नेपाल के विभिन्न हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 16 लोगों की जान चली गई है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच 100 से अधिक भारतीय नागरिकों के भी लापता होने की सूचना है, जिससे चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। नेपाल से सटे भारतीय राज्यों में संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हालात पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। वहीं, केंद्र सरकार भी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सीमावर्ती इलाकों में राहत व बचाव के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में चौकसी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाल में आई इस भीषण जलप्रलय पर गहरी संवेदना जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी के उफान पर आने से व्यापक क्षति हुई है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। मुख्यमंत्री ने भगवान पशुपतिनाथ से आपदा से प्रभावित सभी लोगों की सुरक्षा की प्रार्थना की।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में प्रशासनिक तैयारी तेज कर दी है। उन्होंने जनपद महाराजगंज और कुशीनगर के स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। नेपाल में लगातार हो रही बारिश और नदियों के उफान के कारण गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाढ़ की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी की जाएं और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
केंद्र सरकार ने बिहार को दिया हर संभव मदद का भरोसा
नेपाल में बिगड़े हालात और सीमावर्ती इलाकों पर मंडराते बाढ़ के खतरे के बीच केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से दूरभाष पर बात कर स्थिति का जायजा लिया। इस बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने राज्य में उत्पन्न होने वाले किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए बिहार सरकार को केंद्र की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का पूर्ण आश्वासन दिया है।
बिहार के कई जिले नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से सीधे प्रभावित होते हैं। नेपाल की नदियों में जलस्तर बढ़ने से बिहार के निचले इलाकों में जलभराव और तबाही की आशंका बढ़ जाती है। इसी के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच निरंतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।
रसुवा और नुवाकोट में तबाही का मंजर
नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे और स्याफ्रूबेंसी इलाके इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के तेज बहाव में लोगों के मकान, स्थानीय बाजार, सड़कें और पुल पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। कई स्थानों पर संपर्क मार्ग टूट जाने से आवाजाही ठप हो गई है और बिजली आपूर्ति भी पूरी तरह बाधित हो चुकी है। बुनियादी ढांचे को पहुंचे इस भारी नुकसान के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उधर, नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार के आसपास भी हालात अत्यंत विकराल बने हुए हैं। वहां बाढ़ के पानी में लगभग 60 मकान बह गए हैं। इसके अलावा दो प्रमुख मोटरेबल पुल भी पानी के तेज प्रवाह में बह गए, जिससे कई बस्तियों का संपर्क टूट गया है। अधिकारियों के अनुसार, नुवाकोट में त्रिशूली नदी के किनारे से तीन शव बरामद किए जा चुके हैं, जिससे मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
बिजली परियोजनाओं को नुकसान और लापता कर्मचारी
जलप्रलय का असर नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र पर भी भारी पड़ा है। नुवाकोट स्थित त्रिशूली और देविघाट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को बाढ़ से गंभीर क्षति पहुंची है। इसके अतिरिक्त, 25 मेगावाट क्षमता वाले सोलर प्लांट के तीन ब्लॉक और उससे जुड़ा एक सब-स्टेशन भी जलधारा में पूरी तरह बह गया है। इससे क्षेत्र में बिजली की गंभीर किल्लत पैदा हो गई है।
मानवीय क्षति के साथ-साथ कई लोग अभी भी लापता हैं। रसुवा स्थित कस्टम्स ऑफिस के 14 कर्मचारी आपदा के बाद से लगातार संपर्क से बाहर बने हुए हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में तैनात बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। सुरक्षा और प्रशासनिक अमला लापता लोगों की तलाश और प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के काम में जुटा हुआ है।



















