हरियाणा के फरीदाबाद जिले में साइबर ठगी की एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहाँ 'प्लेबॉय' की नौकरी दिलाने का झूठा लालच देकर एक स्थानीय युवक से 89,750 रुपये की रकम ऐंठ ली गई। पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए फरीदाबाद साइबर सेंट्रल थाना पुलिस ने इस गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी दो पुरुषों और एक महिला को इस मामले में धर दबोचा है। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपियों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत सोशल मीडिया नेटवर्क का इस्तेमाल कर इस ठगी को अंजाम दिया था।
सोशल मीडिया से व्हाट्सऐप तक फैलाया जाल
इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक अज्ञात प्रोफाइल से आई फ्रेंड रिक्वेस्ट के साथ हुई थी। फरीदाबाद निवासी पीड़ित युवक ने जब इस रिक्वेस्ट को स्वीकार किया, तो दोनों पक्षों में बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। कुछ दिनों तक साधारण बातचीत होने के बाद बातचीत का माध्यम बदलकर व्हाट्सऐप कर दिया गया। इसके बाद 31 अगस्त को युवक के पास व्हाट्सऐप पर 'प्लेबॉय' के रूप में काम करने और मोटी कमाई करने का ऑफर भेजा गया। ठगों ने पीड़ित को झांसे में लेने के लिए शुरुआत में केवल 1,200 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने को कहा।
किस्तों में ऐंठे गए कुल 89,750 रुपये
जैसे ही पीड़ित युवक ने 1,200 रुपये का शुरुआती भुगतान किया, ठगों की मांगें बढ़ती चली गईं। कभी प्रोफाइल वेरिफिकेशन तो कभी सिक्योरिटी डिपॉजिट और अन्य औपचारिकताओं का हवाला देकर युवक से बार-बार पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया। पीड़ित भी नौकरी मिलने की उम्मीद में अलग-अलग डिजिटल लेन-देन के जरिए पैसे भेजता रहा। जब कुल रकम 89,750 रुपये तक पहुँच गई और नौकरी का कोई अतापता नहीं चला, तब पीड़ित को अहसास हुआ कि उसके साथ ठगी हो चुकी है। इसके बाद उसने बिना देरी किए फरीदाबाद के साइबर सेंट्रल थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंगलवार को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
नोएडा सेक्टर-58 में बना रखा था ठिकाना
पुलिस प्रवक्ता द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में फिरोज खान और प्रकाश मुख्य साझेदार के रूप में काम कर रहे थे। इन दोनों ने साइबर अपराध की गतिविधियों को अंजाम देने के लिए नोएडा के सेक्टर-58 में एक कमरा किराये पर लिया हुआ था। इसी किराए के मकान से यह पूरा फर्जीवाड़ा संचालित हो रहा था। गिरोह में शामिल महिला आरोपी का काम व्हाट्सऐप के जरिए संभावित शिकार से मीठी-मीठी बातें करना और नौकरी का फर्जी आश्वासन देकर उनका विश्वास जीतना था, ताकि वे आसानी से पैसे ट्रांसफर करने के लिए तैयार हो जाएं।
आरोपियों की शिक्षा और न्यायिक हिरासत
पुलिस जांच में गिरफ्तार आरोपियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि का भी खुलासा हुआ है। मुख्य आरोपी फिरोज खान व्यवसाय प्रशासन में स्नातक यानी BBA डिग्री धारक है, जबकि उसका दूसरा साथी प्रकाश 12वीं कक्षा भी पास नहीं कर पाया है। तीसरा सदस्य गाजियाबाद की रहने वाली महिला है जो पीड़ित से बातचीत में जुटी हुई थी। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अन्य कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।



















