बल्लभगढ़ बस स्टैंड पर बढ़ी बसों की संख्या, आगरा और अलीगढ़ जाने वालों के लिए राहतज्वालामुखी में श्मशानघाट पर बवाल: नितिका की जलती चिता के बीच पत्थरबाजी, मायकेवालों की मांगहिमाचल प्रदेश के बिझड़ी में चोरों का दुस्साहस, घर में पार्टी कर उड़ाए 50 लाख के गहने और नकदीसरगुजा के कर्महा गांव में जल जीवन मिशन की टंकी शोपीस, गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीणराजस्थान पंचायत चुनाव का तीसरा चरण: 27 जिलों में सरपंच पदों के नतीजों के बाद कई जगह हंगामा और झड़पजोडी बररेज ने कहा कि ऑनलाइन गालियों से उन्हें डर नहीं लगता क्योंकि यह आम बात हो गई हैमूलांक 8 राशिफल 6 नवंबर 2026: काम का भारी दबाव और जिम्मेदारियों के बीच सहयोग की जरूरतबोकारो में दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन सख्त, अवैध कोयला खदानों पर बुलडोजर कार्रवाईजोधपुर में दीवाली की रौनक, हैंडीक्राफ्ट सामानों की बहारधनतेरस पर अपनों को भेजें ये शानदार संदेश, जीवन में बनी रहेगी सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत
बल्लभगढ़ के बाजार में 20 फीसदी तक महंगे हुए कंबल, दिवाली पर बिक्री में भारी गिरावटहरियाणा
4 नव॰ 2026, 7:39 pm (2 दिन पहले)· 2

बल्लभगढ़ के बाजार में 20 फीसदी तक महंगे हुए कंबल, दिवाली पर बिक्री में भारी गिरावट

बल्लभगढ़ बाजार में कंबलों के दाम में 20 प्रतिशत तक का उछाल आने के कारण त्योहार के मौसम में खरीदारी बेहद सुस्त पड़ गई है. ग्राहक और कॉर्पोरेट खरीदार बजट बिगड़ने की वजह से कंबलों के बजाय क्रॉकरी जैसे अन्य विकल्पों का रुख कर रहे हैं.

त्योहारी सीजन शुरू होते ही आम तौर पर बाजारों में रौनक बढ़ जाती है, लेकिन फरीदाबाद के बल्लभगढ़ बाजार में इस बार माहौल काफी बदला हुआ नजर आ रहा है. हर साल दिवाली के मौके पर लोग निजी इस्तेमाल के लिए कंबलों की जमकर खरीदारी करते थे और बड़ी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को उपहार देने के लिए थोक में कंबल खरीदती थीं. इस वर्ष बाजार में कंबलों की मांग में अप्रत्याशित कमी देखी जा रही है. दाम में भारी वृद्धि होने के कारण खरीदार दुकानों से खाली हाथ लौट रहे हैं या फिर अन्य सामान की तरफ रुख करने को मजबूर हैं.

कीमतों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी से बिगड़ा समीकरण

बाजार में कंबलों की सुस्त पड़ती मांग की मुख्य वजह इनके भाव में आया उछाल है. व्यापारियों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले इस बार कंबलों की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस मूल्य वृद्धि ने खरीदारों की जेब पर सीधा असर डाला है. बाजार में आने वाले ग्राहक जब बढ़े हुए रेट सुनते हैं, तो वे अपनी योजना बदलकर अन्य उपहारों या सामान की खरीदारी करने लगते हैं. नतीजतन दुकानों पर स्टॉक जमा पड़ा है और त्योहारी मौसम में होने वाली सामान्य बिक्री पर भी गहरा असर पड़ा है.

ये भी पढ़ें

व्यापारियों को 50 प्रतिशत तक बिक्री गिरने की आशंका

बल्लभगढ़ बाजार में करीब 20 वर्षों से दुकान संचालित कर रहे व्यापारी विजय विरमानी ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया है. उनकी दुकान पर सिंगल बेड और डबल बेड के कंबलों से लेकर इंपोर्टेड कंबलों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है, जिनकी कीमतें 500 रुपये से लेकर 4 से 5 हजार रुपये तक जाती हैं. व्यापारी के मुताबिक पहले कॉरपोरेट जगत की बड़ी कंपनियां कर्मचारियों के दिवाली उपहार के तौर पर भारी संख्या में कंबल खरीदती थीं. इस बार कंबलों के बढ़े दामों की वजह से कंपनियों ने अपना रुख बदल लिया है और वे अपने निर्धारित बजट में क्रॉकरी व अन्य सामान खरीद रही हैं.

मूल्य वृद्धि के गणित को समझाते हुए व्यापारी ने बताया कि जो कंबल पिछले वर्ष 1000 रुपये में बिक रहा था, उसका दाम अब बढ़कर 1200 रुपये हो गया है. ग्राहक पुराने दामों का अनुमान लगाकर बाजार पहुंचते हैं, लेकिन नए रेट सुनते ही वे कंबल खरीदने से पीछे हट जाते हैं. हालात को देखते हुए इस त्योहारी सीजन में पिछले साल की तुलना में बिक्री में लगभग 50 प्रतिशत तक की गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है.

आम खरीदार बोले, बजट से बाहर हुआ मनपसंद सामान

बाजार में खरीदारी के लिए आए आम लोगों की परेशानी भी कम नहीं है. सीकरी से बल्लभगढ़ बाजार में कंबल की खरीदारी करने पहुंचे ग्राहक पंकज सिंह ने बताया कि कंबलों की दरों में काफी उछाल आया है. जो कंबल बीते साल 500 से 600 रुपये के दायरे में आसानी से मिल जाता था, उसी के लिए अब 700 से 800 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं. लगभग 20 प्रतिशत दाम बढ़ जाने से घरेलू बजट पर सीधा दबाव पड़ रहा है, जिसकी वजह से वे अब कंबल के स्थान पर कोई दूसरा उपयोगी सामान खरीदने पर विचार कर रहे हैं.

गुणवत्ता और कीमतों के बीच संतुलन बनाना हुआ कठिन

बाजार में पहुंचे एक अन्य ग्राहक गौरव ने बताया कि इस बार कंबलों की कीमतें उम्मीद से काफी अधिक हैं. उपभोक्ता हमेशा अपने तय बजट को ध्यान में रखकर ही बाजार का रुख करते हैं. जब पसंद आने वाला कंबल तय बजट की सीमा पार कर जाता है, तब अन्य विकल्पों की तलाश करनी पड़ती है. पहले जिस बजट में बेहतरीन गुणवत्ता का कंबल उपलब्ध हो जाता था, वर्तमान में उसी राशि में केवल सामान्य या हल्की गुणवत्ता का सामान ही मिल पा रहा है. इसी कारण ग्राहक अब कोई भी फैसला लेने से पहले कई दुकानों पर जाकर रेट और माल की गुणवत्ता की गहन पड़ताल कर रहे हैं.

सवाल-जवाब

बल्लभगढ़ बाजार में इस बार कंबलों की कीमतें कितनी बढ़ी हैं?
व्यापारियों और ग्राहकों के अनुसार इस बार कंबलों के दाम पिछले साल के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं.
जो कंबल पिछले साल 1000 रुपये का था, उसका नया दाम क्या है?
दुकानदार के अनुसार जो कंबल पिछले साल 1000 रुपये में मिलता था, इस बार उसकी कीमत बढ़कर 1200 रुपये हो गई है.
सस्ते कंबलों के रेट में कितना अंतर आया है?
ग्राहकों के मुताबिक पिछले साल 500 से 600 रुपये में मिलने वाला कंबल अब 700 से 800 रुपये में मिल रहा है.
बल्लभगढ़ बाजार में कंबलों की किस रेंज का माल उपलब्ध है?
बाजार में 500 रुपये से लेकर 4 से 5 हजार रुपये तक के सिंगल, डबल बेड और इंपोर्टेड कंबल उपलब्ध हैं.
कंबल महंगे होने के बाद कॉर्पोरेट कंपनियां क्या खरीद रही हैं?
कर्मचारियों को दिवाली पर उपहार देने वाली बड़ी कंपनियां कंबलों के बजाय अपने बजट के अनुसार क्रॉकरी और अन्य सामान खरीद रही हैं.
दुकानदारों को इस साल बिक्री में कितनी गिरावट आने की आशंका है?
दुकानदारों का अनुमान है कि इस बार पिछले साल के मुकाबले कंबलों की बिक्री में करीब 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·1 दिन पहले

कंबल ही महंगे हो गए तो दिवाली पर गिफ्ट क्या दें? बजट ही हिल गया इस बार।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

महंगाई ने इस बार दीवाली के उपहारों का गणित बिगाड़ दिया है, कॉर्पोरेट सेक्टर ने भी कंबल छोड़कर क्रॉकरी चुन ली है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने! पिछले साल मैंने भी अपने स्टाफ को कंबल ही दिए थे, पर इस बार बजट बढ़ जाने से मैं भी क्रॉकरी सेट पर ही शिफ्ट हो रहा हूँ।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

1000 रुपये वाला कंबल सीधे 1200 का हो गया, जेब तो ढीली होनी ही थी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने। कल ही मैं बल्लभगढ़ बाजार गया था, और सच में दुकानदार 1000 वाले कंबल के 1200 मांग रहे थे, जिसे देखकर मैंने भी खरीदारी टाल दी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp