राजधानी दिल्ली में नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन बेचने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने 22 अप्रैल को मुखर्जी नगर स्थित एक बिना लाइसेंस वाली मेडिकल दुकान पर छापेमारी कर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली रेबीज रोधी वैक्सीन 'अभयराब' की नकली शीशियां बरामद कीं। इन जब्त शीशियों के सैंपल कसौली स्थित सेंट्रल ड्रग लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजे गए थे, जहां लैब टेस्ट में यह वैक्सीन पूरी तरह फेल साबित हुई। नकली और निष्प्रभावी जीवनरक्षक दवा बेचने के इस गंभीर मामले में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
नामी कंपनी के बैच नंबर की आड़ में पैकेजिंग का फर्जीवाड़ा
'अभयराब' वैक्सीन का निर्माण प्रसिद्ध फार्मास्युटिकल कंपनी 'इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड' करती है। मामले के सामने आने के बाद जब संबंधित कंपनी से संपर्क साधा गया, तो कंपनी के प्रतिनिधियों ने पुष्टि की कि जब्त की गई शीशियों पर अंकित बैच नंबर असली है। कंपनी के अनुसार, इस विशिष्ट बैच की तैयार वैक्सीन का आवश्यक परीक्षण और गुणवत्ता जांच पूरी करने के बाद ही बाजार में वैध सप्लाई के लिए भेजा गया था। हालांकि, लैब जांच में खुलासा हुआ कि मेडिकल स्टोर से बरामद की गई बॉटल्स पर चिपकाए गए लेबल और क्यूआर कोड पूरी तरह फर्जी हैं। जालसाजों ने असली कंपनी के प्रामाणिक बैच नंबर की आड़ में नकली दवा पर जाली रैपर लगाकर खुले बाजार में खपाने का आपराधिक षड्यंत्र रचा था।
DCGI ने जारी किया अलर्ट, देशभर के राज्यों को चौकस रहने के निर्देश
इस खतरनाक फर्जीवाड़े की गंभीरता को देखते हुए ड्रग कंट्रोलर General of India (DCGI) ने तत्काल प्रभाव से देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को हाई अलर्ट जारी कर दिया है। DCGI ने अधिकारियों को अभयराब वैक्सीन के इस खास प्रभावित बैच की बिक्री, वितरण और उपलब्धता पर सख्त और निरंतर निगरानी बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया है। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इस अंतरराज्यीय रैकेट का जाल कहां-कहां फैला हुआ है, ये नकली शीशियां किन-किन मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों में सप्लाई की गईं, और बीते कुछ महीनों के दौरान कितने मरीजों को यह नकली इंजेक्शन लगाया जा चुका है।
वैक्सीन निष्प्रभावी रहने पर रेबीज संक्रमण से मौत निश्चित
चिकित्सा विशेषज्ञों और न्यूरोलॉजिस्टों ने चेतावनी दी है कि रेबीज एक ऐसा जानलेवा वायरल संक्रमण है जिसका कोई इलाज नहीं है और केवल ससमय प्रामाणिक वैक्सीनेशन ही मरीज की जान बचा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को आवारा या संक्रमित कुत्ते के काटने के बाद नकली या गुणहीन वैक्सीन लगा दी जाती है, तो उसके शरीर में रेबीज वायरस से लड़ने के लिए आवश्यक एंटीबॉडी विकसित ही नहीं हो पाती हैं। ऐसी स्थिति में संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंचकर मरीज के लिए जानलेवा साबित होता है और उसकी मृत्यु निश्चित हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनरक्षक दवाओं में इस प्रकार की जालसाजी करने वालों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में मरीजों के स्वास्थ्य के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो सके।





















