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बासनी झूठा की 18 साल की शर्मिला अकेली बाइक पर निकलीं 3000 किलोमीटर की तीर्थयात्रा पर, पूरे लूणी में गूंज रहा 'म्हारी छोरियां छोरा से कम है के'राजस्थान
18 जून 2026, 5:18 am (87 दिन पहले)· 3

बासनी झूठा की 18 साल की शर्मिला अकेली बाइक पर निकलीं 3000 किलोमीटर की तीर्थयात्रा पर, पूरे लूणी में गूंज रहा 'म्हारी छोरियां छोरा से कम है के'

जोधपुर के लूणी की रहने वाली 18 वर्षीय शर्मिला चौधरी ने अकेले अपनी बाइक से करीब 3000 किलोमीटर लंबी धार्मिक यात्रा शुरू की है, जिसका लक्ष्य उत्तराखंड के दुर्गम धार्मिक स्थल हैं।

फिल्म दंगल का वह मशहूर संवाद 'म्हारी छोरियां छोरा से कम है के' इन दिनों जोधपुर के लूणी इलाके में सिर्फ एक डायलॉग नहीं, बल्कि जीती-जागती हकीकत बन गया है। इसकी वजह हैं बासनी झूठा गांव की रहने वाली 18 वर्षीय शर्मिला चौधरी, जिन्होंने अपने हौसले और जिद से इस बात को सच कर दिखाया है। शर्मिला अकेली अपनी बाइक पर सवार होकर करीब 3000 किलोमीटर लंबी धार्मिक यात्रा पर निकल पड़ी हैं। इतनी कम उम्र में, वो भी बिना किसी साथी के इतना लंबा और कठिन रास्ता तय करने का फैसला आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

उत्तराखंड के दुर्गम धामों तक का संकल्प

शर्मिला ने अपने इस सफर में देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख और मुश्किल धार्मिक स्थलों के दर्शन का संकल्प लिया है। पहाड़ों के टेढ़े-मेढ़े रास्ते और खतरनाक घुमावदार मोड़ किसी भी राइडर के लिए बड़ी परीक्षा होते हैं, लेकिन शर्मिला के इरादों के सामने यह दूरी मानो बौनी पड़ गई है। उनके इस जुनून को देखकर सिर्फ गांव वाले ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों के युवा भी हैरान हैं। नौजवान पीढ़ी के लिए यह यात्रा एक बड़ी सीख और प्रेरणा बनकर उभरी है।

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आस्था के साथ नारी शक्ति का संदेश

शर्मिला का यह सफर सिर्फ भगवान के दर्शन और धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। इसके जरिए वह समाज को महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और देश की युवा ताकत का बेहद मजबूत संदेश दे रही हैं। आज जब बेटियां शिक्षा, खेल, अंतरिक्ष और सेना तक हर मैदान में अपना दमखम दिखा रही हैं, तब शर्मिला ने एक बार फिर साबित किया है कि मन में अगर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो कोई रास्ता मुश्किल नहीं रह जाता। अकेले निकलने का उनका यह कदम समाज की पुरानी और रूढ़िवादी सोच को बदलने में मददगार साबित होगा।

गांव की बेटियों की रोल मॉडल

ग्रामीण माहौल से निकलकर इतने बड़े सफर का फैसला लेना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। शर्मिला का यह बेखौफ अंदाज उन तमाम युवतियों और बेटियों के लिए हिम्मत बन रहा है, जो अक्सर समाज के दबाव या झिझक की वजह से अपने सपनों से पीछे हट जाती हैं। लोगों का मानना है कि ऐसे साहसिक कदम समाज में बेटियों को लेकर सकारात्मक और सुरक्षात्मक सोच को बढ़ावा देंगे और उन्हें आगे बढ़ने के बराबर मौके मिलेंगे।

तिलक और मिठाई के साथ गांव ने दी विदाई

इस यात्रा पर रवाना होने से ठीक पहले बासनी झूठा गांव में शर्मिला चौधरी का जोरदार और उत्साहभरा स्वागत हुआ। इस मौके पर ग्रामीणों, समाज के प्रबुद्ध लोगों और परिजनों ने शर्मिला को तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। सभी ने उनकी सुरक्षित और सफल यात्रा की मंगल कामना की। गांव वालों ने गर्व के साथ कहा कि शर्मिला ने पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है और देश के सामने बेटियों की असीम ताकत की एक शानदार मिसाल पेश की है।

सवाल-जवाब

शर्मिला चौधरी कौन हैं?
वह जोधपुर जिले के लूणी उपखंड के बासनी झूठा गांव की रहने वाली 18 वर्षीय युवती हैं, जिन्होंने अकेले बाइक से लंबी धार्मिक यात्रा शुरू की है।
उनकी यात्रा कितनी लंबी है और कहां तक है?
यह यात्रा करीब 3000 किलोमीटर लंबी है और इसका लक्ष्य उत्तराखंड के प्रमुख तथा दुर्गम धार्मिक स्थलों के दर्शन करना है।
उनकी यात्रा खास क्यों मानी जा रही है?
महज 18 साल की उम्र में अकेले बाइक से इतना लंबा और कठिन सफर तय करने का फैसला महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का मजबूत संदेश दे रहा है।
गांव ने उन्हें कैसे विदा किया?
बासनी झूठा गांव में ग्रामीणों और परिजनों ने तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर शर्मिला को शुभकामनाएं दीं और उनकी सुरक्षित यात्रा की कामना की।
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