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भूपेश बघेल और विजय शर्मा के बीच रायपुर में आर-पार की बहस, पूर्व मुख्यमंत्री ने मानी चुनाव हारने की वजहछत्तीसगढ़
15 सित॰ 2026, 7:54 pm (9 दिन पहले)· 0

भूपेश बघेल और विजय शर्मा के बीच रायपुर में आर-पार की बहस, पूर्व मुख्यमंत्री ने मानी चुनाव हारने की वजह

रायपुर प्रेस क्लब में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर करीब एक घंटे बीस मिनट तक तीखी बहस हुई। इस आमने-सामने की चर्चा के दौरान दोनों नेताओं ने अपने-अपने कार्यकाल के आंकड़े पेश किए और एक-दूसरे के दावों को नकारा।

छत्तीसगढ़ की सियासत में मंगलवार को एक अनूठा और गरमागरम वाकया सामने आया, जब रायपुर प्रेस क्लब के मंच पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा आमने-सामने आ गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के मुद्दे पर छिड़ी इस सीधी बहस के लिए उपमुख्यमंत्री की तरफ से दी गई सार्वजनिक चुनौती को स्वीकार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री खुद प्रेस क्लब पहुंचे थे। करीब 1 घंटे 20 मिनट तक चली इस सियासी भिड़ंत में दोनों नेताओं के बीच तीखे आंकड़ों, दावों और प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिसने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को काफी बढ़ा दिया।

प्रेस क्लब के बाहर भारी हंगामा और कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

इस हाई-प्रोफाइल डिबेट को लेकर रायपुर प्रेस क्लब के बाहर सुबह से ही गहमागहमी और तनाव का माहौल बना हुआ था। आयोजन स्थल के बाहर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता और भारी संख्या में कार्यकर्ता जुट गए थे। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस प्रशासन ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रेस क्लब परिसर के अंदर जाने से रोका, जिसके बाद पुलिसकर्मियों के साथ उनकी तीखी बहस हुई। इसके अलावा, दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर नारेबाजी हुई और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी।

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उपमुख्यमंत्री ने रखे अपने कार्यकाल के आंकड़े

डिबेट की शुरुआत करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सरकारी आंकड़ों का पिटारा खोला और दावा किया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान देश में सबसे अधिक पीएम आवास बनाकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में कुल 17.75 लाख मकानों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। विजय शर्मा ने आगे कहा कि मौजूदा भारतीय जनता पार्टी सरकार ने अपने ढाई साल के कार्यकाल के भीतर इस योजना पर 16000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके विपरीत, उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके पांच साल के शासनकाल में मात्र 3900 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति मिल पाई थी और महज 3 लाख आवास ही पूरे हो सके थे। उनके मुताबिक, सिर्फ प्रधानमंत्री का नाम जुड़ा होने की वजह से पिछली सरकार ने गरीबों के मकानों के इस लक्ष्य और आधिकारिक पोर्टल को स्वीकार करने से परहेज किया था।

पूर्व मुख्यमंत्री का पलटवार और आंकड़ों की जादूगरी का आरोप

दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार के तमाम दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज आंकड़ों की जादूगरी करार दिया। बघेल ने तर्क दिया कि कोरोना महामारी के कठिन दौर में केंद्र सरकार ने राज्यों का वैध फंड रोक रखा था और उस दौरान केंद्रीय पोर्टल भी बंद कर दिए गए थे। इन तमाम अड़चनों के बावजूद, कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान 6 लाख से अधिक मकानों की आधिकारिक मंजूरी दी थी और लाखों की संख्या में आवासों का निर्माण पूरा करवाया था। उन्होंने मौजूदा सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा 46 लाख से अधिक आवास स्वीकृत करने का जो दावा कर रही है, उतने तो पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में मकान ही मौजूद नहीं हैं।

वित्तीय साझेदारी और हार की बात स्वीकार

योजना के वित्तपोषण पर बात करते हुए भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि अतीत में इंदिरा आवास योजना के तहत केंद्र सरकार शत-प्रतिशत राशि मुहैया कराती थी, लेकिन अब प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं में 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र का और 40 प्रतिशत राज्य सरकार का होता है, जिससे राज्यों के वित्तीय बजट पर भारी दबाव पड़ता है। चर्चा के दौरान एक बड़ा मोड़ तब आया जब भूपेश बघेल ने स्वीकार किया कि हमने पीएम आवास नहीं बनाए और इसी वजह से जनता ने हमें चुनावों में हार की सजा दी। बहस के दौरान दोनों ही दिग्गजों ने एक-दूसरे के आंकड़ों को गलत बताया। विजय शर्मा ने इस तरह की खुली चर्चा को जनता के सामने पारदर्शिता लाने की एक स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा बताया, वहीं भूपेश बघेल ने दोहराया कि यदि कांग्रेस के शासनकाल में कोई कमी रह गई थी, तो जनता ने विधानसभा चुनाव में मतों के जरिए उन्हें उसका स्पष्ट जवाब दे दिया है।

सवाल-जवाब

भूपेश बघेल और विजय शर्मा के बीच यह बहस कहां हुई?
यह बहस रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित की गई थी।
यह बहस कितने समय तक चली?
यह सीधी चर्चा लगभग 1 घंटे 20 मिनट तक चली।
विजय शर्मा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए क्या दावा किया?
विजय शर्मा ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ ने इस दौरान देश में सबसे अधिक पीएम आवास बनाकर रिकॉर्ड बनाया है।
भूपेश बघेल ने आवास योजनाओं की फंडिंग को लेकर क्या स्पष्ट किया?
उन्होंने बताया कि मौजूदा पीएम आवास योजना में 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र का और 40 प्रतिशत राज्य का होता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनाव हारने का क्या कारण बताया?
भूपेश बघेल ने स्वीकार किया कि उन्होंने पीएम आवास नहीं बनाए और इसी वजह से जनता ने उन्हें सजा दी।
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टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·9 दिन पहले

यह राजनीतिक टकराव भले ही आवास योजना के आंकड़ों पर केंद्रित रहा हो, लेकिन इसका असर सीधे तौर पर नीतिगत प्राथमिकताओं और जनता के विश्वास पर पड़ता है। ऐसे उच्च-स्तरीय सार्वजनिक संवाद यदि रचनात्मक बहस की बजाय केवल दावों और प्रतिदावों तक सीमित रहें, तो नीतिगत सुधार और ज़मीनी हकीकत पर से ध्यान भटक जाता है। आगामी शैक्षणिक और विकासात्मक सत्रों में युवाओं और छात्रों के बीच भी इस तरह की बयानबाज़ी का असर राजनीतिक ध्रुवीकरण के रूप में देखने को मिल सकता है, जो नीति निर्माण की पारदर्शिता को प्रभावित करता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

भूपेश बघेल और विजय शर्मा के बीच रायपुर में हुई यह सीधी बहस छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नए और आक्रामक दौर की शुरुआत का संकेत है। प्रेस क्लब के मंच पर आवास योजना के आंकड़ों को लेकर हुआ यह टकराव महज एक वैचारिक मतभेद नहीं, बल्कि आगामी स्थानीय और राजनीतिक समीकरणों को साधने की रणनीति है। जिस तरह से दोनों पक्षों के कार्यकर्ता सड़क पर आमने-आसामे आए और पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी, उससे साफ है कि आने वाले समय में आवास योजना और वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दे राज्य की सियासत के केंद्र में बने रहेंगे और ध्रुवीकरण को और तीव्र करेंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

वरिष्ठ पत्रकार के रूप में मेरा मानना है कि यह बहस केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर राज्य की वित्तीय साख और कॉरपोरेट-स्टार्टअप निवेश माहौल पर पड़ेगा। जब केंद्र और राज्य के बीच कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन को लेकर इस तरह का टकराव सार्वजनिक मंचों पर होता है, तो निवेशकों का भरोसा डगमगाता है। छत्तीसगढ़ जैसे संसाधन-समृद्ध राज्य में बुनियादी ढांचे और आवास योजनाओं के आंकड़ों पर यह रस्साकशी दिखाती है कि आने वाले दिनों में नीतिगत स्थिरता और आर्थिक आंकड़ों की पारदर्शिता पर तीखी बहस जारी रहेगी, जो अंततः व्यावसायिक धारणा को प्रभावित कर सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

रायपुर प्रेस क्लब में दो शीर्ष नेताओं का यह आमना-सामना महज वैचारिक मतभेद नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक संघर्ष की दिशा तय करने वाला कदम है। इस तीखी बहस और बाहर हुए भारी हंगामे ने यह साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे मुद्दों पर जनता के बीच टकराव और बढ़ेगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से पुलिस और स्थानीय प्रशासन को आने वाले दिनों में और अधिक सतर्क रहना होगा, क्योंकि दोनों दलों के कार्यकर्ताओं का आक्रामक रुख ज़मीनी स्तर पर तनाव को और गहरा सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

सहकर्मी के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, मेरा मानना है कि रायपुर प्रेस क्लब की यह खुली बहस छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नए और आक्रामक दौर की शुरुआत है। जब राज्य के दो शीर्ष नेता मंच पर सीधे आंकड़े और आरोप-प्रत्यारोप लेकर उतरते हैं, तो इसका सीधा असर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं पर पड़ता है। प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर यह सियासी रस्साकशी आने वाले स्थानीय निकायों और चुनावों में मुख्य मुद्दा बनेगी। ज़मीनी स्तर पर दोनों दलों के बीच बढ़ती यह तल्खी प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है, जिससे निपटने के लिए पुलिस को अपनी खुफिया और सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करना होगा।

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