बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ गंभीर मौसमी तंत्र अब उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय भूभाग पर दस्तक दे चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के विवरण के मुताबिक यह मौसमी गहरा दबाव करीब 5 किलोमीटर प्रति घंटे की धीमी गति से उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ बढ़ रहा है और विशाखापट्टनम तथा गोपालपुर के मध्य स्थित कलिंगपट्टनम के ठीक दक्षिण-पश्चिम तट को पार कर रहा है। तट से टकराने यानी लैंडफॉल की यह पूरी प्रक्रिया लगभग दो घंटों तक चलने का आकलन पेश किया गया है। मौसम विज्ञानियों ने स्पष्ट किया है कि तटवर्ती इलाके में प्रवेश करने के बाद भी यह मौसमी तंत्र अगले 12 घंटों तक अपनी पूरी प्रचंड ताकत बनाए रखेगा और इसके बाद ही उत्तर-उत्तर-पश्चिम की दिशा में खिसकते हुए धीरे-धीरे कमजोर पड़ेगा।
चक्रवात का रूप लेने पर अर्णब कहलाता यह तूफान
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह दबाव जमीन से टकराने से पहले समुद्र में और अधिक संघनित होकर पूर्ण चक्रवाती तूफान में तब्दील हो जाता, तो इसे आधिकारिक तौर पर अर्णब नाम से जाना जाता। भले ही यह चक्रवात के स्तर तक न पहुंचा हो, लेकिन इस गहरे दबाव की तीव्रता को देखते हुए ओडिशा और आंध्र प्रदेश के अत्यधिक संवेदनशील जिलों के लिए कड़ा रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है। विशेष रूप से कोरापुट, मलकानगिरी, कालाहांडी और नवरंगपुर में अति भारी वर्षा, तूफानी हवाओं और अचानक जलस्तर बढ़ने यानी फ्लैश फ्लड का खतरा बेहद गंभीर रूप ले चुका है। इसी वजह से दोनों राज्यों की आपातकालीन बचाव टीमें और राहत दल पूरी तरह मुस्तैद कर दिए गए हैं।
प्रशासनिक सतर्कता और राहत कार्यों की तैयारी
गंभीर खतरे को ध्यान में रखते हुए आंध्र के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने उच्चस्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक आपात समीक्षा बैठक आयोजित की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि निचले और बाढ़ प्रभावित संभावित क्षेत्रों से हजारों नागरिकों को सुरक्षित राहत शिविरों में तुरंत पहुंचाया जाए। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों के सभी शैक्षणिक संस्थानों और स्कूलों को तत्काल बंद रखने का आदेश दिया गया है। आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जिला कलेक्टरों को स्वयं मैदानी स्तर पर मौजूद रहने और अचानक आने वाले सैलाब से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ ओडिशा में भी कई इलाकों में बहुत भारी से लेकर अत्यधिक भारी वर्षा के अनुमान के चलते प्रशासन ने युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं।
मानसून के रुख और वर्षा के आंकड़ों में सुधार
डोलैट कैपिटल के एक अध्ययन और विश्लेषण के अनुसार, मानसून के उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटने के दौरान इसके अंतिम हफ्तों में पूर्वी और मध्य भारत में सर्वाधिक वर्षा दर्ज किए जाने का अनुमान लगाया गया है। इसी विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि अल नीनो का प्रभाव काफी बढ़ चुका है और इसके वर्ष 2027 तक प्रभावी बने रहने की संभावना है। वर्षा के क्षेत्रीय आंकड़ों पर गौर करें तो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सबसे उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया, जहां बारिश की कुल कमी पिछले हफ्ते के 29 प्रतिशत के स्तर से घटकर 27 प्रतिशत पर आ गई है।
इसी समयावधि के दौरान दक्षिणी प्रायद्वीप में भी मामूली सुधार की स्थिति बनी और वहां वर्षा की कमी 28 प्रतिशत से घटकर 26 प्रतिशत दर्ज की गई। मध्य भारत के इलाके में बारिश की कमी का आंकड़ा मोटे तौर पर 6 प्रतिशत पर स्थिर बना रहा। इसके विपरीत उत्तर-पश्चिम भारत के क्षेत्र में हालात थोड़े प्रतिकूल हुए, जहां वर्षा की कमी 9 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई। इस पूरे चक्र के दौरान देशव्यापी स्तर पर बारिश की कमी का स्तर -15% पर बना रहा, जिससे पूर्व में लगातार बढ़ रहे सूखे या कमी के रुख पर रोक लगी और विभिन्न हिस्सों में मौसमी वर्षा की स्थिति सुधरी।




















