जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में आतंकवाद निरोधक मोर्चे पर सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय कमांडर हाशिम मूसा को भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के संयुक्त अभियान में मार गिराया गया है। यह वही आतंकी था जो करीब 24 दिन पहले 5 सितंबर को सुरक्षाबलों की घेराबंदी में गोली लगने के बावजूद अंधेरे और दुर्गम इलाके का लाभ उठाकर फरार होने में सफल रहा था। उस मुठभेड़ में उसका साथी यासिर मारा गया था, लेकिन घायल मूसा छिपता फिर रहा था। सुरक्षा एजेंसियों ने उसका लगातार पीछा किया और आखिरकार 29 सितंबर को बडगाम के गुरवैथकलां इलाके में उसकी घेराबंदी कर उसे ढेर कर दिया।
5 सितंबर की मुठभेड़ और मूसा का बच निकलना
घाटी में सुरक्षाबलों का आतंकवादियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी था। 5 सितंबर के दिन सुरक्षाबलों ने आतंकियों के एक ठिकाने की सख्त घेराबंदी की थी। उस दौरान भीषण गोलीबारी हुई जिसमें लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर हाशिम मूसा गोली लगने से घायल हो गया था। मुठभेड़ में उसका एक अन्य साथी यासिर सुरक्षाबलों की गोलियों का निशाना बनकर मौके पर ही मारा गया। हालांकि, मूसा जख्मी हालत में होने के बाद भी भौगोलिक परिस्थितियों और रात के अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से खिसक गया। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में पूरी ताकत से जुट गईं।
5 सितंबर से फरार होने के बाद हाशिम मूसा लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। वह सुरक्षा तंत्र से बचने के लिए भूमिगत हो गया था और ऐसा लग रहा था कि वह पूरी तरह गायब हो चुका है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की तफ्तीश में जुटी थीं कि वह किस गुप्त नेटवर्क, संपर्कों और सहयोगियों के जरिए सुरक्षित पनाह पा रहा है। सुरक्षाबलों ने उसके संभावित रास्तों और मददगारों पर लगातार नजर बनाए रखी और अपना निगरानी तंत्र सक्रिय रखा।
गुरवैथकलां में पुख्ता खुफिया इनपुट और ऑपरेशन कोराग
मूसा की खोज के दौरान मंगलवार 29 सितंबर को बडगाम जिले के गुरवैथकलां इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की एक पुख्ता खुफिया जानकारी मिली। इस इनपुट के आधार पर भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के जवानों ने मिलकर इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। तलाशी अभियान के दौरान जब सुरक्षाबल आगे बढ़े तो उन्हें संदिग्ध हलचल महसूस हुई और छिपे हुए आतंकियों से सीधा संपर्क हुआ।
सुरक्षाबलों ने आतंकियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन आतंकियों ने जवाब में अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। इस मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर हाशिम मूसा मारा गया। भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स ने इस संयुक्त अभियान की पुष्टि की और बताया कि यूसमर्ग के कोराग इलाके में शुरू किए गए इस तलाशी अभियान को ‘ऑपरेशन कोराग’ नाम दिया गया था। मुठभेड़ समाप्त होने के बाद भी पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती के साथ व्यापक तलाशी अभियान जारी रखा गया।
2022 से सक्रिय चार आतंकियों का खतरनाक मॉड्यूल खत्म
सुरक्षा एजेंसियों की सूची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े चार आतंकियों का एक खास दस्ता लंबे समय से रडार पर था। यह गुट वर्ष 2022 से जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में सक्रिय था और सुरक्षा तंत्र के लिए सिरदर्द बना हुआ था। इस समूह में अबू तल्हा, सुलेमान, जुनैद अहमद और हाशिम मूसा के नाम शामिल थे। इन चारों के बीच आपसी तालमेल और नेटवर्क की कई अहम कड़ियां एजेंसियों के हाथ लगी थीं।
सुरक्षाबलों ने दिसंबर 2024 में जुनैद अहमद को एक सफल मुठभेड़ में मार गिराया था। जुनैद के पास से बरामद मोबाइल फोन की जांच के दौरान इन चारों आतंकियों की एक साथ खींची गई तस्वीर मिली थी। इस तस्वीर ने सुरक्षा एजेंसियों को इस मॉड्यूल की गतिविधियों, संगठन के ढांचे और उनकी योजनाओं को समझने में बेहद अहम सुराग मुहैया कराए थे। इसके बाद सुरक्षा बलों ने समूह के बाकी बचे सदस्यों की घेराबंदी तेज कर दी।
चरणबद्ध कार्रवाई में मॉड्यूल का पूरी तरह सफाया
जुनैद के खात्मे के बाद एजेंसियों ने बाकी बचे आतंकियों पर एक के बाद एक कार्रवाई की। अप्रैल 2025 में सुरक्षाबलों ने अबू तल्हा को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया। इसके बाद सितंबर 2026 में यासिर मारा गया, जबकि 5 सितंबर को उसी मुठभेड़ में मूसा घायल होकर भागने में सफल रहा था। 24 दिनों की लगातार निगरानी और सटीक ट्रैकिंग के बाद 29 सितंबर को बडगाम के एनकाउंटर में हाशिम मूसा की मौत के साथ ही इस पूरे आतंकी समूह का अंत हो गया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार 2022 से घाटी में सक्रिय इस चार आतंकियों के समूह के सभी सदस्य अब मारे जा चुके हैं।

















