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बस्तर पुलिस में AI ने 2 करोड़ के वेतन फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया, तीन सिपाही गिरफ्तारछत्तीसगढ़
1 जुल॰ 2026, 3:25 pm (41 दिन पहले)· 2

बस्तर पुलिस में AI ने 2 करोड़ के वेतन फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया, तीन सिपाही गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पुलिस के तीन सिपाहियों ने करीब 3 साल तक वेतन रिकॉर्ड में हेरफेर कर 1.5 करोड़ से 2 करोड़ रुपये का घोटाला किया, जिसे AI आधारित ऑडिट ने उजागर किया।

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पुलिस विभाग के अंदर करीब 2 करोड़ रुपये का वेतन घोटाला सामने आया है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसे किसी इंसान ने नहीं, बल्कि AI आधारित ऑडिट ने पकड़ा, जिसने वेतन भुगतान में असामान्य बढ़ोतरी के संकेत दिए। करीब तीन साल तक यह जालसाजी वेतन रिकॉर्ड की आड़ में छिपी रही और अंततः पकड़ में आई। जगदलपुर पुलिस ने इस मामले में विभाग के तीन सिपाहियों को गिरफ्तार किया है।

AI ऑडिट ने कैसे उजागर किया यह घोटाला?

बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने बताया कि SP कार्यालय में आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के ऑडिट किए गए थे। इसी प्रक्रिया के दौरान AI आधारित जांच ने वेतन खर्च में असामान्य बढ़ोतरी के संकेत पकड़े जो पहले किसी की नजर में नहीं आए थे। इस अलर्ट को गंभीरता से लेते हुए जांचकर्ताओं ने वेतन रिकॉर्ड की गहराई से पड़ताल की, जिससे बड़े पैमाने पर हेरफेर का खुलासा हुआ। AI टूल्स ने वेतन भुगतान में उन असामान्य बदलावों को पकड़ा जो लंबे समय से मानवीय नजर से छिपे हुए थे। इसके बाद जांचकर्ताओं ने वेतन रिकॉर्ड, सॉफ्ट कॉपी और बैंकिंग लेन-देन को बारीकी से खंगाला, जिससे करोड़ों रुपये के कथित गबन की पूरी तस्वीर सामने आई।

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कौन है इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड?

गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों में आरक्षक गिरीश राय, राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू शामिल हैं। पुलिस इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड गिरीश राय को मान रही है। वह वर्ष 2012 से SP कार्यालय की वेतन शाखा में सहायक के पद पर तैनात था और उसकी नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर हुई थी। राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू विभाग की अन्य शाखाओं में कार्यरत थे।

जांच में सामने आया कि गिरीश राय वेतन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही रिकॉर्ड की सॉफ्ट कॉपी में बदलाव कर देता था। इसी चालाकी से वह अपना और दो अन्य सिपाहियों का वेतन बढ़ाकर सरकारी खाते से अतिरिक्त रकम निकलवाता रहा। पूछताछ में गिरीश राय ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से मई 2026 के बीच करीब 3 साल की अवधि में आरोपियों ने सरकारी खातों से लगभग 1.5 करोड़ से 2 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की।

लोन के नाम पर भी हुई ठगी

जांच में एक और चौंकाने वाला तरीका सामने आया है। गिरीश राय ने कुछ कर्मचारियों को यह कहकर उनका वेतन बढ़ाया कि उन्हें लोन दिया जा रहा है। बाद में वह उसी बढ़ी हुई रकम को लोन की किस्त या वापसी के नाम पर नकद में वापस ले लेता था। पुलिस ने उन कर्मचारियों की पहचान कर ली है जिनका इस तरह वेतन बढ़ाया गया था और जिन्हें कथित तौर पर फायदा मिला था। अब उन सभी से पूछताछ की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे जानबूझकर इस साजिश में शामिल थे या उनका इस्तेमाल किया गया था।

सालों तक क्यों नहीं पकड़ में आया यह घोटाला?

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, विभाग में हर महीने वेतन पर होने वाला खर्च स्वाभाविक रूप से बदलता रहता है। कर्मचारियों के तबादले, नई पोस्टिंग और संख्या में बदलाव के चलते यह उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है। आरोपियों ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाया और हर महीने अपने तथा कुछ अन्य कर्मचारियों के वेतन में थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी करते रहे। कोई भी एकल बढ़ोतरी इतनी बड़ी नहीं थी कि फौरन संदेह पैदा होता, और इसीलिए घोटाला महीनों से बढ़कर सालों तक बेरोकटोक चलता रहा।

FIR दर्ज, न्यायिक हिरासत में भेजे गए तीनों आरोपी

जांच पूरी होने के बाद 29 जून को जगदलपुर थाने में तीनों सिपाहियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और सरकारी धन के गबन समेत कई आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया। अगले दिन तीनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब इस मामले की जांच आगे भी जारी रख रही है और उन अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल हो रही है जिन्हें बढ़ाए गए वेतन का फायदा मिला हो सकता है।

सवाल-जवाब

यह वेतन घोटाला कितने रुपये का है?
यह घोटाला करीब 1.5 करोड़ से 2 करोड़ रुपये का है, जो अक्टूबर 2023 से मई 2026 के बीच सरकारी खातों से निकाले गए।
घोटाला किसने और किस तरह किया?
आरक्षक गिरीश राय ने वेतन शाखा में सहायक के रूप में तैनात रहते हुए वेतन प्रक्रिया शुरू होने से पहले रिकॉर्ड की सॉफ्ट कॉपी में बदलाव कर अपना और दो अन्य सिपाहियों का वेतन बढ़ा देता था।
इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए और उनके नाम क्या हैं?
तीन सिपाहियों को गिरफ्तार किया गया है: गिरीश राय, राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू।
AI ने इस घोटाले को कैसे पकड़ा?
SP कार्यालय में किए गए ऑडिट के दौरान AI आधारित जांच ने वेतन खर्च में असामान्य बढ़ोतरी का संकेत दिया, जिसके बाद विस्तृत जांच में पूरा घोटाला उजागर हुआ।
लोन के नाम पर क्या गड़बड़ी की गई?
गिरीश राय ने कुछ कर्मचारियों को लोन देने का बहाना बनाकर उनका वेतन बढ़ाया और फिर वह बढ़ी हुई रकम लोन की किस्त के नाम पर नकद में वापस ले लेता था।
यह घोटाला इतने साल तक कैसे नहीं पकड़ाया?
पुलिस विभाग में तबादले और नई पोस्टिंग के कारण वेतन खर्च हर महीने बदलता है, जिससे थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी सामान्य उतार-चढ़ाव की तरह दिखती रही और किसी को संदेह नहीं हुआ।
आरोपियों पर कौन-सी धाराओं में मामला दर्ज हुआ?
29 जून को जगदलपुर थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और सरकारी धन के गबन की धाराओं में FIR दर्ज की गई।
गिरीश राय को मास्टरमाइंड क्यों माना जा रहा है?
गिरीश राय 2012 से SP कार्यालय की वेतन शाखा में तैनात था और वेतन रिकॉर्ड में हेरफेर करने की पूरी योजना उसी ने बनाई और चलाई थी।
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