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श्रीगंगानगर में मानसून की खामोशी से 41.4 डिग्री पहुंचा पारा, बिजली की खपत बढ़ी और ग्रिड पर दबावराजस्थान
26 अग॰ 2026, 7:18 pm (1 घंटे पहले)· 4

श्रीगंगानगर में मानसून की खामोशी से 41.4 डिग्री पहुंचा पारा, बिजली की खपत बढ़ी और ग्रिड पर दबाव

राजस्थान के श्रीगंगानगर में मानसून की सुस्ती के कारण पारा 41.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। भीषण उमस और लगातार बढ़ रही बिजली की मांग से ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है, जिससे लोग परेशान हैं।

राजस्थान के रेगिस्तानी और अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे श्रीगंगानगर जिले में मौसम के कड़े और तीखे तेवर एक बार फिर आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। मानसून के लंबे समय से पूरी तरह सुस्त रहने के कारण इस सीमावर्ती क्षेत्र में भीषण गर्मी और चिपचिपाहट भरी उमस का दौर लगातार जारी है। कई हफ्तों से बारिश की एक बूंद न गिरने की वजह से रोजाना का सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो चुका है, जहां लोगों को दिन के समय चिलचिलाती धूप का सामना करना पड़ रहा है और शाम ढलने के बाद भी गर्मी से कोई राहत नहीं मिल पा रही है।

सितंबर के महीने में 41.4 डिग्री तक पहुंचा पारा

मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मानसूनी गतिविधियों के पूरी तरह शांत पड़ने का सीधा और प्रतिकूल असर क्षेत्र के तापमान पर दिखाई दे रहा है। गुरुवार के दिन श्रीगंगानगर में अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि उस दिन पूरे राजस्थान राज्य में सबसे अधिक रहा। आमतौर पर सितंबर के महीने में इस तरह के झुलसा देने वाले तापमान और प्रचंड गर्मी का प्रकोप देखने को नहीं मिलता, इसलिए यह स्थिति स्थानीय निवासियों के लिए बेहद अप्रत्याशित और कष्टदायी बनी हुई है। दोपहर के समय आसमान से बरसती सूरज की तेज किरणें और लू के थपेड़ों जैसी अहसास कराने वाली गर्म हवाओं ने लोगों का घरों व दफ्तरों से बाहर निकलना अत्यंत कठिन कर दिया है।

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रात के समय भी 30 डिग्री के आसपास बना हुआ है न्यूनतम तापमान

केवल दिन की तपन ही नहीं, बल्कि रातों के समय भी मौसम में किसी प्रकार की ठंडक या राहत नहीं मिल रही है। जिले में न्यूनतम तापमान यानी रात का पारा लगातार करीब 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही बना हुआ है। देर रात तक बने रहने वाले इस उच्च तापमान और हवा में मौजूद भारी नमी के कारण लोग लगातार पसीने से तरबतर हो रहे हैं। सामान्य दिनों में राहत देने वाले पंखे और कूलर भी इस उमस भरी गर्मी के आगे पूरी तरह बेअसर साबित हो रहे हैं। रात भर हवा में घुली चिपचिपाहट के कारण छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की नींद टूट रही है और लोग सुकून भरी नींद के लिए तरसते दिखाई दे रहे हैं।

विद्युत खपत में भारी उछाल और ट्रांसफार्मर पर बढ़ा लोड

तापमान में हो रही इस लगातार बढ़ोतरी और असहनीय उमस के चलते जिले भर में बिजली की खपत में अचानक बहुत बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। गर्मी और पसीने से बचने के लिए लोग अपने घरों, दुकानों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर, डेजर्ट कूलर और पंखों का इस्तेमाल चौबीसों घंटे बिना रुके कर रहे हैं। इस अनवरत इस्तेमाल की वजह से स्थानीय पावर ग्रिड और विभिन्न इलाकों में लगे ट्रांसफार्मर पर क्षमता से अधिक लोड बढ़ गया है। इस अतिरिक्त दबाव के परिणामस्वरूप श्रीगंगानगर के कई रिहायशी इलाकों और आसपास के क्षेत्रों से बार-बार बिजली कटौती होने तथा कम वोल्टेज मिलने की शिकायतें प्रमुखता से सामने आ रही हैं, जिससे नागरिकों की दैनिक जीवन की समस्याएं और ज्यादा विकराल हो गई हैं।

मौसम विशेषज्ञों की चेतावनी और राहत के आसार

मौसम विज्ञान के विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में मानसूनी प्रणालियों की सक्रियता फिलहाल बेहद कमजोर स्थिति में बनी हुई है। इसी वजह से श्रीगंगानगर और उससे सटे अन्य सीमावर्ती इलाकों में निकट भविष्य में किसी भी प्रकार की अच्छी बारिश होने की बहुत कम संभावना है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि जब तक कोई नया शक्तिशाली मौसमी सिस्टम या पश्चिमी विक्षोभ इस क्षेत्र में सक्रिय नहीं होता, तब तक लोगों को इस झुलसाने वाली उमस और गर्मी से कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से लोगों को दिन भर में प्रचुर मात्रा में शुद्ध पानी पीने, तरल पदार्थों का नियमित सेवन करने और दोपहर की सीधी धूप के संपर्क से यथासंभव दूर रहने की हिदायत दी गई है।

सवाल-जवाब

श्रीगंगानगर में गुरुवार को अधिकतम तापमान कितना दर्ज किया गया?
श्रीगंगानगर में गुरुवार को अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पूरे राजस्थान में सबसे अधिक था।
रात के समय तापमान की क्या स्थिति बनी हुई है?
रात का न्यूनतम तापमान लगातार करीब 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे भारी उमस के कारण लोगों की नींद प्रभावित हो रही है।
गर्मी और उमस का बिजली आपूर्ति पर क्या असर पड़ा है?
एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों के लगातार चलने से बिजली की मांग बहुत बढ़ गई है, जिससे ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ा है और बिजली कटौती की शिकायतें आ रही हैं।
मौसम विभाग के अनुसार बारिश और राहत के क्या आसार हैं?
मानसून कमजोर रहने की वजह से फिलहाल बारिश की संभावना कम है, और कोई नया मौसमी सिस्टम या पश्चिमी विक्षोभ आने पर ही राहत मिल सकती है।
इस मौसम में स्वास्थ्य के लिए क्या सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है?
विशेषज्ञों ने लोगों को प्रचुर मात्रा में पानी पीने, तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाने और दोपहर की सीधी धूप से बचने की सलाह दी है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

रोहन वर्मा की पेशेवर टिप्पणी: श्रीगंगानगर में सितंबर के महीने में तापमान का 41.4 डिग्री तक पहुंचना और बिजली के बुनियादी ढांचे पर पड़ रहा भारी दबाव यह दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर चरम मौसम से निपटने की तैयारियों में कमी है। मानसून की इस लंबी खामोशी से उपजी उमस और लगातार बढ़ रही बिजली की मांग आने वाले दिनों में शहरी और ग्रामीण वितरण प्रणालियों के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है, जिससे समय रहते लोड मैनेजमेंट और ग्रिड सुदृढ़ीकरण की सख्त आवश्यकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस स्थिति में सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी गंभीर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। अत्यधिक गर्मी और बिजली संकट के कारण ग्रिड फेल होने की स्थिति में अराजकता, जलापूर्ति बाधित होने से सार्वजनिक असंतोष और ट्रांसफार्मर ओवरलोडिंग से शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियों को इस संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए अभी से आपदा प्रबंधन और त्वरित प्रतिक्रिया दल को सक्रिय कर देना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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