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दीदी ई-रिक्शा योजना से आत्मनिर्भर बनीं गंगा साहू, रोजमर्रा की कमाई से परिवार को दिया सहाराछत्तीसगढ़
24 सित॰ 2026, 2:59 pm (2 घंटे पहले)· 0

दीदी ई-रिक्शा योजना से आत्मनिर्भर बनीं गंगा साहू, रोजमर्रा की कमाई से परिवार को दिया सहारा

छत्तीसगढ़ श्रम विभाग की दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना ने गृहिणी गंगा साहू को स्वरोजगार का मौका देकर आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे रोजाना कमाई कर परिवार को आर्थिक संबल दे रही हैं।

घर की चारदीवारी और बच्चों की परवरिश तक सीमित रहने वाली गंगा साहू ने अपनी जिंदगी की नई राह चुनकर मिसाल पेश की है। आज वे आत्मनिर्भर होकर अपने पूरे परिवार के आर्थिक बोझ को साझा कर रही हैं। इस बड़े बदलाव की शुरुआत छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग की 'दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना' से हुई, जिसने उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का ठोस आधार दिया। योजना की मदद से मिले ई-रिक्शा ने उन्हें सीधे स्वरोजगार से जोड़ दिया है, जिससे वे रोजाना सम्मानजनक कमाई कर रही हैं। यह पहल उनके लिए केवल आय का स्रोत ही नहीं बनी, बल्कि इसने उनके भीतर आत्मविश्वास और स्वावलंबन का नया संचार भी किया है।

घरेलू कामकाज से लेकर स्वरोजगार तक का सफर

इस सरकारी योजना का लाभ उठाने से पहले गंगा साहू का पूरा जीवन एक सामान्य गृहिणी जैसा था। उनका ज्यादातर वक्त घर के कामकाज संभालने और बच्चों की देखरेख करने में ही बीत जाया करता था। परिवार की कई जिम्मेदारियों के बावजूद उनके पास खुद का कोई स्वतंत्र रोजगार या आय का साधन मौजूद नहीं था। आर्थिक जरूरतों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर रहने की इस स्थिति के बीच ई-रिक्शा सहायता योजना उनके सामने एक नई उम्मीद बनकर आई। श्रम विभाग के माध्यम से ई-रिक्शा की सुविधा मिलते ही उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के वाहन संचालन को अपनी आजीविका का मुख्य साधन बना लिया।

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रोजाना की कमाई से परिवार को मिला आर्थिक संबल

ई-रिक्शा की चाबी हाथ में आने के बाद गंगा साहू ने नियमित रूप से सड़कों पर वाहन चलाना शुरू किया। उनकी यह रोजाना की मेहनत अब एक स्थिर आमदनी में बदल चुकी है। इस नियमित कमाई के दम पर वे न सिर्फ अपनी व्यक्तिगत जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि घर के रोजमर्रा के बजट में भी अहम योगदान दे रही हैं। गंगा साहू का कहना है कि पहले उनकी दुनिया केवल घर की चारदीवारी तक सिमटी हुई थी, लेकिन सहायता मिलने के बाद उन्हें खुद का काम करने का हौसला मिला। अपनी कमाई हाथ में आने से उनका आत्मसम्मान बढ़ा है और अब वे परिवार के भरण-पोषण में पति तथा अन्य परिजनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।

महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन का संदेश

गंगा साहू के जरिए सामने आया यह बदलाव बताता है कि जब महिलाओं को सीधे संसाधन और आजीविका के साधन मिलते हैं, तो वे पूरे परिवार का सहारा बन जाती हैं। 'दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना' का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि महिलाओं को स्वरोजगार के सीधे अवसर दिए जाएं ताकि वे आर्थिक रूप से सक्षम बन सकें। ई-रिक्शा से होने वाली कमाई ने उनके घर की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है। गंगा साहू का मानना है कि इस योजना ने उन्हें केवल एक वाहन नहीं सौंपा, बल्कि खुद के दम पर आगे बढ़ने और सम्मान से जीने का रास्ता दिखाया है।

सवाल-जवाब

गंगा साहू को किस सरकारी योजना का लाभ मिला है?
उन्हें छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग द्वारा संचालित 'दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना' का लाभ मिला है।
योजना का लाभ मिलने से पहले गंगा साहू क्या करती थीं?
वे एक गृहिणी थीं और अपना अधिकांश समय घर-गृहस्थी के कामकाज तथा बच्चों की देखभाल में बिताती थीं।
दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है।
ई-रिक्शा मिलने के बाद गंगा साहू के जीवन में क्या बदलाव आया?
उन्हें नियमित स्वरोजगार मिला, जिससे वे रोजमर्रा की कमाई कर अपने परिवार के खर्चों में हाथ बंटा रही हैं और उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·59 मिनट पहले

गंगा जी की मेहनत की दाद देनी पड़ेगी, घर से निकलकर ई-रिक्शा चलाना आसान नहीं है। पर योजनाओं के सहारे कितनी महिलाओं को वाकई स्थायी आय मिलती है, यह जमीनी हकीकत देखकर ही पक्का कहा जा सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·58 मिनट पहले

रविकेश भाई, आपकी बात सही है कि ई-रिक्शा चलाना आसान नहीं, पर गंगा साहू का रोजकमाई करना भी कम बड़ी बात नहीं है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

बात तो अच्छी है, पर सिर्फ एक ई-रिक्शा मिलने से क्या सारे आर्थिक संकट सच में दूर हो जाते हैं?

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, संकट तो सारे एक बार में नहीं मिटते, पर जब हाथ में रोज़ की कमाई आने लगे तो हिम्मत ज़रूर बंध जाती है।

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