ग्रैंड थेफ्ट ऑटो VI की रिलीज से पहले क्यों भड़क उठा है दक्षिणपंथी धड़ा? जानें सोशल मीडिया पर जारी इस विवाद की असल वजहपश्चिम बंगाल में असली तृणमूल कांग्रेस पर संग्राम, ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के सामने 'जोड़ाफूल' चुनाव चिह्न पर जताया दावागणेश चतुर्थी पर पन्ना के गणपति की स्थापना ला सकती है समृद्धि, जानिए 14 सितंबर का पूजन मुहूर्त24 सितंबर से पुष्य नक्षत्र में मंगल का गोचर: 17 अक्टूबर तक इन 4 राशियों का चमकेगा भाग्य, शनि और मंगल की युति से होंगे बड़े लाभउत्तराखंड के जम्बू मसाले को सुखाने और स्टोर करने की सही विधि, जानिए इसके व्यापारिक फायदेराजस्थान के चूरू में दर्दनाक हादसा: सालासर बालाजी दर्शन को निकले 3 पदयात्रियों की सड़क दुर्घटना में मौतराजस्थान के रींगस में 14 सितंबर से शुरू हो रहा वार्षिक लक्खी मेला, सुरक्षा और सुविधाओं की व्यापक तैयारियां पूरीमेघालय के तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन, उमडेन पीएचसी 94.97% अंकों के साथ शीर्ष परशनि का रेवती नक्षत्र में गोचर: 27 दिनों तक 5 राशियों को मिलेगा बंपर लाभ, चमकेगा भाग्यमहाभारत काल से जुड़ा है फरीदाबाद का तिलपत गांव, पांडवों की पांच गांवों की मांग और सूरदास मंदिर का गहरा इतिहास
गणेश चतुर्थी पर पन्ना के गणपति की स्थापना ला सकती है समृद्धि, जानिए 14 सितंबर का पूजन मुहूर्तराजस्थान
12 सित॰ 2026, 5:38 pm (47 मिनट पहले)· 2

गणेश चतुर्थी पर पन्ना के गणपति की स्थापना ला सकती है समृद्धि, जानिए 14 सितंबर का पूजन मुहूर्त

गणेश चतुर्थी पर बुध ग्रह और बुद्धि के स्वामी भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए पन्ना की मूर्ति स्थापित करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। जानिए इस वर्ष पूजा का सही समय और विधि नियम।

देशभर में विघ्नहर्ता भगवान गणेश के जन्मोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस साल गणेश चतुर्थी का महापर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के इस विशेष अवसर पर हिंदू धर्मावलंबी अत्यंत हर्षोल्लास के साथ अपने-अपने घरों में बप्पा को विराजमान करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी कष्ट और विघ्न दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही जातक को बुद्धि, विवेक, रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु अपनी-अपनी श्रद्धा, आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार मिट्टी, पीतल, चांदी, तांबा या सोने जैसी विभिन्न धातुओं से बनी गणपति की सुंदर प्रतिमाएं घर लाते हैं।

गणेश चतुर्थी तिथि और स्थापना का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष गणेश चतुर्थी का त्योहार सोमवार के दिन पड़ रहा है, जो इसे और भी विशेष बनाता है। हिंदू पंचांग के विश्लेषण के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे से प्रारंभ हो जाएगी। यह तिथि अगले दिन यानी 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक बनी रहेगी। उदयातिथि के सिद्धांत और धार्मिक नियमों के अनुसार, गणपति स्थापना और पूजन का सबसे उत्तम मध्याह्न काल का शुभ मुहूर्त 14 सितंबर को सुबह 11:08 बजे से लेकर दोपहर 1:36 बजे तक रहेगा। हालांकि, स्थानीय पंचांगों और भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग शहरों में इस समय में आंशिक अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंडित से भी परामर्श लिया जा सकता है।

ये भी पढ़ें

पन्ना के गणपति का ज्योतिषीय महत्व और बुध ग्रह का कनेक्शन

करौली के सुप्रसिद्ध भागवत आचार्य पंडित रमेश चंद्र शास्त्री के अनुसार, भगवान गणेश की उपासना में सबसे महत्वपूर्ण तत्व भक्त की सच्ची श्रद्धा और समर्पण की भावना होती है। शास्त्रों के अनुसार, पूर्ण विधि-विधान से स्थापित किसी भी सात्त्विक प्रतिमा की पूजा शुभ और फलदायी होती है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाए, तो पन्ना रत्न का सीधा संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार, तर्कशक्ति और विवेक का कारक ग्रह माना गया है।

आचार्य रमेश चंद्र शास्त्री का कहना है कि भगवान गणेश स्वयं भी बुद्धि, ज्ञान और विवेक के अधिष्ठाता देवता हैं। यही कारण है कि घर के मंदिर या पूजा स्थल पर पन्ना रत्न से निर्मित श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करना अत्यंत कल्याणकारी और लाभकारी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि पन्ना के गणपति की नियमित और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर के सदस्यों की एकाग्रता बढ़ती है, बौद्धिक क्षमता में सुधार होता है और घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तेजी से बढ़ता है।

बजट और सामर्थ्य के अनुसार करें प्रतिमा का चयन

पन्ना अत्यंत मूल्यवान और दुर्लभ रत्न है, जिसके कारण इसकी प्रतिमा काफी महंगी होती है। ऐसे में पंडित रमेश चंद्र शास्त्री स्पष्ट करते हैं कि हर किसी के लिए पन्ना की प्रतिमा खरीदना बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है। भगवान केवल भाव और भक्ति के भूखे होते हैं, न कि बहुमूल्य वस्तुओं के। श्रद्धालु अपनी आर्थिक सामर्थ्य और सुविधा के अनुसार मिट्टी, पंचधातु, पीतल, तांबा, चांदी या किसी भी अन्य पवित्र धातु से बनी गणेश प्रतिमा लाकर पूजा कर सकते हैं। मिट्टी के गणपति को पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता है और इनकी स्थापना का भी उतना ही पुण्य फल प्राप्त होता है।

गणपति पूजन की सरल विधि और आवश्यक सामग्रियां

गणेश चतुर्थी के दिन स्थापना के बाद गणपति बाप्पा को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजन सामग्री अर्पित की जानी चाहिए। पंडित रमेश चंद्र शास्त्री के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा, सुगंधित पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, धूप-दीप और नैवेद्य के रूप में मोदक या लड्डू का भोग लगाना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। इसमें भी दूर्वा घास गणेश जी को अत्यंत प्रिय है, इसलिए पूजा के दौरान उन्हें दूर्वा जरूर अर्पित करनी चाहिए। उन्होंने बल देकर कहा कि बप्पा को प्रसन्न करने के लिए महंगे तामझाम या भव्य सजावट की जरूरत नहीं होती, बल्कि स्वच्छ मन, नियमों का पालन और सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना ही पर्याप्त है।

गणेशोत्सव की अवधि और अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन

विभिन्न परिवारों और क्षेत्रों में गणेशोत्सव को अलग-अलग दिनों तक मनाने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी प्रतिज्ञा और पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार बप्पा को डेढ़ दिन, पांच दिन, सात दिन या पूरे दस दिनों के लिए अपने घर में स्थापित करते हैं। इस वर्ष गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होगा, जो 25 सितंबर को पड़ रही है। इसी पावन तिथि पर अधिकांश स्थानों पर गणपति की प्रतिमाओं का विसर्जन पूरे आदर-सत्कार और नम आंखों के साथ किया जाएगा। भक्तगण अपनी सुविधानुसार विघ्नहर्ता को घर में विराजित कर इस पावन पर्व का लाभ उठा सकते हैं।

सवाल-जवाब

इस वर्ष गणेश चतुर्थी की तिथि और पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त क्या है?
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को है। पूजन का सबसे उत्तम मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:08 बजे से दोपहर 1:36 बजे तक रहेगा।
पन्ना के गणपति की स्थापना करने से क्या लाभ मिलते हैं?
पन्ना रत्न का संबंध बुध ग्रह से है। इसकी पूजा करने से बुद्धि, एकाग्रता, वाणी में सुधार और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
क्या गणेश चतुर्थी पर पन्ना की महंगी मूर्ति खरीदना अनिवार्य है?
नहीं, यह अनिवार्य नहीं है। भक्त अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार मिट्टी, पीतल, चांदी या अन्य धातु की मूर्तियां भी स्थापित कर सकते हैं।
भगवान गणेश की पूजा में सबसे प्रिय और आवश्यक सामग्री क्या मानी जाती है?
भगवान गणेश को दूर्वा घास विशेष रूप से प्रिय है। इसके अलावा अक्षत, रोली, पुष्प, धूप-दीप और मोदक या लड्डू अर्पित करना शुभ होता है।
इस वर्ष गणेश विसर्जन या अनंत चतुर्दशी की तिथि क्या है?
इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है, इसी दिन भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR