रांची स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मेसरा अपने आवासीय परिसरों में विद्यार्थियों की जिंदगी सुरक्षित करने के लिए बड़े संरचनात्मक बदलाव कर रहा है। तकनीकी संस्थानों में तनाव और खुदकुशी की बढ़ती घटनाओं के बीच संस्थान ने अपने सभी 14 हॉस्टलों के कमरों में खास तकनीक वाले सुरक्षा पंखे लगाने की मुहिम छेड़ी है। ये ऐसे सीलिंग फैन हैं जिनमें तय सीमा से अधिक वजन या अचानक खिंचाव पड़ते ही इनका आंतरिक सेफ्टी मैकेनिज्म सक्रिय हो जाता है और पंखा तुरंत नीचे की ओर झुक या गिर जाता है। इस सुरक्षात्मक कदम का मूल मकसद हॉस्टल कमरों के भीतर पंखे के सहारे आत्महत्या के किसी भी संभावित प्रयास को नाकाम करना है। पूरी तरह आवासीय परिसर होने की वजह से यहां नामांकित प्रत्येक विद्यार्थी का कैंपस हॉस्टल में ही ठहरना अनिवार्य होता है, जिस कारण प्रशासन ने इस बुनियादी सुरक्षा सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के कमरों से शुरू हुआ बदलाव
प्रशासन ने इस सुरक्षा अभियान की शुरुआत सबसे पहले प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं के हॉस्टल भवनों से की है। नए प्रवेश पाने वाले छात्र अक्सर अपने घर-परिवार से दूर नए परिवेश, कठिन पाठ्यक्रम और हॉस्टल जीवन के शुरुआती दबाव से जूझते हैं, इसलिए उन्हें पहले चरण में शामिल किया गया है। संस्थान की योजना के मुताबिक पहले साल के हॉस्टल कमरों में काम पूरा होने के बाद चरणबद्ध तरीके से इसे बाकी सभी हॉस्टलों में भी पहुंचाया जाएगा। इन नए पंखों की कार्यप्रणाली बेहद सुरक्षित है, जिसमें सामान्य दैनिक उपयोग और हवा के संचालन के दौरान पंखा अपनी तय जगह पर पूरी तरह स्थिर रहता है। लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति इस पर असामान्य भार डालता है, उसका सुरक्षा तंत्र तुरंत सक्रिय होकर पंखे को नीचे गिरा देता है, जिससे किसी भी अनहोनी की आशंका खत्म हो जाती है।
सभी 14 आवासीय भवनों में अनिवार्य रूप से लागू होगी व्यवस्था
बीआईटी मेसरा में छात्र और छात्राओं के लिए 14 अलग-अलग आवासीय हॉस्टल संचालित किए जाते हैं। नियम के मुताबिक हर छात्र के लिए पढ़ाई की पूरी अवधि के दौरान हॉस्टल में रहना आवश्यक है। कैंपस के भीतर पढ़ाई, मनोरंजन और खेलकूद के लिए अलग-अलग सुविधाएं मौजूद हैं। चूंकि छात्र अपना अधिकांश समय इन्हीं आवासीय कमरों में बिताते हैं, इसलिए प्रबंधन ने भौतिक बुनियादी ढांचे को अधिक सुरक्षित बनाने का फैसला किया है। एंटी-सुसाइड पंखों की यह पूरी श्रृंखला चरणबद्ध रूप से सभी हॉस्टलों में लगाई जा रही है ताकि हर कमरे में सुरक्षित माहौल तैयार हो सके।
मानसिक संबल के लिए पेशेवर काउंसलिंग और निरंतर संवाद
हॉस्टल के कमरों में केवल भौतिक उपकरण बदलना ही समाधान नहीं है, इस बात को समझते हुए संस्थान मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है। पढ़ाई की कड़ी प्रतिस्पर्धा, परीक्षाओं का तनाव, भविष्य के करियर की चिंताएं और व्यक्तिगत परेशानियां कई बार छात्रों को गहरे अवसाद में धकेल देती हैं। समय रहते ऐसे संकटों को पहचानने के लिए संस्थान स्तर पर मनोवैज्ञानिक परामर्श, आपसी बातचीत और संवेदी सहायता की व्यवस्था तैयार की गई है। अधिकारियों का मानना है कि हार्डवेयर सुरक्षा तंत्र के साथ-साथ जब तक छात्रों को अपनी बात खुलकर साझा करने का सुरक्षित मंच नहीं मिलेगा, तब तक इस समस्या की जड़ पर वार नहीं किया जा सकता।
एमएससी छात्र की मौत और परिसर के पूर्व अनुभव
सुरक्षा के इन कड़े कदमों की पृष्ठभूमि में संस्थान के अपने हालिया अनुभव भी जुड़े हुए हैं। कुछ ही समय पहले बीआईटी मेसरा के एक हॉस्टल कमरे में एमएससी के एक छात्र का शव मिलने से पूरा परिसर स्तब्ध रह गया था। उस घटना के सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। इससे पहले भी संस्थान में विद्यार्थियों की असमय मौतों के कुछ मामले सामने आए थे, जिसने प्रबंधन को छात्रों की मानसिक स्थिति और बुनियादी सुरक्षा पर नए सिरे से सोचने को मजबूर किया। इसी वजह से तकनीकी सुधारों और मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग की दोहरी रणनीति पर एक साथ काम शुरू किया गया है।
आईआईटी मुंबई की घटना के बाद देशभर में गहराया विमर्श
कैंपस सुरक्षा को लेकर यह तत्परता ऐसे वक्त में देखने को मिल रही है जब आईआईटी मुंबई के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा पर तीखी बहस छिड़ चुकी है। साहिल की मौत के मामले में पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज कर पूरी जांच कर रही है। इस दुखद हादसे के बाद आईआईटी मुंबई के छात्रों ने भी मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र, शिकायत निवारण प्रणाली और छात्र कल्याण के उपायों को मजबूत बनाने की पुरजोर आवाज उठाई थी। उसी कड़ी में आईआईटी मुंबई ने भी अपने हॉस्टल कमरों में पारंपरिक सीलिंग पंखों को हटाकर दीवार पर लगने वाले पंखे लगाने का प्रयोग शुरू किया है।
मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन और आपात सहायता
अगर किसी छात्र, युवा या आपके किसी परिचित के मन में खुदकुशी का विचार आ रहा है, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें क्योंकि यह एक गंभीर आपात स्थिति है। तुरंत भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 पर संपर्क करें या टेली-मानस की आधिकारिक हेल्पलाइन 1800914416 पर कॉल करके प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों से परामर्श लें। इन सभी नंबरों पर पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और कठिन मानसिक स्थिति से उबरने के लिए निशुल्क परामर्श दिया जाता है।



















