ऑनलाइन खर्चों से खाली हो रहा बैंक खाता तो फोन में ऑन करें यह इनबिल्ट फीचर, सामने आ जाएगी पाई-पाई की डिटेललाल सागर तट पर हूथी विद्रोहियों का तेजी से कब्जा, बाब अल-मंदाब पर नियंत्रण से वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकटस्विस नेशनल बैंक के चुडिन ने दूसरी तिमाही में मजबूत जीडीपी वृद्धि दर्ज की, नीतिगत दर शून्य प्रतिशत पर बरकरारत्योहारी सीजन में नई दिल्ली से सुपौल के बीच चलेगी आरक्षित स्पेशल ट्रेन, कुल 118 फेरों की समय सारणी जारीस्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें शून्य पर रखीं, वाइस चेयरमैन ने दी महंगाई बने रहने की चेतावनीस्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें शून्य पर रखीं, वैश्विक मुद्रा बाजार में स्विस फ्रैंक चार महीने के निचले स्तर पर फिसलाफेड के कड़े रुख से चांदी में गिरावट, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड उछलने से दबाव बढ़ाकांजीवरम साड़ी के साथ कैसे चुनें परफेक्ट वी-नेक ब्लाउज, ट्रेडिशनल लुक में मिलेगा एलिगेंट अंदाजफ्रांस के वित्तीय संकट और वैश्विक बॉन्ड बिकवाली से यूरो पर बढ़ा भारी दबाव, डॉलर के मुकाबले गिरावट के आसारबाजार में पीला पपीता देखकर न खाएं धोखा, खरीदारी से पहले जान लें सुरक्षित फल पहचानने के जरूरी नियम
करौली में सांकेतिक भाषा दिवस पर मूकबधिर युवाओं ने उठाई आवाज, प्रशासन को ज्ञापन देकर की आठ प्रमुख मांगेंराजस्थान
24 सित॰ 2026, 7:43 pm (39 मिनट पहले)· 0

करौली में सांकेतिक भाषा दिवस पर मूकबधिर युवाओं ने उठाई आवाज, प्रशासन को ज्ञापन देकर की आठ प्रमुख मांगें

अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026 के अवसर पर करौली में करीब 40 मूकबधिर युवाओं ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और जीवन के हर क्षेत्र में समान अधिकारों की मांग की।

हाथों के इशारों और चेहरे के भावों को माध्यम बनाकर करौली जिले के करीब 40 मूकबधिर युवाओं ने सड़कों पर उतरकर समाज और व्यवस्था को एक स्पष्ट संदेश दिया। अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026 के अवसर पर एकत्रित हुए इन युवाओं की जुबान खामोश थी, लेकिन अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उनके संकल्प बेहद मुखर नजर आए। जिले के अलग अलग इलाकों से आए इन युवाओं का कहना था कि जब इशारों को समझने की संवेदनशीलता समाज में विकसित होगी, तभी वे भी मुख्यधारा में अपनी बात खुलकर रख पाएंगे।

सड़कों पर निकला मूकबधिर युवाओं का शांतिपूर्ण मार्च

इस आयोजन के दौरान युवाओं ने एक अनुशासित और शांतिपूर्ण रैली निकाली। सड़क मार्ग से गुजरते हुए वे केवल अपनी मांगें ही नहीं उठा रहे थे, बल्कि आम नागरिकों को भी भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) सीखने और दिव्यांगजनों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए जागरूक कर रहे थे। राह चलते लोग जब इन युवाओं को हाथों के इशारों से संवाद करते देखते, तो उनकी खामोशी और आंखों की गंभीरता देखकर रुक जाते। हालांकि अधिकांश लोग उनकी सांकेतिक भाषा को तुरंत समझने में असमर्थ थे, फिर भी युवाओं के चेहरे के भाव हर राहगीर को सोचने पर विवश कर रहे थे।

ये भी पढ़ें

प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बयां की दैनिक चुनौतियां

रैली के बाद यह समूह कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा, जहां अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। इस समूह में रवि गुप्ता, राहुल गुर्जर और कालू मीणा सहित कई युवा शामिल थे। प्रशासनिक संवाद को सुगम बनाने के लिए आईएसएल विशेषज्ञ सरिता मीणा और इंटरप्रेटर भावना सोनवाल ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इन दोनों विशेषज्ञों की मदद से युवाओं ने अपनी दैनिक समस्याओं, सरकारी दफ्तरों में होने वाली दिक्कतों और संवाद के अभाव में छूटते अधिकारों की जानकारी दी। करौली एसडीएम राकेश कुमार रावत ने इंटरप्रेटर के जरिए सभी बिंदुओं को सुना और नियम सम्मत समाधान का आश्वासन दिया।

दैनिक जीवन और सरकारी तंत्र से जुड़ी 8 मुख्य मांगें

युवाओं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षा, चिकित्सा, कानून और आजीविका से जुड़ी 8 स्पष्ट मांगें दर्ज की गई थीं। इन मांगों का ब्योरा इस प्रकार है

  • बधिर छात्र छात्राओं को पढ़ाने के लिए आईएसएल में निपुण शिक्षक और सुलभ शिक्षण सामग्री की व्यवस्था की जाए।
  • सामान्य शिक्षकों को सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण दिया जाए अथवा विद्यालयों में योग्य आईएसएल इंटरप्रेटर नियुक्त हों।
  • सरकारी अस्पतालों में सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर रखे जाएं ताकि मरीज डॉक्टरों को बीमारी समझा सकें और उपचार समझ सकें।
  • पुलिस थानों और न्यायिक अदालतों में भी बधिर नागरिकों की सुनवाई के लिए इंटरप्रेटर का अनिवार्य प्रबंध हो।
  • शासकीय कार्यालयों की सार्वजनिक जानकारी और नागरिक सेवाओं की अधिसूचनाएं सांकेतिक भाषा में भी दी जाएं।
  • रोजगार, कौशल प्रशिक्षण, नौकरियों और कार्यस्थल पर पदोन्नति में मूकबधिरों को पूर्ण बराबरी दी जाए।
  • आपातकालीन घोषणाओं और आपदा से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं को भी सांकेतिक माध्यम में सुलभ बनाया जाए।
  • परिवार और समाज बधिरता को अज्ञानता न समझें, बल्कि खुद सांकेतिक भाषा सीखकर आपसी संवाद का दायरा बढ़ाएं।

समान अवसर और सामाजिक स्वीकार्यता का आग्रह

ज्ञापन देने पहुंचे युवाओं का मानना है कि बोलने की क्षमता का न होना किसी भी तरह से प्रतिभा, सपनों या नागरिक अधिकारों की कमी नहीं है। उनकी मुख्य अपेक्षा यह है कि शासन और समाज उनकी सांकेतिक भाषा को मान्यता दे, सार्वजनिक स्थानों पर अनुवादक मौजूद रहें और शिक्षा से लेकर रोजगार तक उन्हें अन्य नागरिकों की तरह समान अवसर प्राप्त हो सकें।

सवाल-जवाब

करौली में मूकबधिर युवाओं ने किस अवसर पर रैली निकाली?
युवाओं ने अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026 के अवसर पर यह शांतिपूर्ण रैली निकाली।
इस प्रदर्शन में लगभग कितने युवाओं ने भाग लिया?
करौली जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 40 मूकबधिर युवाओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
प्रशासन के समक्ष युवाओं का पक्ष किसने रखा?
आईएसएल विशेषज्ञ सरिता मीणा और इंटरप्रेटर भावना सोनवाल ने युवाओं की बात प्रशासन तक पहुंचाई।
प्रशासन की ओर से ज्ञापन किसने स्वीकार किया?
करौली एसडीएम राकेश कुमार रावत ने इंटरप्रेटर के जरिए समस्याएं सुनीं और ज्ञापन स्वीकार किया।
ज्ञापन में शिक्षा क्षेत्र को लेकर क्या मांग रखी गई है?
ज्ञापन में स्कूलों में आईएसएल जानने वाले शिक्षक, सांकेतिक भाषा सामग्री और योग्य इंटरप्रेटर की नियुक्ति की मांग की गई है।
अस्पतालों और पुलिस थानों के संबंध में युवाओं की क्या मांग है?
युवाओं ने अस्पतालों, थानों और अदालतों में संवाद के लिए अनिवार्य रूप से आईएसएल इंटरप्रेटर उपलब्ध कराने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp