शुक्रवार को आयोजित एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रशासनिक व्यवस्था और शासन की मूल अवधारणा में आए बुनियादी बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि 21वीं सदी का भारत अब नागरिकों पर अविश्वास करने के बजाय भरोसे की नींव पर कार्य कर रहा है। प्रशासनिक नीतियों में केवल नियमों का संशोधन नहीं किया गया है, बल्कि उनके पीछे की पूरी सोच को बदल दिया गया है। इस नई दिशा के तहत सरकार परमिटेड अनलेस प्रोहिबिटेड व्यवस्था को प्राथमिकता दे रही है, जिसका सीधा अर्थ है कि यदि किसी कार्य को स्पष्ट रूप से कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं किया गया है, तो उसके संचालन के लिए नागरिकों या उद्यमियों को बार-बार सरकारी विभागों से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। पीएम मोदी के अनुसार, भारत वैश्विक मंच पर तीव्र विकास और उम्मीद की एक सशक्त किरण के रूप में उभरा है।
लाइसेंस राज की कमियों और नई प्रोत्साहन नीति पर विमर्श
पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था पर अपनी बात रखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों के प्रतिकूल प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछली शासन प्रणालियों ने अभाव और नियंत्रण की संस्कृति को बढ़ावा दिया, जिसके कारण देशवासियों को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी प्रशासनिक तंत्र पर निर्भर रहना पड़ता था। पुरानी नीतियों के तहत बने लाइसेंस राज के कारण देश में बेरोजगारी की समस्या काफी गहरा गई थी। इसके विपरीत, वर्तमान प्रशासनिक मॉडल पूरी तरह से सुशासन, त्वरित रिफॉर्म्स और उद्योग को सहयोग देने पर आधारित है।
औद्योगिक उत्पादन को गति देने के लिए अपनाई गई नई नीतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ज्यादा विनिर्माण करने वाली इकाइयों को दंडित करने के बजाय पुरस्कृत किया जाना चाहिए। पूर्ववर्ती समय में प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट (PLP) जैसी सोच प्रभावी थी, जिसके स्थान पर अब प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) मॉडल को लागू किया गया है। प्रोत्साहन आधारित इस व्यवस्था के परिणामस्वरूप देश के भीतर घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिल रहा है और युवाओं के लिए नए तथा बेहतर रोजगार अवसर निर्मित हो रहे हैं।
डिजिटल क्रांति और पुराने प्रतिबंधों की समाप्ति
डिजिटल कनेक्टिविटी और सूचना तकनीक के मोर्चे पर हासिल उपलब्धियों को साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया भर में सबसे सस्ता मोबाइल डेटा उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है। इसके साथ ही देश में अत्यधिक किफायती और उच्च गुणवत्ता वाले स्मार्टफोन का बड़े पैमाने पर विनिर्माण किया जा रहा है। तकनीक के क्षेत्र में पुराने जटिल नियमों को हटाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने मैपिंग नियमों का जिक्र किया।
उन्होंने ध्यान दिलाया कि अतीत में भारत का अपना मानचित्र तैयार करने के लिए भी जटिल प्रशासनिक मंजूरी लेनी पड़ती थी। एक समय ऐसा था जब विदेशी सैटेलाइट देश के क्षेत्रों का मानचित्रण आसानी से कर सकते थे, परंतु स्थानीय स्तर पर भारतीय नागरिकों और संस्थाओं को इसकी अनुमति नहीं थी। सरकार ने इस पुरानी और गैर-व्यावहारिक प्रणाली को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है, जिससे घरेलू स्तर पर भौगोलिक आंकड़ों और तकनीकी नवाचार को नई गति मिली है।
सीमावर्ती बुनियादी ढांचा और सार्वजनिक परिवहन में सुधार
देश की सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर चर्चा करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के प्रति दृष्टिकोण में आए बदलाव को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सीमाओं पर विकसित किया जा रहा इंफ्रास्ट्रक्चर अब देश की कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी सामरिक ताकत बन चुका है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि मजबूत सीमावर्ती कनेक्टिविटी से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलती है।
इसके साथ ही देश के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में आ रहे व्यापक बदलावों का उल्लेख किया गया। इंडियन रेलवे की कार्यप्रणाली में किए जा रहे सुधारों के साथ-साथ शहरी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए दिल्ली मेट्रो और नमो रैपिड रेल जैसी आधुनिक परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। पीएम मोदी के अनुसार, ये सभी रिफॉर्म्स इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि भारत समय की जरूरतों के अनुरूप आधुनिकता और तीव्र विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।



















