छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सेवारत एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी वित्तीय राहत का ऐलान किया है. राज्य के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टरों को अब प्रत्येक महीने 25000 रुपये का मानदेय यानी स्टाइपेंड दिया जाएगा. काफी समय से अपनी वित्तीय मांगों को लेकर आवाज उठा रहे इन प्रशिक्षु चिकित्सकों की मांग को स्वीकार करते हुए शासन स्तर पर औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है.
वित्त विभाग की हरी झंडी और क्रियान्वयन की तारीख
इस फैसले को लागू करने के लिए वित्त विभाग ने भी अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है. राज्य प्रशासन के निर्देश के अनुसार यह नई दर 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी मानी जाएगी. इसका सीधा अर्थ है कि अगले महीने की शुरुआत से ही सभी पात्र प्रशिक्षु चिकित्सकों को इस बढ़ी हुई दर के हिसाब से भुगतान मिलने लगेगा. अस्पतालों में चौबीसों घंटे सक्रिय रहकर स्वास्थ्य सेवाएं संभालने वाले मेडिकल छात्रों के लिए यह निर्णय काफी अहम माना जा रहा है.
स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता और आंदोलन पर विराम
अगस्त के महीने में इंटर्न चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मिलकर अपनी समस्याओं और स्टाइपेंड वृद्धि की आवश्यकता से अवगत कराया था. उस समय स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों की मांग को वाजिब करार देते हुए मानदेय में बढ़ोतरी करने का भरोसा दिलाया था. शासन से मिले उस सकारात्मक आश्वासन के बाद आईएमए-एमएसएन (IMA-MSN) और इंटर्न डॉक्टरों के संयुक्त संघ ने बातचीत का सम्मान करते हुए 30 अगस्त तक अपने प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और आंदोलन को टालने का निर्णय लिया था.
अस्पतालों की व्यवस्था और हड़ताल के संकट का समाधान
शासकीय चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों के भीतर ओपीडी से लेकर आपातकालीन वार्डों तक की दैनिक स्वास्थ्य व्यवस्था काफी हद तक इन्हीं जूनियर डॉक्टरों के परिश्रम पर निर्भर करती है. मानदेय में वृद्धि न होने के कारण पूर्व में इन डॉक्टरों ने लगातार रोष व्यक्त किया था और धरने-प्रदर्शन का रास्ता अपनाया था. सरकार द्वारा मांग पूरी किए जाने से न केवल जूनियर चिकित्सकों में संतोष का माहौल है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर संभावित कार्य बहिष्कार या हड़ताल का गंभीर संकट भी पूरी तरह टल गया है.



















