प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर भारत सरकार के सेक्रेटरीज के साथ तीसरी हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में देश की आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा, विदेश नीति, बुनियादी ढांचे के निर्माण और प्रशासनिक सुशासन से जुड़े कई दूरगामी विषयों पर विस्तार से मंथन किया गया। पीएम मोदी ने वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन करते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी मशीनरी को केवल तात्कालिक आंकड़ों और अल्पकालिक लक्ष्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के समग्र विकास के लिए लंबी अवधि का दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है।
विभागों में आपसी तालमेल और टीम वर्क पर बल
प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली में सुधार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने विभिन्न सरकारी मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच तालमेल का अभाव केवल एक सांगठनिक ढांचागत कमी नहीं है, बल्कि यह एक सोच और दृष्टिकोण से जुड़ी समस्या है। इसे दूर करने के लिए सभी मंत्रालयों को अपने पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर पूरी जिम्मेदारी और टीम वर्क की भावना से काम करना होगा। पीएम मोदी ने अधिकारियों का आह्वान किया कि वे एकीकृत दृष्टिकोण अपनाकर ही भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सकते हैं।
नीति निर्माण में युवाओं और शिक्षण संस्थानों का योगदान
सरकारी नीतियों को अधिक प्रभावी और प्रासंगिक बनाने के उद्देश्य से पीएम मोदी ने नए विचारों और नवाचार को अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों को देश के युवाओं और विश्वविद्यालयों के साथ निरंतर संवाद और जुड़ाव की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उच्च शिक्षण संस्थानों में हो रहे अनुसंधान और युवाओं की नई सोच का लाभ उठाकर नीति निर्माण को नया आयाम दिया जा सकता है। इस प्रकार की भागीदारी से सरकार की नीतियां अधिक असरदार बनेंगी और देश की भावी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की जा सकेंगी।
डेटा शेयरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का संतुलित उपयोग
आधुनिक दौर में डेटा की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण संपत्ति करार दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग मंत्रालयों में बिखरे हुए डेटा का उचित प्रबंधन और सुगम आदान-प्रदान अत्यंत आवश्यक है ताकि देश की पूर्ण क्षमता का दोहन किया जा सके। इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि AI का उपयोग कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए जरूरी है, परंतु नीतिगत और प्रशासनिक निर्णयों में अंतिम जिम्मेदारी इंसानी समझ, संवेदनशीलता और प्रत्यक्ष निगरानी की ही रहनी चाहिए।
डिफेंस सेक्टर में नवाचार और समुद्री बुनियादी ढांचे का विकास
देश की सुरक्षा और आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए बैठक में रक्षा उत्पादन और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर पर विस्तृत रणनीति बनाई गई। भारत के डिफेंस सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अनुसंधान, नवाचार और मानव संसाधन के विकास को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया। वहीं, समुद्री व्यापार को सशक्त करने के लिए पोर्ट-लेड डेवलपमेंट के कार्यों में तेजी लाने पर बल दिया गया। मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और भारतीय उत्पादों के एक्सपोर्ट को आसान बनाने के उद्देश्य से देश भर में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने को सरकार का प्राथमिक लक्ष्य बताया गया।



















