बंगाल की खाड़ी से उठा मौसमी चक्रवाती दबाव तटवर्ती इलाकों में प्रवेश कर चुका है। इसके थल भाग पर पहुंचने के बाद देश के पूर्वी तटों से लेकर मध्य भारत और उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों तक मानसूनी हलचल अचानक तेज हो गई है। उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा की सीमाओं पर केंद्रित रहा यह गहरा डिप्रेशन उत्तर-पश्चिम की तरफ लगातार बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जमीनी सतह पर आगे बढ़ते हुए यह तंत्र धीरे-धीरे कमजोर पड़कर सामान्य डिप्रेशन का रूप लेगा, लेकिन अगले 24 घंटों में उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में इसकी सक्रियता भारी बारिश का बड़ा सबब बनने वाली है।
कलिंगपट्टनम तट पार करते ही बरसे बादल
गुरुवार की सुबह साढ़े आठ बजे के आसपास यह मौसमी तंत्र आंध्र प्रदेश के उत्तरी किनारे और ओडिशा के दक्षिणी भूभाग के ऊपर अपनी पूरी ताकत के साथ मौजूद था। उस वक्त इसका मुख्य केंद्र कलिंगपट्टनम से लगभग 70 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में दर्ज किया गया था। वहीं यह ओडिशा के रायगड़ा से करीब 80 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पूर्व, कोरापुट से 90 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर से लगभग 170 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में स्थित था।
दोपहर बाद इस तंत्र ने कलिंगपट्टनम के पास तटीय रेखा को पार किया। इसके भूभाग से टकराते ही तटीय इलाकों में घनघोर बारिश शुरू हो गई। वर्षा मापक आंकड़ों के अनुसार, विशाखापट्टनम में सबसे ज्यादा 278 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि काकीनाडा में 152.3 मिलीमीटर और खम्मम में 104 मिलीमीटर पानी बरसा। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के कई जिलों में 23 सितंबर 2026 से ही बादलों की आवाजाही और तेज हवाओं के साथ पानी गिरने का सिलसिला बना हुआ है।
पूर्वी भारत में तेज हवाओं और आकाशीय बिजली की चेतावनी
इस मौसमी डिप्रेशन की मौजूदगी से पूर्वी भारत के तमाम हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां चरम पर हैं। ओडिशा में 24 सितंबर को कई इलाकों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई। राज्य में 25 सितंबर को भी भारी वर्षा का दौर रहने की बात कही गई है, जबकि 26 सितंबर को चुनिंदा जगहों पर जोरदार पानी गिर सकता है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड और बिहार के मैदानी भागों में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ फुहारें और मध्यम से भारी वर्षा का सिलसिला लगातार कायम रहने की संभावना है।
ओडिशा और बिहार के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है, क्योंकि वहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। कुछ मौकों पर हवा के झोंके 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकते हैं। दक्षिण ओडिशा के अंदरूनी इलाकों में जमीनी तंत्र की मौजूदगी के कारण स्थानीय नदी-नालों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। आधिकारिक तौर पर एक्स पर साझा की गई जानकारी में बताया गया कि यह प्रणाली पिछले 6 घंटों के दौरान 10 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ी और 24 सितंबर 2026 की शाम साढ़े पांच बजे दक्षिण ओडिशा व उससे सटे उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर केंद्रित थी।
तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और छत्तीसगढ़ में स्थिति
उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश के जिलों और केंद्र शासित यनम क्षेत्र में व्यापक वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इन तटीय क्षेत्रों में 25 सितंबर को भी अत्यंत भारी बारिश और वज्रपात की आशंका बनी हुई है। तटवर्ती जिलों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और उनके 70 किमी प्रति घंटे के झोंकों में बदलने की चेतावनी है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तेज बहाव को देखते हुए एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।
पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में भी इस प्रणाली का जबरदस्त असर दिख रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में बादलों की भीषण गर्जना के साथ अत्यंत भारी वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है। छत्तीसगढ़ में 25 सितंबर को 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति वाली तूफानी हवाएं चलने और झोंकों के 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक जाने की आशंका है। इसके साथ ही 25 सितंबर के दौरान राज्य भर में मूसलाधार बरसात के कई दौर देखे जा सकते हैं।
मध्य प्रदेश और विदर्भ में कई दिनों तक झड़ी
मध्य भारत के विस्तृत मैदानी क्षेत्रों में भी यह वेदर सिस्टम लंबे समय तक सक्रिय रहेगा। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के विदर्भ अंचल में आने वाले दिनों में अच्छी-खासी बारिश दर्ज की जाएगी। पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ के अधिकांश क्षेत्रों में 27 सितंबर तक लगातार पानी गिरने और बादल छाए रहने की संभावना है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में 28 सितंबर तक भारी बारिश जारी रह सकती है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में 26 सितंबर को व्यापक पैमाने पर वर्षा हो सकती है। यहां 25 और 27 सितंबर को भारी वर्षा तथा 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। दूसरी तरफ पूर्वी मध्य प्रदेश में 25 और 26 सितंबर को अनेक जगहों पर बहुत तेज बारिश हो सकती है, जबकि 27 सितंबर को भी मूसलाधार वर्षा का अलर्ट बना रहेगा। विदर्भ के इलाकों में 25 सितंबर को भीषण वर्षा और 26 सितंबर को भारी बरसात होने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बरसात
उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में भी इस मानसूनी प्रणाली की सीधी धमक देखने को मिलेगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर तक व्यापक वर्षा के आसार हैं, जबकि 25 और 26 सितंबर को कई जिलों में अत्यंत तेज बरसात हो सकती है। 27 सितंबर को भी पूर्वी यूपी में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अधिकांश जगहों पर पानी गिरेगा, जबकि 25 से 27 सितंबर के दौरान तेज बारिश और 27 सितंबर तक धूल भरी आंधी व तेज हवाओं का प्रकोप बना रह सकता है।
उत्तराखंड के पहाड़ी ढलानों पर यह प्रणाली भूस्खलन और जलभराव का खतरा बढ़ा सकती है। राज्य में 25 और 28 सितंबर को भारी वर्षा तथा 27 सितंबर को बहुत भारी वर्षा होने के आसार हैं। विशेष रूप से 26 सितंबर को उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। हिमाचल प्रदेश में 26 और 28 सितंबर को भारी तथा 27 सितंबर को अत्यधिक वर्षा होने का पूर्वानुमान है। दोनों पहाड़ी राज्यों में 26 से 28 सितंबर के दौरान व्यापक रूप से मूसलाधार बरसात जारी रह सकती है।
कश्मीर घाटी से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक प्रभाव
पहाड़ी उत्तर भारत के ऊपरी हिस्सों यानी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के इलाकों में 28 सितंबर से 30 सितंबर के दौरान मौसम में बड़ा बदलाव आएगा। इन क्षेत्रों में बिजली कड़कने, तेज बौछारें पड़ने और अंधड़ चलने की संभावना है। स्थानीय यात्रियों और पहाड़ी मार्गों पर चलने वाले वाहनों को इस दौरान सावधानी रखने की सलाह है।
देश के पूर्वोत्तर हिस्से में भी यह मौसमी बदलाव व्यापक रूप से देखने को मिलेगा। अरुणाचल प्रदेश में 28 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश होने की बात कही गई है। इसी तरह असम और मेघालय में भी 28 सितंबर तक लगातार तेज पानी गिरने का पूर्वानुमान है। वहीं नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के पहाड़ी व मैदानी इलाकों में 27 सितंबर को व्यापक स्तर पर वर्षा दर्ज होने की पूरी संभावना है।















