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भरतपुर के अपना घर आश्रम में बेसहारा लोगों को मिल रहा है नया जीवन और परिवार जैसा प्यारराजस्थान
16 सित॰ 2026, 8:49 pm (8 दिन पहले)· 0

भरतपुर के अपना घर आश्रम में बेसहारा लोगों को मिल रहा है नया जीवन और परिवार जैसा प्यार

भरतपुर का अपना घर आश्रम देश के अलग-अलग हिस्सों से आए बेसहारा, बीमार और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को निशुल्क रहने, खाने और इलाज की सुविधाएं देकर एक नया जीवन दे रहा है।

सड़क किनारे लाचार और बेसहारा हालत में पड़े लोगों की जिंदगी में उम्मीद की एक नई किरण जगाने वाला एक अनोखा ठिकाना राजस्थान के भरतपुर में मौजूद है। इस स्थान को अपना घर आश्रम के नाम से जाना जाता है, जो सिर्फ एक आश्रय स्थल नहीं बल्कि उन लोगों के लिए एक सुरक्षित आशियाना बन चुका है जिन्हें अपनों ने अकेला छोड़ दिया है। यहां आने वाले हर जरूरतमंद व्यक्ति को न केवल सिर छुपाने के लिए छत मिलती है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीने का अवसर और परिवार जैसा स्नेह भी प्राप्त होता है। यह संस्थान समाज के सबसे उपेक्षित वर्ग के लिए एक जीवनदायिनी व्यवस्था के रूप में काम कर रहा है।

देश के कोने-कोने से आने वाले बेसहारा लोगों को मिलता है सहारा

इस अनूठे आश्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे लोगों को लाया जाता है जिनका दुनिया में कोई सहारा नहीं बचा है या जो किसी विपरीत परिस्थिति के कारण अपने परिवार से बिछड़ गए हैं। इस शरणस्थली में आने वाले लोगों में गंभीर रूप से बीमार, लाचार बुजुर्ग, मानसिक रूप से अस्वस्थ लोग और सड़कों के किनारे अत्यंत दयनीय स्थिति में पड़े हुए लोग शामिल होते हैं। इन सभी लोगों को आश्रम में लाकर उनके रहने, पौष्टिक भोजन और बेहतर चिकित्सा उपचार सहित जीवन के लिए आवश्यक सभी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह से निशुल्क प्रदान की जाती हैं।

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रहने की व्यवस्था से लेकर चिकित्सा और भावनात्मक संबल तक

आश्रम में केवल लोगों को रहने का स्थान ही नहीं दिया जाता, बल्कि उनके स्वास्थ्य, खान-पान और रोजमर्रा की हर छोटी-बड़ी जरूरत का बेहद संजीदगी से ध्यान रखा जाता है। इस सेवा संस्थान का मूल उद्देश्य किसी व्यक्ति की केवल तात्कालिक जरूरतों को पूरा करना भर नहीं है, बल्कि उसे एक पूरी तरह से सुरक्षित वातावरण, समाज में सम्मान और सबसे जरूरी मानसिक व भावनात्मक संबल देना भी है। यही कारण है कि इस परिसर में कदम रखने के बाद बेसहारा लोगों को यह जगह धीरे-धीरे अपने खुद के घर जैसी महसूस होने लगती है। कई किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ यह आश्रम आज केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के सबसे बड़े और प्रमुख सेवा संस्थानों में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है।

संस्थापकों का अटूट सेवा भाव और पारिवारिक माहौल

इस विशाल सेवा केंद्र में प्रतिदिन बहुत बड़ी संख्या में निराश्रित लोगों की देखभाल की जाती है। आश्रम में कार्यरत और सेवा करने वाले सभी लोग इन बेसहारा निवासियों को अपने स्वयं के परिवार का सदस्य मानते हैं और उसी आत्मीयता के साथ उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। इस बेहद मानवीय और अनुकरणीय संस्थान की नींव बी. एन. भारद्वाज और उनकी धर्मपत्नी ने रखी थी। इस दंपत्ति ने पूर्ण रूप से सेवा भावना से ओत-प्रोत होकर इस पुनीत कार्य की शुरुआत की थी। वर्तमान में भी दोनों इस पूरे आश्रम की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालने और यहां रहने वाले निराश्रित लोगों की व्यक्तिगत देखभाल करने में अपनी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सेवा, सत्कार और आत्मीयता ही है इस संस्थान की असली पहचान

पूरे आश्रम की कार्यप्रणाली में सेवा, त्वरित उपचार और अपार आत्मीयता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत और पहचान बनकर उभरी है। जहां एक ओर परिस्थितिवश अपनों का साथ छूट जाता है, वहीं दूसरी ओर अपना घर आश्रम इन असहाय लोगों के लिए एक मजबूत सुरक्षा दीवार बनकर खड़ा दिखाई देता है। यहां मिलने वाला समय पर भोजन, उत्कृष्ट इलाज और इन सबसे बढ़कर मिलने वाला अपनापन इन उपेक्षित लोगों के मन में जिंदगी को नए सिरे से जीने की उम्मीद और विश्वास जगाने का एक सराहनीय काम कर रहा है।

सवाल-जवाब

अपना घर आश्रम कहां स्थित है?
यह प्रसिद्ध सेवा संस्थान राजस्थान के भरतपुर में स्थित है और कई किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है।
इस आश्रम की स्थापना किसने की थी?
इस आश्रम की स्थापना बी. एन. भारद्वाज और उनकी धर्मपत्नी ने मिलकर समाज सेवा की भावना के साथ की थी।
अपना घर आश्रम में किस तरह के लोगों को आश्रय दिया जाता है?
यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से लाए गए बेसहारा, बीमार, मानसिक रूप से अस्वस्थ, बुजुर्गों और सड़क किनारे लाचार मिले लोगों को आश्रय दिया जाता है।
क्या आश्रम में रहने और इलाज के लिए कोई शुल्क लिया जाता है?
नहीं, यहां रहने वाले सभी निराश्रित लोगों के लिए आवास, भोजन, वस्त्र और संपूर्ण चिकित्सा उपचार पूरी तरह से निशुल्क प्रदान किया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था की रिपोर्टिंग के दौरान हमने अक्सर देखा है कि बेसहारा, मानसिक रूप से अस्वस्थ या सड़कों पर लावारिस मिलने वाले लोग कई बार अनजाने में कानूनी पेचीदगियों या आपराधिक मामलों का शिकार बन जाते हैं। भरतपुर के अपना घर आश्रम जैसे संस्थान न केवल इन उपेक्षित और विस्थापित लोगों को मानवीय सुरक्षा और पुनर्वास प्रदान कर रहे हैं, बल्कि पुलिस और प्रशासन के लिए भी ऐसे मामलों में मददगार साबित होते हैं जहां परिवारों से बिछड़े व्यक्तियों की पहचान और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाती है। इस तरह के सामाजिक और कानूनी समन्वय से सार्वजनिक सुरक्षा और न्याय व्यवस्था दोनों को मजबूती मिलती है।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

अपराध और शासन की बीट पर काम करते हुए यह स्पष्ट होता है कि बेसहारा व मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों का पुनर्वास न केवल सामाजिक कल्याण है, बल्कि यह आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जटिलताओं को भी कम करता है। जब ऐसे संस्थान निराश्रितों को आश्रय और चिकित्सा देते हैं, तो इससे राज्य में लावारिस मामलों और अज्ञात शव मिलने की घटनाओं में कमी आती है। साथ ही, पुलिस और जिला प्रशासन के लिए गुमशुदा लोगों की तलाश और उनकी अपने परिवारों से घर वापसी की प्रक्रिया बेहद सुगम हो जाती है, जो कि बेहतर शासन प्रणाली का एक अनिवार्य हिस्सा है।

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