नेपाल जलप्रलय के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने की बालेन शाह से बात, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथकैनेडियन डॉलर पर दबाव के बीच 1.3900 के स्तर की ओर बढ़ा USD/CAD, जैक्सन होल भाषण और एनवीडिया नतीजों पर नजरबीजिंग रोबोट गेम्स में तियानगोंग और ऑनर ने तोड़ा उसेन बोल्ट का स्प्रिंट रिकॉर्डन्यायपालिका में आंतरिक मामलों का फैसला स्थापित प्रक्रियाओं से ही होगा, मीडिया दावों से नहीं, बोले CJI सूर्यकांतयूनाइटेड ओवरसीज बैंक के अनुसार चीनी युआन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 6.7000 तक गिर सकता है, जैक्सन होल भाषण से पहले बाजार में हलचलनेपाल बाढ़: राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से 105 लापता भारतीयों को सुरक्षित बचाने की अपील कीसेंट्रल बैंक की नीति से ताइवान डॉलर संतुलित, वॉल स्ट्रीट को एनवीडिया के नतीजों का इंतजारमोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम का जोहरान ममदानी ने किया विरोध, मैरी मिलबेन का तीखा पलटवारसुभाष चंद्रा के 22,006 करोड़ रुपये के कर्ज का सिर्फ 6.5 करोड़ में निपटारा, एनसीएलटी ने दी मंजूरीअमेरिका में महंगाई के आंकड़ों से डॉलर इंडेक्स में बढ़त, पर फेड रेट कट की उम्मीदों ने सीमित की रफ्तार
बीजिंग में भारत और चीन की वार्ता में 8 बड़े फैसलों पर सहमति बनी और पूर्वी व मध्य सेक्टर के लिए दो नई सैन्य हॉटलाइन तय हुईंभारत
26 अग॰ 2026, 11:38 pm (1 घंटे पहले)· 2

बीजिंग में भारत और चीन की वार्ता में 8 बड़े फैसलों पर सहमति बनी और पूर्वी व मध्य सेक्टर के लिए दो नई सैन्य हॉटलाइन तय हुईं

भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने, दो नई सैन्य हॉटलाइन शुरू करने तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा को विस्तार देने समेत आठ प्रमुख बिंदुओं पर ऐतिहासिक सहमति बनी है।

भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी संवेदनशील मुद्दों पर जारी कूटनीतिक प्रयासों के तहत 25 अगस्त को चीन की राजधानी बीजिंग में विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की उच्चस्तरीय वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने किया, जबकि चीनी पक्ष की ओर से विदेश मामलों के प्रमुख तथा विशेष प्रतिनिधि वांग यी ने भाग लिया। दोनों पड़ोसियों के बीच यह द्विपक्षीय बातचीत ऐसे महत्वपूर्ण समय में आयोजित हुई है जब वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दीर्घकालिक शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखना दोनों देशों की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। इस बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के स्थाई समाधान की दिशा में प्रगति करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर तनाव को कम करने, सैन्य संवाद ढांचे को सशक्त बनाने और द्विपक्षीय सहयोग के नए रास्ते खोलने पर गहन विचार-विमर्श किया। व्यापक वार्ता के पश्चात दोनों देशों ने आठ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आपसी सहमति व्यक्त की है, जिनमें दो नई सैन्य हॉटलाइन की स्थापना, नए बैठक स्थलों का चयन, कैलाश मानसरोवर यात्रा को प्रोत्साहन और सीमा व्यापार केंद्रों की बहाली जैसे बड़े निर्णय शामिल हैं।

एलएसी पर शांति बनाए रखने का शीर्ष नेतृत्व का निर्देश

द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों राष्ट्रों के समग्र संबंधों के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारतीय और चीनी प्रतिनिधियों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वे अपने-अपने शीर्ष नेतृत्व द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करेंगे। दोनों देशों का मानना है कि सीमा पर एक शांत और तनावमुक्त वातावरण का निर्माण होने से भारत और चीन के आपसी संबंधों को पुनः सामान्य, सुदृढ़ और स्थिर बनाने की प्रक्रिया को गति मिलेगी। इस बात पर भी सहमति जताई गई कि द्विपक्षीय रिश्तों की प्रगति के लिए सीमा पर किसी भी प्रकार के गतिरोध से बचना अनिवार्य है।

ये भी पढ़ें

वर्ष 2005 के समझौते के आधार पर सीमा विवाद का स्थायी समाधान

दीर्घकालिक सीमा विवाद के स्थाई और सर्वमान्य हल की खोज में दोनों देशों ने वार्ता प्रक्रिया को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस दिशा में वर्ष 2005 में हुए ऐतिहासिक समझौते और उसके बाद विशेष प्रतिनिधियों की विभिन्न बैठकों में बनी सहमतियों को मुख्य आधार बनाया जाएगा। भारत और चीन एक ऐसे निष्पक्ष, तर्कसंगत और परस्पर स्वीकार्य समाधान तक पहुंचना चाहते हैं जो दोनों पक्षों के हित में हो। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा संस्थागत ढांचा तैयार करना है जिसके माध्यम से दशकों पुराने सीमा विवाद को शांतिपूर्ण और स्थायी रूप से समाप्त किया जा सके।

सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन के लिए अलग-अलग कार्य समूह

सीमा से जुड़े विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बैठक में एक स्पष्ट कार्ययोजना पर सहमति बनी। इसके तहत सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन के विषयों पर पृथक-पृथक रूप से कार्य किया जाएगा। दोनों क्षेत्रों के लिए गठित विशेषज्ञ समूह और सीमा प्रबंधन से जुड़े कार्य समूह अपनी-अपनी बातचीत को आगे बढ़ाएंगे। वार्ता के प्रारंभिक चरण में दोनों समूह अपने-अपने कार्यक्षेत्र, प्राथमिकताओं और विशिष्ट जिम्मेदारियों का निर्धारण करेंगे। इसके पश्चात ही सीमा रेखा के स्पष्टीकरण और दैनिक प्रबंधन से जुड़े जटिल मुद्दों पर चरणबद्ध तरीके से विस्तृत चर्चा आयोजित की जाएगी।

पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो नई हॉटलाइन तथा नए बैठक स्थल

जमीनी स्तर पर सैन्य तालमेल और आपसी विश्वास को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत और चीन ने दो नए बैठक स्थल बनाने पर सहमति व्यक्त की है। इन निर्धारित स्थलों पर दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से आमने-सामने बैठकर स्थिति की समीक्षा कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, वास्तविक नियंत्रण रेखा के पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो नई सैन्य हॉटलाइन स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस आपातकालीन संचार व्यवस्था का मुख्य लाभ यह होगा कि सीमा पर किसी भी प्रकार का तनाव या अप्रत्याशित परिस्थिति उत्पन्न होने पर दोनों पक्षों के उच्च सैन्य कमांडर तुरंत सीधे संपर्क कर सकेंगे, जिससे किसी भी स्थानीय गलतफहमी को शुरुआती स्तर पर ही दूर किया जा सकेगा।

एलएसी पर त्वरित संवाद और नई परिस्थितियों से निपटने का तंत्र

सीमा पर किसी भी अप्रत्याशित घटना या नई परिस्थिति से तत्काल और प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक त्वरित संचार व्यवस्था पर सहमति बनाई गई है। इसके अंतर्गत स्थापित सैन्य संपर्क माध्यमों तथा कूटनीतिक रास्तों का पूर्ण उपयोग किया जाएगा। इसमें स्थानीय कमांडर स्तर की नियमित बैठकें और पूर्व निर्धारित द्विपक्षीय तंत्र सक्रिय भूमिका निभाएंगे। यदि सीमा पर कोई मतभेद या तनाव की स्थिति बनती है तो दोनों पक्ष बातचीत के माध्यम से उसे शीघ्र सुलझाने का प्रयास करेंगे। इससे संवादहीनता के कारण स्थिति बिगड़ने का जोखिम न्यूनतम हो जाएगा। इसके साथ ही दोनों देशों ने एलएसी के संदर्भ में अपनी आपसी समझ को अधिक स्पष्ट और बेहतर बनाने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की।

कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और तीन सीमा व्यापार केंद्रों की शुरुआत

केवल सैन्य और सीमा प्रबंधन तक सीमित न रहकर इस बैठक में नागरिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी सकारात्मक प्रगति हुई। भारत ने तिब्बत क्षेत्र में स्थित कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारतीय श्रद्धालुओं के जत्थों की संख्या बढ़ाने के चीनी प्रयासों का स्वागत किया है। इसके अलावा, दोनों देशों ने पूर्व निर्धारित तीन सीमा व्यापार केंद्रों को पुनः खोलने के निर्णय पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। धार्मिक यात्राओं, सीमावर्ती व्यापार और जन-सामान्य से जुड़े अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

सीमा पार नदियों पर जल डेटा साझा करने के लिए सितंबर में बैठक

दोनों पड़ोसी देशों के बीच बहने वाली सीमा पार नदियों के प्रबंधन और जल संसाधनों के आदान-प्रदान को लेकर भी वार्ता को जारी रखने का निर्णय लिया गया। इसके लिए भारत और चीन सितंबर महीने में विशेषज्ञ स्तर की अगली बैठक आयोजित करने पर सहमत हुए हैं। इस आगामी बैठक में नदियों के जल प्रवाह से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़ों को साझा करने तथा पहले से मौजूद समझौता ज्ञापनों के विस्तार और नवीनीकरण पर चर्चा होगी। चूंकि सीमा पार की नदियां दोनों देशों के पारिस्थितिक और आर्थिक हितों से जुड़ी हैं, इसलिए समय पर सटीक जल डेटा साझा करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

वर्ष 2027 में भारत में आयोजित होगी 26वें दौर की विशेष वार्ता

सीमा विवाद के समाधान के लिए संवाद की निरंतरता बनाए रखते हुए दोनों पक्षों ने तय किया है कि विशेष प्रतिनिधियों के अगले यानी 26वें दौर की बैठक वर्ष 2027 में भारत में आयोजित की जाएगी। यह निर्णय दर्शाता है कि दोनों राष्ट्र जटिल से जटिल मुद्दों पर भी कूटनीतिक चर्चा का मार्ग खुला रखना चाहते हैं। जहां 25वें दौर की बैठक में सीमा पर शांति व्यवस्था, आपातकालीन संचार और व्यावहारिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया, वहीं भारत में होने वाली अगली बैठक में विवाद के व्यापक और स्थाई समाधान की दिशा में वार्ता को और आगे ले जाने की उम्मीद है।

सवाल-जवाब

विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की बातचीत कब और कहां हुई?
भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की बातचीत 25 अगस्त को चीन की राजधानी बीजिंग में संपन्न हुई।
इस बैठक में भारत और चीन का प्रतिनिधित्व किसने किया?
भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन की ओर से विदेश मामलों के प्रमुख वांग यी ने बैठक का प्रतिनिधित्व किया।
वार्ता के दौरान किन मुख्य निर्णयों पर सहमति बनी?
दोनों देशों ने सीमा पर शांति, दो नई सैन्य हॉटलाइन की शुरुआत, दो नए बैठक स्थल बनाने, कैलाश मानसरोवर यात्रा विस्तार और सीमा व्यापार केंद्रों की बहाली समेत 8 बिंदुओं पर सहमति जताई।
नई सैन्य हॉटलाइन किन क्षेत्रों में शुरू की जाएंगी?
वास्तविक नियंत्रण रेखा के पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो नई सैन्य हॉटलाइन शुरू की जाएंगी ताकि आपात स्थिति में वरिष्ठ अधिकारी सीधे बात कर सकें।
विशेष प्रतिनिधियों की अगले दौर की बैठक कब और कहां आयोजित होगी?
विशेष प्रतिनिधियों के 26वें दौर की अगली बैठक वर्ष 2027 में भारत में आयोजित होगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और वांग यी की यह उच्चस्तरीय बैठक और आठ सूत्रीय सहमति सीमा प्रबंधन और कानून-व्यवस्था के लिहाज से एक कूटनीतिक सफलता है। दो नई सैन्य हॉटलाइन और विशेष कार्य समूहों का गठन ज़मीनी स्तर पर सैन्य संघर्षों और अपराध जैसी आपात स्थितियों को रोकने में अहम साबित होगा। एलएसी पर शांति बनाए रखने के लिए यह संस्थागत ढांचा भविष्य में सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त बनाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच खुफिया और रणनीतिक समन्वय मजबूत होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·11 मिनट पहले

अजित डोभाल और वांग यी की इस उच्चस्तरीय वार्ता में बनी आठ सूत्रीय सहमति और पूर्वी व मध्य सेक्टर के लिए दो नई सैन्य हॉटलाइनें इस बात का संकेत हैं कि कूटनीतिक चैनल अब ज़मीनी स्तर पर संवादहीनता को दूर करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। वर्ष 2005 के ढांचे के तहत सीमा निर्धारण और प्रबंधन के लिए अलग कार्य समूहों का गठन यह बताता है कि दोनों देश केवल तात्कालिक तनाव घटाने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि एक स्थायी संस्थागत तंत्र तैयार करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। हालांकि, दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये सैन्य हॉटलाइनें और नए संपर्क बिंदु वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अवांछित टकराव रोकने में कितने प्रभावी साबित होते हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR