज प्रसव पीड़ा हुई और उसने घर पर ही एक नवजात शिशु को जन्म दे दिया। आधी रात को बच्चे का जन्म होते ही परिवार में हड़कंप मच गया और समाज में बात उजागर होने के डर से परिजन भयभीत हो उठे।

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गोबर के घूरे में जिंदा दफनाने की खौफनाक साजिश

लोकलाज के खौफ में युवती के पिता और नवजात शिशु के नाना धारासिंह मड़ावी ने एक खौफनाक कदम उठाया। उसने जन्म के तुरंत बाद नवजात बालक के मुंह और गले को कपड़े से कसकर बांध दिया ताकि उसकी आवाज बाहर न आ सके। इसके बाद आरोपी नाना ने मासूम को एक कपड़े में लपेटा और अपने मकान के पीछे बने गोबर के घूरे में गड्डा खोदकर जिंदा ही दफना दिया। आरोपी को लगा था कि इस काली करतूत की भनक किसी को नहीं लगेगी, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।

पड़ोसियों की सतर्कता से खुला राज

यह खौफनाक राज 30 जुलाई की रात को उस समय उजागर होना शुरू हुआ, जब धारासिंह मड़ावी के घर के पास से गुजर रहे पड़ोसियों ने किसी शिशु के रोने की धीमी आवाज सुनी। अगली सुबह जब गांव वालों ने परिवार के सदस्यों से इस बारे में पूछताछ की, तो वे बातें टालने लगे और गोलमोल जवाब देने लगे। पड़ोसियों का संदेह गहरा गया, जिसके बाद उन्होंने आंगनवाड़ी की आशा कार्यकर्ता को मौके पर बुलाया। आशा कार्यकर्ता ने ग्रामीणों को स्पष्ट बताया कि इस घर की बेटी कई महीनों से गर्भवती थी और निश्चित रूप से घर में शिशु का जन्म हुआ है। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए 31 जुलाई को ग्राम सरपंच और समाज के प्रबुद्ध लोगों की एक आपात बैठक बुलाई गई।

आरोपी नाना ने पिया जहर, पुलिस और नायब तहसीलदार ने निकाला शव

गांव की बैठक में राज पूरी तरह खुल जाने और पुलिस में शिकायत की तैयारी होते देख आरोपी नाना धारासिंह मड़ावी घबरा गया। अपनी करतूत पकड़े जाने के डर से उसने कीटनाशक दवा का सेवन कर लिया। उसकी हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत वारासिवनी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे गंभीर हालत में आगे के इलाज के लिए रेफर कर दिया। इस बीच ग्रामीणों ने घटना की सूचना वारासिवनी थाना पुलिस को दी। 31 जुलाई की रात पुलिस बल गांव पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद अगले दिन 1 अगस्त को नायब तहसीलदार चंदकिशोर ककोडिया, डॉक्टरों की टीम और पुलिस की मौजूदगी में गोबर के ढेर को खुदवाकर मृत नवजात के शव को बाहर निकाला गया। शव का मुआयना करने पर मासूम के मुंह और गले में कपड़ा बंधा पाया गया, जिससे यह साफ हो गया कि बच्चे को जिंदा ही दफनाया गया था। फिलहाल वारासिवनी पुलिस पूरे मामले में अग्रिम कानूनी कार्रवाई कर रही है।

सवाल-जवाब

बालाघाट के नांदगांव में नवजात की हत्या का यह मामला क्या है?
बालाघाट के नांदगांव में एक अविवाहित युवती द्वारा जन्म दिए गए नवजात शिशु को उसके नाना ने सामाजिक बदनामी के डर से जिंदा ही गोबर के ढेर में दफना दिया था, जिससे बच्चे की मौत हो गई।
इस घटना का राज कैसे उजागर हुआ?
30 जुलाई की रात को पड़ोसियों ने घर से बच्चे के रोने की आवाज सुनी थी। जब परिजनों ने टालमटोल की, तो आशा कार्यकर्ता और ग्रामीणों की मदद से 31 जुलाई को पूरा मामला सामने आया।
आरोपी नाना कौन है और उसने क्या कदम उठाया?
आरोपी का नाम धारासिंह मड़ावी है। राज खुलने के डर से उसने कीटनाशक (जहर) खा लिया, जिसके बाद उसे वारासिवनी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया।
प्रशासन ने मामले में क्या कानूनी कार्रवाई की है?
1 अगस्त को नायब तहसीलदार चंदकिशोर ककोडिया, डॉक्टरों और पुलिस की मौजूदगी में नवजात का शव गोबर के गड्ढे से बाहर निकाला गया। वारासिवनी पुलिस मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई कर रही है।
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