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भदोही में फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से MBBS दाखिला कराने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़, सरगना संजय दुबे समेत 6 आरोपी जेल भेजे गएउत्तर प्रदेश
21 अग॰ 2026, 7:23 pm (22 दिन पहले)· 1

भदोही में फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से MBBS दाखिला कराने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़, सरगना संजय दुबे समेत 6 आरोपी जेल भेजे गए

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में पुलिस ने NEET-UG 2025 में कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र से MBBS दाखिला दिलाने वाले गिरोह को बेनकाब किया है। मास्टरमाइंड संजय दुबे और दिनेश वर्मा सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में पुलिस ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़ा सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह NEET-UG 2025 की प्रवेश परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को अपना शिकार बनाता था और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर उन्हें MBBS पाठ्यक्रम में प्रवेश दिलाने का झांसा देता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सरगना संजय दुबे सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस नेटवर्क से जुड़े दिनेश वर्मा को भी पुलिस ने आरोपी के तौर पर चिन्हित किया है।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के नाम पर ठगी

पुलिस जांच के दौरान गिरोह की कार्यशैली का पूरा खाका सामने आया है। यह नेटवर्क NEET परीक्षा में कम अंक लाने वाले हताश छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क साधता था। गिरोह के सदस्य इन छात्रों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटा के तहत आरक्षित मेडिकल सीटों पर आसानी से दाखिला दिलाने का लालच देते थे। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए सिंडिकेट के सदस्य स्वयं ही फर्जी और कूटरचित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार करते थे। इन्हीं फर्जी कागजातों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता था। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, गिरोह ने कुल नौ छात्रों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें इस विशेष कोटे के जरिए मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का प्रयास किया था।

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विभागीय जांच और भौतिक सत्यापन से खुला राज

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब संभव हो सका जब मेडिकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने संदिग्ध मामलों में सतर्कता बरतते हुए दस्तावेजों की गहराई से जांच कराने के निर्देश दिए। अगस्त 2025 में भेजे गए एक आधिकारिक पत्र के बाद जब संबंधित राजस्व और प्रशासनिक विभागों ने इन नौ छात्रों के कागजों की जांच-पड़ताल की, तो बड़ा सच उजागर हुआ। भौतिक सत्यापन के दौरान पता चला कि नौ के नौ छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र पूरी तरह से जाली और नकली थे। कागजातों में यह गंभीर धोखाधड़ी सामने आते ही पुलिस तुरंत हरकत में आई और मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई।

सरगना संजय दुबे समेत 6 गिरफ्तार, प्रशासनिक संपर्कों की पड़ताल

मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भदोही पुलिस की विशेष टीम ने गिरोह के काम करने के तरीके और उसके सदस्यों की सटीक जानकारी जुटाई। इसके बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर गिरोह के मास्टरमाइंड संजय दुबे को गिरफ्तार कर लिया। संजय दुबे से पूछताछ के आधार पर इस फर्जीवाड़ा नेटवर्क में शामिल पांच अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार किए गए सभी छह आरोपियों को वैधानिक प्रक्रियाओं के बाद सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

फिलहाल भदोही पुलिस इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अन्य बिचौलियों, दलालों और संलिप्त संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस इस बिंदु पर भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि इन जाली प्रमाण पत्रों को तैयार करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पार कराने के लिए सरकारी स्तर पर किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों से सांठगांठ की गई थी।

सवाल-जवाब

भदोही में किस तरह के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है?
भदोही पुलिस ने NEET-UG 2025 में कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के जरिए MBBS दाखिला दिलाने वाले सिंडिकेट को बेनकाब किया है।
गिरोह अभ्यर्थियों को किस तरह झांसा देता था?
सिंडिकेट के सदस्य खुद ही फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाकर कम अंक वाले छात्रों को आरक्षित कोटे से मेडिकल सीट दिलाने का दावा करते थे।
इस मामले में कुल कितने छात्रों के फर्जी दस्तावेज बनाए गए थे?
गिरोह ने कुल 9 छात्रों के फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार कर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी।
फर्जी प्रमाण पत्रों का खुलासा कैसे हुआ?
अगस्त 2025 में मेडिकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जब संबंधित विभागों ने दस्तावेजों का भौतिक और विभागीय सत्यापन किया, तो सभी 9 प्रमाण पत्र नकली पाए गए।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने मास्टरमाइंड संजय दुबे समेत 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और प्रशासनिक सांठगांठ तथा अन्य बिचौलियों की जांच जारी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·21 दिन पहले

भदोही में नीट-यूजी दाखिलों में फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाण पत्रों का उपयोग वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा प्रहार है। यह सिंडिकेट केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की साख और योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का खुला हनन है। यदि दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन और डिजिटल ऑडिट की प्रक्रिया में और सख्ती नहीं लाई गई, तो ऐसे फर्जीवाड़े भविष्य में शैक्षणिक संस्थानों के बुनियादी ढांचे और वित्तीय अनुशासन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

Sophie Laurent@sophie-laurent·21 दिन पहले

नीट-यूजी दाखिलों में इस तरह के फर्जीवाड़े सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा और लोक स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। जब अयोग्य अभ्यर्थी कूट रचित दस्तावेजों के सहारे चिकित्सा संस्थानों में प्रवेश पाते हैं, तो यह भावी स्वास्थ्य सेवा के मानकों के साथ एक बड़ा खिलवाड़ साबित होता है। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर माने जाने वाले प्रशासनिक और संस्थागत भ्रष्टाचार को रोकने के लिए डिजिटल डेटाबेस के त्वरित सत्यापन और कड़े नियामक तंत्र की तत्काल आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मेडिकल एजुकेशन की शुचिता बरकरार रखी जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·21 दिन पहले

यह घटना पारदर्शी चयन प्रक्रिया के सामने एक बड़ी चुनौती है, जो उच्च शिक्षा में कोटे के दुरुपयोग को दर्शाती है। यदि इस सिंडिकेट के प्रशासनिक संपर्कों और अन्य लाभार्थियों की गहन जांच नहीं की गई, तो ऐसे गिरोह व्यवस्था की खामियों का लाभ उठाकर মেধवी छात्रों का हक मारते रहेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 दिन पहले

यह मामला सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि प्रवेश परीक्षाओं की शुचिता पर सीधा प्रहार है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जैसे संवेदनशील कोटे का दुरुपयोग यह दर्शाता है कि संगठित अपराधी अब प्रशासनिक कमजोरियों का फायदा उठाने में कितने माहिर हो चुके हैं। पुलिस को यह भी जांचना होगा कि क्या इन नौ छात्रों के अलावा अन्य सत्रों में भी इस सिंडिकेट ने ऐसे फर्जी दाखिले कराए हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·21 दिन पहले

यह फर्जीवाड़ा इस बात का प्रमाण है कि संगठित अपराधी अब संवेदनशील आरक्षण कोट्टों को निशाना बना रहे हैं। मास्टरमाइंड संजय दुबे और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी से एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है, लेकिन पुलिस को यह भी खंगालना होगा कि क्या इस सिंडिकेट के तार अन्य जिलों के मेडिकल कॉलेजों या प्रशासनिक अधिकारियों से भी जुड़े थे, ताकि इस पूरे नेटवर्क की जड़ें काटी जा सकें।

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