राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में गैरकानूनी रूप से धर्म बदलवाने के इरादे से धन का लालच देने, प्रशासनिक पद का प्रलोभन परोसने और इनकार करने पर हिंसक हमला करने का एक संवेदनशील मामला दर्ज किया गया है। जिले के सल्लोपाट थाने में दर्ज हुई इस प्राथमिकी में कुल 16 व्यक्तियों को नामजद आरोपी बनाया गया है। यह कानूनी कार्रवाई कलिंजरा थाना क्षेत्र के माकड़ीचोर गांव में रहने वाले एक स्थानीय व्यक्ति की औपचारिक लिखित शिकायत के आधार पर अमल में लाई गई है। पीड़ित का कहना है कि उस पर ईसाई मत स्वीकार करने के लिए तरह-तरह के अनुचित दबाव बनाए गए और जब उसने इस मांग को ठुकरा दिया, तो आरोपियों ने उसके साथ बर्बरता से मारपीट की। शिकायत के आधार पर पुलिस तंत्र अब पूरे घटनाक्रम की सत्यता तलाशने के लिए कानूनी जांच में जुट गया है।
प्रशासनिक पद और मासिक भत्ते की पेशकश का आरोप
पुलिस को सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट में शिकायतकर्ता ने बेहद चौंकाने वाले प्रलोभनों का खुलासा किया है। पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने उसे ईसाई धर्म स्वीकार करने के बदले एकमुश्त 1 लाख रुपए देने और इसके साथ ही हर महीने 25 हजार रुपए नियमित भत्ता उपलब्ध कराने का खुला आश्वासन दिया था। इतना ही नहीं, उसे राजस्थान लोक सेवा आयोग यानी RPSC के माध्यम से आयोजित होने वाली राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा में सीधे चयन कराने का झांसा भी दिया गया। इसके अलावा एक चार पहिया वाहन उपलब्ध कराने और अन्य भौतिक सुविधाएं मुहैया कराने के दावे भी किए गए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने उस पर धार्मिक परिवर्तन के लिए निरंतर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दबाव बनाया। आरोप पत्र में यह भी दावा किया गया है कि उसे बपतिस्मा संस्कार करवाकर जबरन ईसाई धर्म की दीक्षा दिलाने की गंभीर कोशिश की गई थी।
इनकार करने पर लाठियों से हमला और अपमानजनक टिप्पणियां
शिकायतकर्ता ने पुलिस के समक्ष स्पष्ट किया कि जब उसने बपतिस्मा लेने और ईसाई धर्म में शामिल होने के तमाम प्रस्तावों को पूरी दृढ़ता से अस्वीकार कर दिया, तो आरोपी हिंसक रुख पर उतर आए। पीड़ित के अनुसार, मना करने से नाराज होकर आरोपियों ने उसे लात-घूंसों से पीटा और लट्ठ से बेरहमी से हमला किया। इस शारीरिक हिंसा के दौरान आरोपियों पर पीड़ित को निशाना बनाकर जातिसूचक गालियां देने और अपमानित करने का गंभीर आरोप भी लगा है। इसके अलावा, दर्ज कराई गई रिपोर्ट में यह बात भी रेखांकित की गई है कि आरोपियों ने बातचीत और विवाद के दौरान हिंदू देवी-देवताओं पर बेहद अमर्यादित व अपमानजनक टिप्पणियां कीं। सल्लोपाट थाना पुलिस ने शिकायत में दर्ज मारपीट, जातिगत अपमान और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इन तमाम आरोपों को आधार बनाकर प्राथमिक मुकदमा दर्ज कर लिया है।
22 सितंबर के आयोजन और कथित विशाल नेटवर्क का उल्लेख
दर्ज प्राथमिकी में 22 सितंबर की तारीख को शिवपुरा नामक स्थान पर आयोजित हुए एक सामूहिक कार्यक्रम का भी प्रमुखता से जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस सभा में करीब 100 से 150 लोग एकत्रित हुए थे। इस पूरे घटनाक्रम में बलवंत नामक व्यक्ति का नाम सामने आया है, जिसके रिहायशी परिसर में कथित तौर पर चर्च की गतिविधियां संचालित होने का दावा किया गया है। शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि इस इलाके में एक बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है, जो अब तक करीब 10 हजार लोगों का धर्मांतरण करा चुका होने का दावा करता है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये सभी बिंदु फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप हैं और निष्पक्ष पड़ताल के बाद ही इनकी जमीनी हकीकत सामने आ पाएगी।
पुलिस अधिकारियों की निगरानी में विस्तृत कानूनी पड़ताल
सल्लोपाट थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 16 नामजद आरोपियों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर लिया है। पुलिस प्रशासन अब शिकायत में लगाए गए प्रत्येक आरोप की कड़ाई से जांच कर रहा है। मामले से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों, स्थानीय ग्रामीणों और नामजद लोगों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। एडिशनल एसपी नरपत सिंह ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि शिकायत प्राप्त होते ही पुलिस ने विधिवत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और मामले की विस्तृत तफ्तीश जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गहन जांच पूरी होने के उपरांत ही धर्म परिवर्तन के कथित दबाव, मौद्रिक प्रलोभन, प्रशासनिक सेवा में चयन के झांसे और शारीरिक हमले के दावों का वास्तविक सच सार्वजनिक हो सकेगा।



















