केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने चर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप सिंडिकेट के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करते हुए एक वांछित आरोपी और कथित किंगपिन अभिषेक कुमार को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। यह गिरफ्तारी उस समय की गई जब वह दुबई से यात्रा करके भारत वापस आया। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने उसे हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरते ही दबोच लिया। एजेंसी द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के अनुसार, अभिषेक कुमार इस पूरे नेटवर्क में अवैध सट्टेबाजी, जुए के संचालन, विभिन्न पैनलों के बीच तालमेल बैठाने, फंड इकट्ठा करने और गैरकानूनी ढंग से जुटाए गए धन से दुबई के भीतर अचल संपत्तियां खड़ा करने में सीधे तौर पर लिप्त रहा है।
तलाशी में मिली आपत्तिजनक सामग्री और मुख्य आरोपियों से जुड़ाव
अभिषेक कुमार को हिरासत में लेने के तुरंत बाद जांच एजेंसी ने उसकी तलाशी ली, जिस दौरान उसके पास से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सामग्री बरामद करके जब्त की गई। एजेंसी का मानना है कि बरामद की गई सामग्री सीधे तौर पर महादेव बेटिंग ऐप के दैनिक संचालन में उसकी महत्वपूर्ण संलिप्तता की पुष्टि करती है। पूछताछ और जांच में यह बात भी रेखांकित हुई है कि अभिषेक कुमार इस पूरे मामले के मुख्य आरोपियों सौरभ चंद्राकर और शुभम सोनी के साथ बेहद करीबी तौर पर समन्वय बनाकर काम कर रहा था।
हैदराबाद से रायपुर तक कानूनी प्रक्रिया
गिरफ्तारी की कार्रवाई संपन्न होने के बाद सीबीआई ने अभिषेक कुमार को हैदराबाद की स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया। जांच एजेंसी की मांग पर अदालत ने उसे रायपुर ले जाने के लिए तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की। इसके उपरांत आरोपी को छत्तीसगढ़ के रायपुर ले जाया गया और वहां सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया गया। रायपुर की अदालत ने तमाम कानूनी दलीलों को सुनने के बाद आरोपी को दो दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया, ताकि हिरासत में लेकर उससे जुड़े वित्तीय तारों की गहन पड़ताल की जा सके।
दुबई की संपत्तियों और हवाला नेटवर्क पर जांच का फोकस
सीबीआई की इस जांच का सबसे अहम पहलू ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के जरिए जुटाई गई भारी भरकम रकम के वास्तविक प्रवाह का पता लगाना है। अभिषेक कुमार की भूमिका अवैध धन संग्रह के साथ-साथ इन पैसों को दुबई में अचल संपत्तियों की खरीद में लगाने के तौर पर भी सामने आई है। केंद्रीय एजेंसी अब उन सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है जिनसे यह पता चल सके कि अपराध से अर्जित कितनी रकम देश से बाहर भेजी गई। इसके साथ ही इस पूरे खेल में शामिल अन्य फरार अभियुक्तों की तलाश भी तेज कर दी गई है।
13 प्राथमिकियां, 8 चार्जशीट और 100 नामजद आरोपी
इस पूरे घोटाले की पृष्ठभूमि तब तैयार हुई जब छत्तीसगढ़ सरकार ने विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज कुल 13 एफआईआर की जांच औपचारिक तौर पर सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने सभी मामलों को अपने हाथ में लेकर जांच का दायरा बढ़ाया। अब तक की कानूनी प्रगति के अनुसार, जांच एजेंसी इस सिंडिकेट से जुड़े 100 आरोपियों के खिलाफ 8 अलग-अलग चार्जशीट संबंधित अदालतों में दाखिल कर चुकी है। इन नामजद आरोपियों की सूची में महादेव बेटिंग ऐप के मुख्य प्रमोटर, पैनल संचालक, हवाला कारोबारी और छत्तीसगढ़ सरकार के कुछ लोक सेवक भी शामिल हैं।
विदेश में बैठे प्रमोटरों के प्रत्यर्पण की तैयारी
महादेव बेटिंग ऐप के शीर्ष प्रमोटरों को भारतीय कानूनों के तहत ट्रायल का सामना कराने के लिए जांच एजेंसी लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम उठा रही है। केंद्रीय एजेंसी ने अब तक आरोपियों के खिलाफ 7 रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाए हैं। इसके अतिरिक्त विदेश में बैठे अभियुक्तों को भारत वापस लाने के लिए 2 औपचारिक प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, जबकि दो अन्य प्रमुख आरोपियों के खिलाफ प्रत्यर्पण और वापसी की कानूनी प्रक्रिया जारी है।






















