भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने न केवल अपनी आधिकारिक घोषणाओं और नीतिगत समझौतों के लिए, बल्कि दुनिया के तीन सबसे बड़े नेताओं के बीच दिखे बेहद दिलचस्प और अनौपचारिक तालमेल के लिए भी पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। औपचारिक बैठकों और राजनयिक प्रोटोकॉल के इतर, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच की केमिस्ट्री ने अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों और मीडिया को हैरान कर दिया है। इन तीनों शीर्ष नेताओं के हंसते-मुस्कुराते और आपसी बातचीत के कुछ अनौपचारिक पलों ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है। इन तस्वीरों को देखकर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों देशों के बीच के आपसी मतभेदों के बावजूद, क्या ये नेता एक साझा और सहयोगपूर्ण भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
बॉडी लैंग्वेज का विश्लेषण: खिलखिलाते चेहरे और रहस्यमय नजरों का सच
इस शिखर सम्मेलन का सबसे चर्चित हिस्सा वह अनौपचारिक पल था, जो सामूहिक फोटो सेशन के दौरान कैमरों में कैद हुआ। औपचारिक ग्रुप फोटो के लिए मंच पर जाने से ठीक पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक छोटे घेरे में खड़े होकर आपस में बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान का एक दृश्य सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो गया। इस खास तस्वीर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद गर्मजोशी के साथ खिलखिलाकर हंसते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने दोनों हाथ पीछे बांधकर पुतिन की तरफ एक रहस्यमय और गहरे अंदाज़ में देख रहे हैं। इस दौरान पुतिन का ध्यान मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मोदी की तरफ है, लेकिन वे बीच-बीच में कनखियों से चीनी राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया को भी भांप रहे हैं। यह तस्वीर कई तरह के कूटनीतिक सवाल खड़े करती है कि क्या इन नेताओं के हाव-भाव किसी नए समीकरण की ओर इशारा कर रहे हैं।
वैश्विक दबावों के बीच नेताओं का सहज तालमेल
नेताओं के बीच दिखी यह सहजता किसी एक पल तक सीमित नहीं थी। पूरे सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच का दोस्ताना व्यवहार साफ नजर आया। गलियारे में टहलने के दौरान, राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री मोदी के कंधे पर हाथ रखकर गहरी बातचीत करते और हंसते हुए दिखाई दिए। यह व्यवहार मॉस्को और नई दिल्ली के बीच के मजबूत और पुराने रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है। वहीं दूसरी तरफ, भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच किसी भी प्रकार की तल्खी के बजाय एक बेहद परिपक्व और संतुलित व्यवहार देखने को मिला। दोनों नेताओं ने बिना किसी औपचारिकता के कई महत्वपूर्ण विषयों पर संक्षिप्त चर्चा की, जो यह दिखाता है कि दोनों पक्ष आपसी मतभेदों को कूटनीतिक परिपक्वता के साथ संभालने के लिए तैयार हैं।
क्या फिर से मजबूत हो रही है 'RIC' तिकड़ी?
इन तस्वीरों के सामने आने के बाद रणनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या RIC (रूस-भारत-चीन) तिकड़ी एक बार फिर से वैश्विक कूटनीति का मुख्य केंद्र बनने जा रही है। ऐसे समय में जब रूस पश्चिमी देशों के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और चीन की अमेरिका के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा चल रही है, इन तीनों देशों के नेताओं का एक मंच पर एक साथ मुस्कुराना पश्चिमी ताकतों को एक मजबूत संदेश देता है। यह इस बात का साफ संकेत है कि दुनिया अब किसी एक या दो शक्तियों के प्रभाव में काम नहीं करेगी। वैश्विक GDP में 40% से अधिक की हिस्सेदारी रखने वाले ये तीनों देश मिलकर दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को बदल सकते हैं। यदि ये देश आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने जैसी प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करते हैं, तो वे पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर अपनी निर्भरता को काफी कम कर सकते हैं।
संतुलनकारी शक्ति के रूप में भारत की कूटनीतिक भूमिका
इस पूरे सम्मेलन की तस्वीरों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लगभग हर फ्रेम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्र में नजर आ रहे हैं। यह स्थिति भारत की स्वतंत्र और बहु-पक्षीय कूटनीति को बेहद सटीक ढंग से दर्शाती है। भारत जहां एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह रूस के साथ अपनी पुरानी दोस्ती को कायम रखने और चीन के साथ व्यावहारिक संबंध बनाने में भी पूरी तरह सफल रहा है। ब्रिक्स के मंच पर भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय पूर्व और पश्चिम के बीच एक मजबूत सेतु और संतुलनकारी शक्ति के रूप में काम कर रहा है। यह भूमिका भारत को वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में स्थापित करती है।
ब्रिक्स 2026 और भविष्य के कूटनीतिक मायने
इन नेताओं के बीच दिखे इस तालमेल के कूटनीतिक मायने बेहद गहरे हैं, जो केवल सोशल मीडिया की चर्चाओं तक सीमित नहीं हैं। ब्रिक्स 2026 के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ये खुशनुमा तस्वीरें यह स्पष्ट करती हैं कि द्विपक्षीय मतभेदों के बावजूद, वैश्विक शांति, स्थिरता और आर्थिक प्रगति के लिए यह तिकड़ी एक साथ मिलकर काम करने को तैयार है। इस शिखर सम्मेलन ने यह साबित कर दिया है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए अपनी आवाज बुलंद करने और एक अधिक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था का निर्माण करने के लिए ब्रिक्स आज भी सबसे मजबूत मंच है। जैसे-जैसे ये तीनों देश व्यावहारिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ेंगे, वैश्विक शासन व्यवस्था में RIC तिकड़ी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी.



















