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बलांगीर में हनुमान सिक्के के नाम पर कारोबारी का अपहरण, महिला SI और पत्रकार भी गिरफ्तारभारत
17 अग॰ 2026, 10:27 pm (44 दिन पहले)· 3

बलांगीर में हनुमान सिक्के के नाम पर कारोबारी का अपहरण, महिला SI और पत्रकार भी गिरफ्तार

ओडिशा के बलांगीर में हनुमान जी की छवि वाले दुर्लभ सिक्के के नाम पर एक कारोबारी को अगवा कर बंधक बनाया गया, जिसके बाद पुलिस ने महिला सब-इंस्पेक्टर और एक पत्रकार समेत मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया।

ओडिशा के बलांगीर जिले में एक अजीबोगरीब ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें एक कारोबारी को बंदूक की नोक पर अगवा कर हनुमान जी की तस्वीर वाले एक पुराने सिक्के के नाम पर करोड़ों रुपये ऐंठने की कोशिश की गई। पुलिस ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश करते हुए एक महिला सब-इंस्पेक्टर और एक पत्रकार समेत मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है।

कैसे चलता है हनुमान सिक्का रैकेट?

पश्चिमी ओडिशा में लंबे समय से एक खास तरह का ठगी गिरोह सक्रिय है, जो तांबे या पीतल से बने पुराने सिक्कों को लेकर अंधविश्वास फैलाता है। इन सिक्कों पर हनुमान जी की आकृति उकेरी होती है और गिरोह के सदस्य लोगों को यकीन दिलाते हैं कि इनमें अलौकिक शक्ति है और विदेशी बाजार में इनकी कीमत करोड़ों रुपये तक जा सकती है। इसी लालच और अंधविश्वास का सहारा लेकर आम लोगों से मोटी रकम वसूली जाती है।

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रंदा चौक से अगवा हुए कारोबारी

इसी रैकेट की चपेट में इस बार बलांगीर के 62 वर्षीय कारोबारी नरेंद्र साहू आए, जिन्हें लोग गुंडा साहू के नाम से भी जानते हैं। 14 अगस्त को मुख्य आरोपी 50 वर्षीय क्षितिश चंद्र साहू और उसके साथियों ने नरेंद्र को रंदा चौक पर बुलाया। वहां पिस्टल दिखाकर उन्हें जबरन गाड़ी में बिठाया गया और सीधे भुवनेश्वर ले जाया गया, जहां एक होटल के कमरे में उन्हें बंधक बनाकर रखा गया। हालांकि पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए अगले ही दिन नरेंद्र को भुवनेश्वर से सकुशल छुड़ा लिया।

2.7 करोड़ के पुराने लेन-देन का दावा, पर सबूत नदारद

उत्तरी रेंज के आईजी हिमांशु कुमार लाल के मुताबिक आरोपी क्षितिश यह दावा करता रहा कि उसने 2020 में एक दुर्लभ सिक्के के बदले नरेंद्र को 2.7 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन बदले में उसे न तो सिक्का मिला और न ही पैसे वापस आए। जांच में पुलिस को इस कथित लेन-देन से जुड़ा कोई ठोस वित्तीय दस्तावेज या सबूत नहीं मिल पाया।

पिस्टल हाथ में थमाकर बनवाया फर्जी वीडियो

बलांगीर के एसपी अभिलाष जी. ने बताया कि बंधक बनाए जाने के दौरान नरेंद्र को हथियार दिखाकर बुरी तरह डराया गया और घरवालों को फोन कर झूठा भरोसा दिलाने को मजबूर किया गया कि वे सुरक्षित हैं। जांच के दौरान क्षितिश के मोबाइल फोन से पुलिस को 12 डरावने वीडियो मिले, जिनमें बिना कारतूस की पिस्टल नरेंद्र के हाथ में थमाकर ऐसा दृश्य रचा गया मानो उन्होंने ही क्षितिश पर हमला बोला हो। इसका मकसद नरेंद्र से माफी मंगवाना और रकम लौटवाना था, ताकि झूठे सबूत खड़े किए जा सकें।

सब-इंस्पेक्टर बहन और पत्रकार भी साजिश में शामिल

इस पूरी साजिश में क्षितिश अकेला नहीं था। उसने अपनी सगी बहन को भी इसमें घसीटा, जो भुवनेश्वर के खंडगिरी थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। इसके अलावा स्थानीय पत्रकार संजय जेना भी इस षड्यंत्र का हिस्सा बना। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर सामने आया कि जेना ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर नरेंद्र को खंडगिरी थाने के अंदर तक पहुंचाया और वहां उनके खिलाफ मारपीट की झूठी शिकायत भी दर्ज करवा दी। दूसरी ओर, सब-इंस्पेक्टर स्नेहमंजरी साहू पर आरोप है कि उन्होंने अपने ओहदे का दुरुपयोग करते हुए नरेंद्र को फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दी।

50 लाख से 10 करोड़ तक वसूली की थी योजना

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने नरेंद्र से 50 लाख रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक ऐंठने का पूरा खाका खींचा था। फिलहाल पुलिस ने बीएनएस (BNS) और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और जांच में तेजी ला दी है। डिजिटल फॉरेंसिक टीम ने आरोपियों के बीच लगातार हो रही बातचीत के सबूत भी जुटा लिए हैं, जिससे साजिश की परतें और साफ होती जा रही हैं।

सवाल-जवाब

हनुमान सिक्का रैकेट क्या है?
यह एक ठगी गिरोह है जो तांबे या पीतल के पुराने सिक्कों पर हनुमान जी की छवि दिखाकर दावा करता है कि उनमें अलौकिक शक्ति है और विदेशी बाजार में उनकी कीमत करोड़ों में है।
कारोबारी नरेंद्र साहू का अपहरण कब और कहां हुआ?
14 अगस्त को बलांगीर के रंदा चौक से उनका अपहरण कर उन्हें भुवनेश्वर ले जाया गया, जहां एक होटल में बंधक बनाकर रखा गया।
मुख्य आरोपी कौन है और उसका दावा क्या था?
मुख्य आरोपी 50 वर्षीय क्षितिश चंद्र साहू है, जिसका दावा था कि उसने 2020 में एक दुर्लभ सिक्के के बदले नरेंद्र को 2.7 करोड़ रुपये दिए थे, हालांकि पुलिस को इसका कोई सबूत नहीं मिला।
पुलिस को क्षितिश के मोबाइल से क्या मिला?
पुलिस को 12 वीडियो मिले जिनमें नरेंद्र को बिना कारतूस की पिस्टल थमाकर ऐसा दृश्य रचाया गया मानो उन्होंने क्षितिश पर हमला किया हो।
सब-इंस्पेक्टर और पत्रकार की भूमिका क्या थी?
क्षितिश की बहन, जो सब-इंस्पेक्टर हैं, और पत्रकार संजय जेना ने साजिश में साथ दिया। जेना ने पुलिसकर्मी बनकर नरेंद्र को थाने पहुंचाया और उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करवाई, जबकि सब-इंस्पेक्टर स्नेहमंजरी साहू पर फर्जी केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप है।
आरोपियों पर किन धाराओं में केस दर्ज हुआ?
पुलिस ने बीएनएस (BNS) और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
आरोपी कितनी रकम ऐंठना चाहते थे?
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने नरेंद्र से 50 लाख रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक वसूलने की योजना बनाई थी।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·44 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे अंधविश्वास, अपराध और मीडिया-पुलिस की मिलीभगत मिलकर एक खतरनाक सिंडिकेट बना रहे हैं। जिस तरह से एक पत्रकार और महिला सब-इंस्पेक्टर ने इस अपहरण और जबरन वसूली के खेल में अपनी वर्दी और पद का दुरुपयोग किया, वह कानून व्यवस्था और मीडिया की विश्वसनीयता दोनों के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में ऐसी आपराधिक प्रवृत्तियों पर लगाम कसने के लिए केवल गिरफ्तारी काफी नहीं होगी, बल्कि इस पूरे नेक्सस की गहरी आंतरिक जांच जरूरी है ताकि पॉप कल्चर की आड़ में फल-फूल रहे ऐसे अंधविश्वासी घोटालों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

Ravikash Gupta@ravikash·44 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे अंधविश्वास और काले धन का यह अवैध बाज़ार समाज के हर स्तंभ—पुलिस और मीडिया—तक को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। जब कानून के रखवाले ही इस तरह के फर्जी सौदों और अपहरण में शामिल होंगे, तो डिजिटल एसेट्स और वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता पर भी इसका असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में पुलिस विभाग को ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई करनी होगी ताकि संस्थागत साख बची रहे।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·44 दिन पहले

यह घटना स्पष्ट करती है कि किस प्रकार दुर्लभ कलाकृतियों और प्राचीन वस्तुओं के नाम पर फैला अंधविश्वास समाज में गंभीर अपराधों को जन्म दे रहा है। गणितीय ज्योतिष और खगोलीय गणनाओं के नाम पर अमूल्य धरोहरों से जुड़े ऐसे अंधविश्वास न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक डेटा संरक्षण में बाधा डालते हैं, बल्कि वित्तीय और कानूनी प्रणालियों को भी गंभीर रूप से आहत करते हैं। इस प्रकार के गैरकानूनी रैकेटों पर अंकुश लगाने के लिए पारंपरिक ग्रंथों और भौतिक साक्ष्यों का पारदर्शी डिजिटल कैटलॉगिंग अत्यंत आवश्यक है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·44 दिन पहले

यह घटना खाकी और कलम दोनों के गंभीर पतन को दर्शाती है। जब कानून के रक्षक और समाज के चौथे स्तंभ के लोग ही संगठित अपराध में शामिल हो जाएं, तो यह व्यवस्था के लिए एक बड़ी चेतावनी है। आगे की जाँच में यह देखना अहम होगा कि क्या इस गिरोह का दायरा पश्चिमी ओडिशा से बाहर अन्य राज्यों तक भी फैला है या नहीं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·44 दिन पहले

यह मामला सिर्फ एक अपहरण नहीं, बल्कि संगठित अपराध में राज्य तंत्र के दुरुपयोग की गहरी बीमारी को उजागर करता है। जब एक पुलिस अधिकारी और मीडियाकर्मी खुद इस तरह के जबरन वसूली रैकेट का हिस्सा बन जाएं, तो आम नागरिकों का संस्थाओं पर से भरोसा उठना स्वाभाविक है। आगे की जांच में यह खंगालना जरूरी होगा कि इस गिरोह ने प्रशासनिक पदों का इस्तेमाल करके पहले कितने लोगों को फंसाया है और इनके राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण के तार कहां तक जुड़े हैं।

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