सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साधारण दिखने वाली मीठी बातचीत के जरिए अवैध हथियारों का बड़ा काला कारोबार चलाया जा रहा था। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बनाई गई फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से कोड भाषा में संदेश भेजे जाते थे और हथियारों की खरीद-बिक्री के सौदे तय किए जाते थे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को जब इस गुप्त नेटवर्क की जानकारी मिली, तो पुलिस टीम ने लगातार कई दिनों तक इन डिजिटल संदेशों पर पैनी नजर रखी। इसके बाद स्पेशल सेल ने एक बड़ा अभियान चलाकर इस पूरे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया और गिरोह के मुख्य सरगना सहित कुल 8 सदस्यों को दबोच लिया।
डिजिटल निगरानी से खुला गुप्त नेटवर्क का राज
स्पेशल सेल को गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि मध्य प्रदेश के इलाकों से अवैध हथियारों की एक बड़ी खेप दिल्ली-एनसीआर और आसपास के पड़ोसी राज्यों में पहुंचाई जा रही है। मामले की गहराई से जांच शुरू करने पर अधिकारियों ने पाया कि इस गिरोह के सदस्य अपनी पहचान छिपाने के लिए आम फोन कॉल करने से बचते थे। इसके बजाय, वे फेसबुक, इंस्टाग्राम और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का सहारा लेकर आपस में संवाद करते थे। दिखने में यह बातचीत बेहद सामान्य और सीधी लगती थी, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाले हर शब्द का एक विशेष सांकेतिक मतलब होता था, जिसके जरिए हथियारों के ऑर्डर और डिलीवरी तय की जाती थी।
फर्जी प्रोफाइल और वर्चुअल नंबरों का मायाजाल
पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि गिरोह को संचालित करने वाला मुख्य सरगना शिशपाल सिंह उर्फ यश चौधरी बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए वह लगातार फर्जी फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट तैयार करता था। इसके साथ ही, वह अपनी असली लोकेशन और पहचान छिपाने के लिए वर्चुअल मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था। इन फर्जी अकाउंट्स और वर्चुअल नंबरों की मदद से वह मध्य प्रदेश के स्थानीय हथियार सप्लायरों, नए खरीदारों और कूरियर के रूप में काम करने वाले तस्करों के साथ लगातार तालमेल बनाए रखता था।
कई राज्यों में फैला हथियारों की तस्करी का जाल
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह ने अवैध हथियारों की तस्करी के लिए एक सुव्यवस्थित नेटवर्क तैयार कर रखा था। यह सिंडिकेट मुख्य रूप से मध्य प्रदेश से अवैध पिस्तौलें और अन्य हथियार खरीदता था। इसके बाद इन हथियारों को छिपाकर सुरक्षित तरीके से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में सप्लाई किया जाता था। गिरोह में हथियारों की खरीद, उनकी सुरक्षित पैकेजिंग, परिवहन, छिपने के स्थानों के प्रबंधन और अलग-अलग राज्यों में डिलीवरी देने की जिम्मेदारी विभिन्न सदस्यों के बीच बांटी गई थी।
भारी मात्रा में पिस्तौलें और कारतूस बरामद
स्पेशल सेल की टीम ने रणनीतिक छापेमारी करते हुए सरगना शिशपाल सिंह समेत कुल 8 आरोपियों को अपनी गिरफ्त में लिया। पुलिस ने इनके कब्जे से कुल 18 अवैध हथियार बरामद किए हैं। बरामद किए गए हथियारों में 12 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल, 5 देसी पिस्टल और 1 रिवॉल्वर शामिल है। इसके अलावा पुलिस टीम ने 10 अतिरिक्त मैगजीन तथा 9 एमएम कैलिबर के 5 जिंदा कारतूस भी जब्त किए हैं। इस बड़ी बरामदगी से दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में होने वाली कई संभावित आपराधिक घटनाओं को समय रहते टाल दिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों का लंबा आपराधिक इतिहास
पुलिस द्वारा आरोपियों के बैकग्राउंड की जांच करने पर पता चला कि इनमें से कई आरोपी पुराने आदतन अपराधी हैं। गिरफ्तार किए गए सदस्य नूर मोहम्मद उर्फ तस्लीम के खिलाफ पहले से विभिन्न थानों में 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, गिरोह के एक अन्य सदस्य मोहम्मद शान के खिलाफ भी 6 आपराधिक केस दर्ज पाए गए हैं। गिरोह का सरगना शिशपाल सिंह भी पहली बार गिरफ्तार नहीं हुआ है, बल्कि उसे वर्ष 2021 में भी अवैध हथियारों की तस्करी के एक मामले में पकड़ा गया था। पुलिस का मानना है कि यह केवल एक स्थानीय गिरोह नहीं है, बल्कि एक व्यापक अंतरराज्यीय सिंडिकेट का हिस्सा है जो डिजिटल साधनों का दुरुपयोग कर लंबे समय से अवैध हथियारों की आपूर्ति कर रहा था।



















