राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक खूंखार पैंथर के आतंक से ग्रामीण इलाकों में भारी दहशत का माहौल बन गया है। जिले के रसूलपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली डाटानगढ़ ढाणी में इस जंगली जानवर ने कुछ ही समय के अंतराल पर दो लोगों पर जानलेवा हमला कर दिया। पैंथर के इस अचानक और आक्रामक व्यवहार के कारण पूरे इलाके के लोग बेहद डरे हुए हैं और खेतों की तरफ जाने से बच रहे हैं। दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका गंभीर स्थिति में इलाज चल रहा है।
खेतों में काम के दौरान पैंथर का दोहरा हमला
यह खौफनाक घटना उस समय शुरू हुई जब एक स्थानीय महिला अपने खेत में कृषि कार्य के सिलसिले में गई थी। वह खेत में पानी देने वाली फव्वारा लाइन को बदलने का प्रयास कर रही थी, तभी फसलों के बीच छिपे पैंथर ने अचानक उस पर हमला कर दिया। महिला को गंभीर रूप से घायल करने के कुछ ही समय बाद, इस आक्रामक तेंदुए ने पास ही मौजूद एक अन्य ग्रामीण बंशीलाल गुर्जर को भी अपना शिकार बना लिया और उन्हें भी बुरी तरह लहुलूहान कर दिया।
एक के बाद एक दो लोगों पर हमले की इस घटना से पूरी डाटानगढ़ ढाणी और रसूलपुर क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार सुनकर परिजन और अन्य ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ खेतों की तरफ दौड़े और दोनों घायलों को बचाया। ग्रामीण तुरंत दोनों पीड़ितों को उपचार के लिए बड़ाऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार देने के बाद डॉक्टरों ने दोनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर और सघन इलाज के लिए उन्हें सीकर के बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया, जहां वर्तमान में दोनों का इलाज जारी है।
अधिकारियों की टीम का आगमन और ग्रामीणों का आक्रोश
क्षेत्र में पैंथर के हमले और तनाव की खबर मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें हरकत में आईं। बबाई पुलिस थाने से हेड कांस्टेबल रविकांत शर्मा और DSP राजेंद्र कुमार बुरड़क तुरंत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रभावित ग्रामीणों से बातचीत की, उन्हें अकेले सुनसान जगहों पर न जाने की सलाह दी और इस संकट के समय में उनकी दहशत को कम करने की कोशिश की।
पुलिस के बाद खेतड़ी वन विभाग की एक टीम भी स्थिति का जायजा लेने घटनास्थल पर पहुंची। वनकर्मियों ने स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने और खेतों में बेवजह न जाने की हिदायत दी। हालांकि, वन विभाग की इस कार्रवाई से ग्रामीण बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं दिखे। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर पहुंची टीम के पास पैंथर जैसे आक्रामक जानवर को सुरक्षित पकड़ने के लिए जरूरी संसाधन, पिंजरे और ट्रेंकुलाइजिंग उपकरण नहीं थे। ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वन विभाग की यह कार्रवाई महज एक औपचारिकता थी, जिससे उनकी सुरक्षा का खतरा अभी भी टला नहीं है।
खेतों में सर्च ऑपरेशन और पहाड़ियों की तरफ लौटे कदम
इस बीच, वन अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि पैंथर की खोज के लिए वन विभाग ने अलग-अलग टीमों का गठन किया है। इन टीमों ने रसूलपुर के खेतों में खड़ी ऊंची बाजरे की फसल के बीच व्यापक तलाशी अभियान चलाया, क्योंकि घने खेतों में जंगली जानवरों के छिपने की पूरी संभावना होती है। इस सघन सर्च ऑपरेशन के दौरान टीमों को पैंथर के पगमार्क (पैरों के निशान) मिले।
इन पगमार्कों का पीछा करते हुए वन विभाग की टीम रसूलपुर से करीब छह किलोमीटर दूर माधोगढ़ की पहाड़ियों तक पहुंच गई। वन विभाग के अधिकारियों का आकलन है कि पैरों के इन निशानों से संकेत मिलता है कि पैंथर आबादी क्षेत्र से बाहर निकलकर वापस अपने प्राकृतिक आवास यानी माधोगढ़ की पहाड़ियों के जंगलों की ओर लौट गया है। पैंथर के पहाड़ी क्षेत्र में चले जाने की पुष्टि होने के बाद, जयपुर से विशेष रूप से बुलाई गई रेस्क्यू टीम भी वापस लौट गई है। फिर भी, ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रसूलपुर क्षेत्र में वन विभाग की एक विशेष निगरानी टीम को तैनात रखा गया है। साथ ही डाटानगढ़ ढाणी के पास एक मजबूत पिंजरा भी लगाया गया है ताकि यदि वह दोबारा लौटता है तो उसे पकड़ा जा सके। ग्रामीण अभी भी क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग पर अड़े हैं।



















