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भारतीय रेलवे का बड़ा कदम, 20 हजार स्थानों पर लगेगा 'टैंक टू टैप' फिल्ट्रेशन सिस्टमभारत
17 अग॰ 2026, 3:20 am (45 दिन पहले)· 3

भारतीय रेलवे का बड़ा कदम, 20 हजार स्थानों पर लगेगा 'टैंक टू टैप' फिल्ट्रेशन सिस्टम

सीएजी की रिपोर्ट में पेयजल संबंधी कमियां सामने आने के बाद भारतीय रेलवे 20 हजार स्थानों पर 'टैंक टू टैप' फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पानी की गुणवत्ता सुधारने और दोहरे स्तर पर जांच के निर्देश दिए गए हैं।

भारतीय रेलवे ने देश भर के रेल यात्रियों को साफ और सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक व्यापक योजना तैयार की है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हालिया रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले पेयजल की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर कई गंभीर कमियां उजागर की गई थीं। इस ऑडिट रिपोर्ट का कड़ा संज्ञान लेते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मामले की कमान खुद संभाली और समस्या के स्थायी समाधान के लिए कदम उठाए। रेल मंत्री ने रेलवे बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों और वरिष्ठ प्रबंधकों के साथ पूरे दिन समीक्षा बैठक की, जिसमें पूरे रेल नेटवर्क में पानी की शुद्धता और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए 'टैंक टू टैप' वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम लागू करने का बड़ा निर्णय लिया गया।

20 हजार स्थानों पर शुरू होगा फिल्ट्रेशन सिस्टम

ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई खामियों को दूर करने के लिए रेलवे प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से काम करने की रूपरेखा बनाई है। योजना के पहले चरण के तहत देश भर के रेलवे स्टेशनों पर स्थित वॉटर कूलर, नल और मुख्य आपूर्ति बिंदुओं समेत करीब 20 हजार स्थानों पर आधुनिक फिल्ट्रेशन उपकरण और निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी। इस शुरुआती चरण के पूरा होने के बाद, योजना का विस्तार देश के सभी छोटे-बड़े रेलवे स्टेशनों पर किया जाएगा। इस पूरी पहल का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि स्टेशन पर आने वाले किसी भी यात्री को नल का पानी पीते समय बीमारी या गंदगी का कोई डर न रहे और उन्हें नल तक पहुंचने से पहले पूरी तरह शुद्ध पानी मिले।

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खराब टैंकों को बदलने और सफाई का सख्त निर्देश

पेयजल की गुणवत्ता सुधारने के लिए सिर्फ पानी को साफ करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके भंडारण ढांचे को दुरुस्त करना भी बेहद जरूरी है। समीक्षा बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि कई स्थानों पर पुराने और क्षतिग्रस्त वाटर टैंक पानी के दूषित होने का मुख्य कारण थे। इसे ध्यान में रखते हुए रेलवे ने सभी पुराने और खस्ताहाल स्टोरेज टैंकों को तत्काल नए टैंकों से बदलने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, पानी की टंकियों की समय-समय पर सफाई और तकनीकी मेंटेनेंस को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत टंकियों की सफाई का निश्चित समय तय होगा, ताकि पानी में किसी भी तरह की गंदगी, गाद या जीवाणु न पनप सकें।

दोहरे स्तर पर होगी जांच और केंद्रीय स्तर पर निगरानी

पानी की शुद्धता बनाए रखने के लिए एक विशेष दोहरी जांच प्रणाली विकसित की गई है। इसके अंतर्गत जल स्रोत के स्तर पर और नल तक पहुंचने के बाद, यानी दोनों ही चरणों में पानी के नमूनों की नियमित जांच की जाएगी। इस दोहरे परीक्षण से अधिकारियों को यह सटीक जानकारी मिल सकेगी कि पानी की गुणवत्ता किस स्तर पर खराब हो रही है, क्या समस्या मुख्य आपूर्ति से है या फिर स्टेशन के भीतर की पाइपलाइन में कोई खराबी है। इस पूरे अभियान पर ढिलाई रोकने के लिए रेलवे बोर्ड केंद्रीय स्तर से सीधे नजर रखेगा। अलग-अलग मंडलों से पानी की जांच, फिल्ट्रेशन सिस्टम के काम करने की स्थिति और टैंकों की सफाई से जुड़ा डेटा सीधे केंद्रीय बोर्ड तक पहुंचेगा।

रिपोर्ट होगी सार्वजनिक, तय की जाएगी अधिकारियों की जवाबदेही

व्यवस्था को पारदर्शी और असरदार बनाने के लिए रेलवे प्रशासन ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का कड़ा फैसला किया है। यदि किसी भी क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, यात्रियों के बीच भरोसा कायम करने के लिए रेलवे समय-समय पर पानी की गुणवत्ता और जांच से जुड़ी रिपोर्ट को सार्वजनिक भी करेगा। सार्वजनिक रिपोर्ट के माध्यम से आम रेल यात्री यह जान सकेंगे कि अपने स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और वहां उपलब्ध पानी कितना सुरक्षित है।

सवाल-जवाब

भारतीय रेलवे 'टैंक टू टैप' फिल्ट्रेशन सिस्टम क्यों लगा रही है?
सीएजी की रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों के पानी में खामियां उजागर होने के बाद यात्रियों को साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
शुरुआती चरण में कितने स्थानों पर यह फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाया जाएगा?
पहले चरण में रेलवे स्टेशनों के वॉटर कूलर और नलों समेत करीब 20,000 स्थानों पर यह सिस्टम लगाया जाएगा।
नई योजना के तहत पानी की गुणवत्ता की जांच कैसे की जाएगी?
पानी की शुद्धता जांचने के लिए जल स्रोत और नल दोनों स्तरों पर नियमित नमूने लेकर परीक्षण किया जाएगा।
पुराने और खराब पानी के टैंकों को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
खराब हो चुके स्टोरेज टैंकों को नए टैंकों से बदला जाएगा और सभी टंकियों की समय पर नियमित सफाई व रखरखाव को अनिवार्य किया जाएगा।
क्या पानी की गुणवत्ता से जुड़ी रिपोर्ट आम यात्रियों के साथ साझा की जाएगी?
हां, रेलवे समय-समय पर पानी की गुणवत्ता और सुधार से जुड़ी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा ताकि यात्री व्यवस्था की जानकारी ले सकें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·44 दिन पहले

सीएजी ऑडिट के बाद रेलवे का यह कदम जनस्वास्थ्य और विधिक जवाबदेही के लिहाज से एक अनिवार्य सुधारात्मक कार्रवाई है। सार्वजनिक स्थलों पर दूषित जलापूर्ति भारतीय दंड संहिता और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत गंभीर लापरवाही के दायरे में आती है। यदि दोहरे स्तर की यह जांच प्रणाली और केंद्रीय निगरानी सख्ती से लागू नहीं हुई, तो प्रशासनिक अधिकारियों पर कानूनी अनुपालन और उत्तरदायित्व का संकट खड़ा हो सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·44 दिन पहले

सीएजी रिपोर्ट के बाद उठाया गया यह कदम केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि शासन प्रणाली में लोक उत्तरदायित्व और नीतिगत पारदर्शिता की कसौटी है। दोहरे स्तर की जांच और टैंक-टू-टैप फिल्ट्रेशन जैसी तकनीकी प्रणालियों के प्रभावी क्रियान्वयन से यह तय होगा कि बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में जनता के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखा जाए।

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