मानसून की समय से पहले विदाई हो जाने के बावजूद उत्तर प्रदेश और बिहार के बड़े हिस्से में बाढ़ का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तर प्रदेश में मानसून अपने सामान्य समय से 2 दिन पहले यानी 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, जबकि बिहार से भी इसकी वापसी करीब एक हफ्ते पहले शुरू हो चुकी थी। इसके बावजूद मैदानी इलाकों में पानी का सैलाब लगातार नई बस्तियों को अपनी चपेट में ले रहा है। दोनों राज्यों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, ग्रामीण इलाकों के साथ साथ शहरी इलाकों में भी पानी घुस चुका है और जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गया है।
बांधों से छोड़े गए पानी से यूपी की 10 नदियां लाल निशान के पार
उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बीते 2 से 3 दिनों के दौरान बिल्कुल बारिश नहीं हुई है, फिर भी जमीनी हालात तेजी से बिगड़े हैं। इसका मुख्य कारण विभिन्न बांधों और बैराजों से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाना है। इस जलप्रवाह की वजह से राज्य की 10 प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वर्तमान में राजधानी लखनऊ, गोंडा, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और कानपुर सहित कुल 11 जिले भीषण जलभराव और बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। नदियों के लगातार चढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों के सामने भारी संकट खड़ा कर दिया है।
लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ा, रिवर फ्रंट और फूड वैली बंद
राजधानी लखनऊ के भीतर गोमती नदी का पानी किनारों को लांघकर रिहायशी और सार्वजनिक स्थलों में फैल गया है। गोमती का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ने के चलते मशहूर रिवर फ्रंट पूरी तरह डूब गया है, जिसके बाद प्रशासन ने अगले आदेश तक इसे आम जनता के लिए बंद कर दिया है। रिवर फ्रंट परिसर के पास स्थित फूड वैली पर भी ताला लगा दिया गया है और प्रवेश द्वार पर बंदी का आधिकारिक नोटिस चस्पा कर दिया गया है।
फैजुल्लागंज में 40 हजार घरों में घुसा पानी, चल रहीं 30 नावें
लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा विकट हो चुकी है। इस घनी आबादी वाले इलाके में गलियों और मुख्य मार्गों पर कई फीट पानी जमा है, जिसकी वजह से आवाजाही के लिए लोगों को नावों पर निर्भर होना पड़ रहा है। आपात स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने करीब 30 नावें तैनात की हैं, जिनके जरिए फंसे हुए नागरिकों को निकाला जा रहा है। इसके साथ ही विस्थापित परिवारों तक तैयार भोजन, पीने का पानी और जरूरी दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं। फैजुल्लागंज में लगभग 40 हजार से अधिक घरों के भीतर पानी भर चुका है, जिससे करीब 3 लाख लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। भूतल जलमग्न होने की वजह से कई परिवारों को छतों या ऊपरी मंजिल पर शरण लेनी पड़ी है, जबकि 10 हजार से अधिक लोग अपने आशियाने छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर चले गए हैं।
फ्लाईओवर निर्माण कार्य ठप और मानसून का गणित
पीलीभीत से निकलकर शाहजहांपुर और सीतापुर के रास्ते लखनऊ पहुंचने वाली गोमती नदी में इस बार भारी बारिश और जल संचयन क्षेत्रों से पानी छोड़े जाने के कारण जलप्रवाह बहुत तेज है। ला मार्टिनियर कॉलेज के पास लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) का निर्माणाधीन फ्लाईओवर प्रोजेक्ट भी बाढ़ के पानी में डूब गया है। कार्यस्थल जलमग्न होने से निर्माण कंपनी को काम बीच में ही रोकना पड़ा है और उसने निर्माण अवधि बढ़ाने की मांग की है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल उत्तर प्रदेश में मानसून 12 दिन की देरी से 30 जून को पहुंचा था और 3 अक्टूबर तक कुल 95 दिनों तक सक्रिय रहा। इस समयावधि में राज्य के भीतर सामान्य से 8 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। अब मानसूनी बादलों की विदाई के बाद भी नदियों के उफान ने मैदानी इलाकों को राहत की सांस नहीं लेने दी है।
शारदा नदी का भीषण कटान और कानपुर में गंगा की चेतावनी
लखीमपुर खीरी जिले में शारदा नदी अत्यंत उग्र रूप में बह रही है। नदी का तेज बहाव किनारों पर भीषण कटान कर रहा है, जिससे बड़े-बड़े पेड़ और पक्के मकान कट-कटकर सीधे नदी के प्रवाह में समा रहे हैं। शारदा के उफान से दर्जनों तटीय गांवों में खौफ का वातावरण बन गया है और लोग अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं। वहीं कानपुर शहर में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी के स्तर तक पहुंच चुका है। शहर के सभी प्रमुख घाटों की सीढ़ियां और किनारे पानी में समा चुके हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी घुसने की आशंका काफी बढ़ गई है।
बिहार के 6 जिलों में गंडक का कहर और 255 गांव डूबे
उत्तर प्रदेश की तरह ही पड़ोसी राज्य बिहार में भी हालात बेकाबू बने हुए हैं। राज्य के 6 जिलों में बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। गंडक नदी के जलस्तर में अचानक आई तेजी और तटबंध टूटने के कारण करीब 255 गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। मुजफ्फरपुर, सारण, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और दरभंगा जिलों में करीब 4 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इन 6 जिलों से अब तक करीब 44 हजार नागरिक अपने घरों को छोड़कर ऊंचे स्थानों या राहत शिविरों में शरण लेने को विवश हुए हैं। गंडक नदी के तेज प्रवाह और भू-कटान के चलते सैकड़ों मकान पूरी तरह नष्ट होकर पानी में बह गए हैं।
सारण में डूबने से 12 लोगों की मौत, 20 से अधिक लापता
सारण जिले के मकेर, परसा, पानापुर और अमनौर क्षेत्रों में बाढ़ का पानी तेजी से गांवों में घुसने से भीषण मानवीय त्रासदी सामने आई है। इन क्षेत्रों में पानी में डूबने की घटनाओं में अब तक 12 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश और राहत कार्य के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) तथा स्थानीय प्रशासन की टीमें संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रही हैं। उधर गोपालगंज के शीतलपुर इलाके में सुरक्षा तटबंध टूटने से ग्रामीण आबादी में पानी भर गया है, जिससे हजारों ग्रामीणों के सामने रहने और खाने-पीने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।


















