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बीआईआईटी मेसरा में पीएचडी पर बंपर स्कॉलरशिप, बिना जेआरएफ के भी मिलेंगे हर महीने ₹25000झारखंड
4 सित॰ 2026, 6:55 am (21 दिन पहले)· 2

बीआईआईटी मेसरा में पीएचडी पर बंपर स्कॉलरशिप, बिना जेआरएफ के भी मिलेंगे हर महीने ₹25000

झारखंड की राजधानी रांची स्थित बीआईटी मेसरा में पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को तीन साल तक हर महीने पच्चीस हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए नेट परीक्षा पास होना अनिवार्य नहीं है क्योंकि संस्थान अपनी प्रवेश परीक्षा के जरिए दाखिला देता है।

रांची के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान बीआईटी मेसरा में शोध कार्य करने वाले युवाओं के लिए एक बड़ी वित्तीय राहत सामने आई है। जो विद्यार्थी प्रतिष्ठित जूनियर रिसर्च फेलोशिप परीक्षा में सफल नहीं हो पाए हैं, उन्हें भी अब अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई के दौरान हर महीने पच्चीस हजार रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य उन मेधावी शोधार्थियों का आर्थिक बोझ कम करना है जो संसाधनों के अभाव में अपनी आगे की अकादमिक यात्रा जारी रखने में कठिनाई महसूस करते हैं।

विभिन्न विभागों में शोध के अवसर

संस्थान के ह्यूमैनिटीज विभाग के अंतर्गत समाजशास्त्र और मनोविज्ञान जैसे विषयों में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने का विकल्प खुला हुआ है। इसके अलावा विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवा रिमोट सेंसिंग और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक विषयों को भी चुन सकते हैं। बीआईटी मेसरा के जनसंपर्क अधिकारी मुकुल ने इस बात की जानकारी दी है कि इस संस्थान के पास देश का पहला स्पेस टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट होने का गौरव प्राप्त है, जहां वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने चंद्रयान-2 मिशन से जुड़े महत्वपूर्ण शोध कार्यों में भी अपनी भागीदारी निभाई है।

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प्रवेश परीक्षा और फेलोशिप के नियम

इस फेलोशिप योजना का लाभ कुल तीन साल की अवधि के लिए दिया जाता है जिससे शोधार्थियों को अपनी थीसिस पूरी करने में मदद मिलती है। दाखिला प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट किया गया है कि जिन उम्मीदवारों ने राष्ट्रीय स्तर की यूजीसी नेट परीक्षा पास नहीं की है, वे भी संस्थान द्वारा आयोजित की जाने वाली अपनी प्रवेश परीक्षा के माध्यम से यहां एडमिशन पा सकते हैं। एक बार यह प्रवेश परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हो जाने के बाद छात्रों को प्रतिमाह पच्चीस हजार रुपये की स्कॉलरशिप मिलने लगती है जिससे उनकी अध्ययन से जुड़ी जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं।

परिसर की सुविधाएं और भविष्य के अवसर

झारखंड की राजधानी में स्थित इस परिसर की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक सुंदरता विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए एक बेहद शांत और अनुकूल माहौल मुहैया कराती है। परिसरों के भीतर छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग सुसज्जित हॉस्टल की मुकम्मल व्यवस्था भी मौजूद है ताकि दूर-दराज से आने वाले युवाओं को आवास की कोई समस्या न हो। बीआईटी मेसरा से अपनी पीएचडी पूरी करने वाले शोधार्थियों को देश के अन्य नामचीन उच्च शिक्षण संस्थानों जैसे कि आईआईटी और आईएसएम में अध्यापन कार्य करने के बेहतरीन अवसर भी प्राप्त होते हैं।

सवाल-जवाब

बीआईटी मेसरा में पीएचडी छात्रों को कितनी स्कॉलरशिप मिलेगी?
संस्थान में पीएचडी करने वाले पात्र छात्रों को प्रति माह 25,000 रुपये की स्कॉलरशिप दी जाएगी।
यह स्कॉलरशिप कितने समय तक प्रदान की जाएगी?
यह वित्तीय सहायता छात्रों को कुल तीन साल की अवधि के लिए दी जाती है।
क्या इस स्कॉलरशिप के लिए जेआरएफ होना अनिवार्य है?
नहीं, जिन छात्रों का जेआरएफ नहीं निकला है, वे भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
प्रवेश के लिए कौन सी परीक्षा पास करनी होगी?
यदि छात्र ने यूजीसी नेट पास नहीं किया है, तो उन्हें संस्थान द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी।
संस्थान में कौन से प्रमुख विशेष विभाग उपलब्ध हैं?
यहां समाजशास्त्र, मनोविज्ञान के अलावा देश का पहला स्पेस टेक्नोलॉजी विभाग और रिमोट सेंसिंग विभाग भी मौजूद है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

बीआईआईटी मेसरा की यह पहल उन शोधार्थियों के लिए बेहद राहत भरी है जो जेआरएफ न होने के कारण आर्थिक तंगी से जूझते हैं। प्रतिमाह पच्चीस हजार रुपये की यह सहायता और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे आधुनिक विषयों में शोध के अवसर, झारखंड के उच्च शिक्षा क्षेत्र में अनुसंधान की गुणवत्ता को और मजबूत करेंगे तथा छात्रों को आईआईटी जैसे संस्थानों में करियर बनाने का ठोस मंच देंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

बीआईआईटी मेसरा द्वारा बिना जेआरएफ के भी पच्चीस हजार रुपये मासिक फेलोशिप देने की यह पहल उच्च शिक्षा में वित्तीय सुरक्षा का एक मजबूत मॉडल पेश करती है। हालांकि, संस्थान स्तर पर मिलने वाली ऐसी आर्थिक सहायता के मामलों में यह देखना अनिवार्य होगा कि तीन साल की इस निश्चित अवधि के भीतर शोधार्थी अपना प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा कर सकें, ताकि फंड के अभाव में बीच में शोध बाधित न हो।

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