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बढ़ती महंगाई और भाषा विवाद पर शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत का करारा हमला, इथेनॉल नीति पर उठाए सवालभारत
25 अग॰ 2026, 12:49 pm (37 दिन पहले)· 3

बढ़ती महंगाई और भाषा विवाद पर शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत का करारा हमला, इथेनॉल नीति पर उठाए सवाल

शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने आम आदमी की रोजमर्रा की चाय के बढ़ते दामों को लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसा है। साथ ही उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में स्थानीय भाषाओं के अनिवार्य इस्तेमाल और न्यायपालिका में हिंदी के प्रयोग की वकालत की।

देश में बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल को आड़े हाथों लिया है। संवाददाताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने आम जनता के दैनिक बजट पर पड़ रहे असर को रेखांकित करते हुए चाय के दामों में हुई वृद्धि पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आम आदमी के लिए एक कप चाय पीना भी अब जेब पर भारी पड़ रहा है, जबकि चीनी के उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है।

चाय की कीमतों और इथेनॉल नीति पर तीखा प्रहार

राउत ने महंगाई का जिक्र करते हुए कहा कि एक साधारण चाय की कीमत अब बढ़कर 15 रुपये तक पहुंच गई है। इसकी तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि बड़े और महंगे होटलों में यही चाय 200 से 300 रुपये में बेची जा रही है। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए शिवसेना नेता ने कहा, "हमारी जिंदगी 50 पैसे की चाय से शुरू हुई है।" उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब सत्ता पक्ष के लोग शायद यह आदेश भी जारी कर देंगे कि चाय पीना राष्ट्रद्रोह या अपराध है और लोगों को देशभक्ति के नाम पर चाय छोड़ने की सलाह दी जाएगी। उनका कहना था कि गरीब आदमी कड़ी मेहनत करके एक कप चाय नसीब कर पाता है, जबकि सत्ता में बैठे लोग सरकारी खर्च पर चाय पीते हैं और गन्ना इथेनॉल उत्पादन में भेजा जा रहा है।

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अभिनेत्री के बयानों और मुद्दों से भटकाने पर प्रतिक्रिया

हाल ही में अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा कृति सेनन और तापसी पन्नू पर की गई टिप्पणियों से जुड़े सवाल पर राउत ने स्पष्ट किया कि ऐसे बयानों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग मुख्य आर्थिक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान देते हैं। जनता को यह सवाल पूछना चाहिए कि आखिर चीनी और चाय के दाम लगातार क्यों बढ़ रहे हैं, न कि गैर-जरूरी बहसों में उलझना चाहिए।

कॉर्पोरेट क्षेत्र में स्थानीय भाषा और हिंदी के इस्तेमाल पर जोर

भाषा से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते हुए संजय राउत ने कहा कि संविधान में दिए गए अधिकारों का हर राज्य में सही तरीके से पालन होना चाहिए। उनका मानना है कि चाहे महाराष्ट्र हो या बंगाल, निजी और कॉर्पोरेट कंपनियों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को स्थानीय भाषा बोलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च पदों पर बैठे लोगों को भी स्थानीय भाषा सीखनी चाहिए और इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने हिंदी भाषा की अहमियत पर बात करते हुए कहा कि देश को जोड़ने के लिए एक साझा भाषा हिंदी होनी चाहिए। यदि अंग्रेजी को औपनिवेशिक मानसिकता या गुलामी का प्रतीक माना जाता है, तो फिर नौकरशाहों और उच्चतम न्यायालय को भी अपने कामकाज, संवाद और फैसलों में हिंदी भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के हालिया बयान का समर्थन करते हुए कहा कि हर राज्य के नागरिक को अपनी क्षेत्रीय भाषा पर गर्व और आत्म-सम्मान महसूस करना चाहिए।

सवाल-जवाब

संजय राउत ने चाय की कीमतों को लेकर क्या आंकड़े दिए?
उन्होंने कहा कि आम जगह चाय की कीमत 15 रुपये हो गई है, जबकि बड़े होटलों में यह 200 से 300 रुपये तक मिलती है।
चीनी और चाय महंगी होने की क्या वजह बताई गई?
राउत के अनुसार चीनी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला गन्ना इथेनॉल उत्पादन में भेजा जा रहा है।
कॉर्पोरेट क्षेत्र में भाषा के इस्तेमाल पर संजय राउत का क्या रुख है?
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और बंगाल जैसे राज्यों में कॉर्पोरेट क्षेत्र के अधिकारियों और कर्मचारियों को स्थानीय भाषा बोलनी चाहिए।
संजय राउत ने न्यायपालिका और नौकरशाही में किस भाषा के प्रयोग की बात कही?
उन्होंने कहा कि यदि अंग्रेजी को गुलामी का प्रतीक माना जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट और नौकरशाहों को हिंदी में बोलना और लिखना चाहिए।
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