दोहरे पैन कार्ड मामले में सजा काट रहे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की क्रिमिनल रिवीजन याचिकाओं पर इलाहाबाद हाई कोर्ट गुरुवार, 29 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाने जा रहा है। दोनों नेताओं ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
सजा पर रोक और अंतरिम जमानत की गुहार
आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने अपनी याचिकाओं में निचली अदालत के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने, सुनाई गई सजा को निलंबित करने और मामले की सुनवाई जारी रहने तक अंतरिम जमानत पर रिहा करने का अनुरोध किया है। बचाव पक्ष का तर्क है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कई कानूनी विसंगतियां हैं, जिन्हें हाई कोर्ट के समक्ष स्पष्ट किया गया है।
अदालती कार्यवाही का घटनाक्रम और जजों का अलग होना
इस बहुचर्चित मुकदमे की सुनवाई के दौरान कई कानूनी पड़ाव आए। अगस्त माह के पहले हफ्ते में जस्टिस विक्रम डी चौहान ने दो पैन कार्ड से जुड़े इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद पूरे मामले को आगे की आवश्यक कार्रवाई और नई पीठ गठित करने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा गया था।
इससे पहले, बेटे अब्दुल्ला आजम ने अपने पिता द्वारा दायर चुनौती के बाद फैसले को चुनौती दी थी, जिसके बाद 15 जुलाई को दोनों याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई तय की गई थी। दूसरी तरफ, दोनों नेताओं की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब अभियोजन पक्ष की ओर से सजा बढ़ाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर भी हाई कोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।
ट्रायल कोर्ट का फैसला और कानूनी पेच
फर्जी और दो अलग-अलग जन्मतिथियों व विवरणों के आधार पर दोहरे पैन कार्ड बनवाने के गंभीर आरोपों को लेकर यह कानूनी विवाद उपजा था। ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी करार देते हुए सजा मुकर्रर की थी। अब सभी की निगाहें इलाहाबाद हाई कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हैं कि क्या दोनों को राहत मिलती है या फिर निचली अदालत का फैसला बरकरार रहता है।


















