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भारत और चीन के रिश्तों पर निर्भर है एशिया का भविष्य, पूर्व CDS अनिल चौहान का बड़ा बयानभारत
6 सित॰ 2026, 11:47 am (25 दिन पहले)· 2

भारत और चीन के रिश्तों पर निर्भर है एशिया का भविष्य, पूर्व CDS अनिल चौहान का बड़ा बयान

पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि एशिया का भविष्य भारत और चीन के उत्थान को संभालने पर टिका है। उन्होंने भारत-चीन संबंधों, पाकिस्तान से सुरक्षा चुनौतियों और वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों पर खुलकर अपनी बात रखी।

एशिया का भविष्य इस बात पर मुख्य रूप से टिका हुआ है कि भारत और चीन अपनी एक साथ हो रही आर्थिक और सामरिक प्रगति को किस प्रकार से संचालित करते हैं। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने एक विशेष कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश महाद्वीप की दो सबसे बड़ी ताकतें, बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और अत्यंत प्राचीन सभ्यताएं हैं, जिनके बीच एक ही समय पर आपसी सहयोग और तीखी प्रतिस्पर्धा दोनों ही स्थितियां लगातार बनी रहती हैं।

सभ्यतागत रिश्ते और संवाद की महत्ता

भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक समारोह के दौरान जनरल अनिल चौहान ने भारत और चीन के बीच के जटिल संबंधों की मौजूदा चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के आपसी संबंधों को केवल एक साधारण सीमा विवाद के दायरे में सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "चीन और भारत दो प्रमुख एशियाई शक्तियां, बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सभ्यतागत राष्ट्र हैं। दोनों कुछ क्षेत्रों में सहयोग करते हैं, प्रभाव और बाजारों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं और क्षेत्रीय एवं वैश्विक व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर इनके विचार अलग-अलग हैं।" उन्होंने आगे कहा कि चीन के साथ लगातार कूटनीतिक और राजनयिक संवाद बनाए रखना देश के लिए बहुत जरूरी है। इस सिलसिले में उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिनका उपयोग भारत बीजिंग के साथ संवाद कायम रखने के लिए कर रहा है।

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पाकिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियां

पड़ोसी देश पाकिस्तान का जिक्र करते हुए पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने साफ कहा कि सीमा पार से लगातार हो रहे आतंकवाद के कारण वह भारत के लिए एक प्रमुख और गंभीर सुरक्षा चिंता बना रहेगा। उन्होंने परमाणु हथियारों की भूमिका पर बात करते हुए बताया कि परमाणु हथियारों ने रणनीतिक रूप से उच्चतम स्तर पर एक प्रकार की स्थिरता जरूर पैदा कर दी है, लेकिन इसके परिणामस्वूप निचले स्तर पर अस्थिरता को काफी बढ़ावा मिला है। उन्होंने इस पूरी स्थिति को स्थिरता विरोधाभास की संज्ञा दी। उन्होंने विस्तार से बताया कि पाकिस्तानी रणनीतिक योजना हमेशा से पारंपरिक सैन्य अभियानों के लिए उपलब्ध गुंजाइश को जानबूझकर सीमित करने और उप-पारंपरिक अभियानों के लिए जगह को बढ़ाने की रही है।

वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता

मौजूदा समय की उभरती हुई सुरक्षा चुनौतियों पर अपनी बात रखते हुए पूर्व CDS ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता को वैश्विक सुरक्षा के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि पुरानी वैश्विक शक्ति-संतुलन की व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर हो रही है, जबकि एक नई विश्व व्यवस्था की संरचनाएं अभी शुरुआती दौर में ही आकार ले रही हैं। भविष्य की संभावित चुनौतियों से मजबूती से निपटने के लिए उन्होंने भारत को पूरी तरह तैयार रहने की सलाह दी। इस तैयारी के लिए उन्होंने घरेलू आत्मनिर्भरता बढ़ाने, अपनी भेद्यता को कम करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं और संसाधनों का विविधीकरण करने तथा किसी भी तरह की बाहरी निर्भरता में भारी कमी लाने पर विशेष जोर दिया।

सवाल-जवाब

जनरल अनिल चौहान ने भारत और चीन के संबंधों के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि एशिया का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों देश अपने एक साथ हो रहे उत्थान को कैसे प्रबंधित करते हैं।
यह बयान किस अवसर पर दिया गया?
यह बयान भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया।
भारत किन मंचों के माध्यम से चीन के साथ संवाद कर रहा है?
भारत शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स जैसे मंचों के माध्यम से चीन के साथ संवाद बनाए हुए है।
पाकिस्तान को लेकर पूर्व सीडीएस ने क्या चेतावनी दी?
उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के कारण पाकिस्तान भारत के लिए एक प्रमुख सुरक्षा चुनौती बना रहेगा।
स्थिरता विरोधाभास से क्या अभिप्राय है?
इसका मतलब है कि परमाणु हथियारों ने उच्चतम स्तर पर स्थिरता पैदा की है लेकिन निचले स्तर पर अस्थिरता को बढ़ावा मिला है।
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