भारत में होने वाली अगली राष्ट्रीय जनगणना केवल जनसंख्या और बुनियादी जनसांख्यिकीय आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी। केंद्र सरकार ने 14 अगस्त 2026 को जनगणना 2027 के दूसरे चरण, जिसे जनसंख्या गणना (पॉपुलेशन इन्यूमरेशन) कहा जाता है, के लिए 40 प्रमुख सवालों की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ सामान्य जातियों की भी प्रविष्टियां दर्ज की जाएंगी। यह कदम देश के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को गहराई से समझने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
जाति गणना और पहचान संबंधी नई व्यवस्था
जनगणना अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर पूछे जाने वाले 40 प्रश्नों की सूची में सवाल नंबर 10 सबसे अधिक चर्चा में है। इसमें नागरिकों से उनकी सामाजिक श्रेणी और जाति के बारे में पूछा जाएगा, जहां अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा सामान्य जातियों के लिए कॉलम खुला रखा जाएगा। नागरिक जिस नाम से अपनी जाति बताएंगे, अधिकारी उसे उसी रूप में प्रपत्र में दर्ज करेंगे। इससे पहले जुलाई 2026 में देश के 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इसका पूर्वाभ्यास (प्री-टेस्ट) सफलता के साथ पूरा किया गया था, जिसे अब अंतिम जनगणना प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है।
डिजिटल पहचान और पारिवारिक विवरण का संग्रह
इस बार जनगणना फॉर्म का दायरा अत्यधिक व्यापक रखा गया है, जिसमें नागरिकों की व्यक्तिगत पहचान और डिजिटल पहुंच का पूरा विवरण शामिल होगा। सरकार द्वारा अधिसूचित नए प्रपत्र में नागरिकों से उनकी राष्ट्रीयता, साक्षरता दर और डिजिटल साक्षरता की स्थिति के बारे में सवाल किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, उत्तरदाताओं से उनके आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी), ड्राइविंग लाइसेंस और भारतीय पासपोर्ट धारक होने की स्थिति में पासपोर्ट नंबर की जानकारी भी मांगी जा सकती है। इससे बुनियादी ढांचे और नागरिक पहचान से जुड़े सटीक आंकड़े तैयार करने में मदद मिलेगी।
शिक्षा, रोजगार और प्रवास से जुड़े 40 सवालों का खाका
हाउसहोल्ड शेड्यूल के अंतर्गत तैयार किए गए 40 प्रश्नों में शिक्षा, रोजगार और आंतरिक प्रवास की जानकारी को भी प्राथमिकता दी गई है। उत्तरदाताओं से उनकी वर्तमान शैक्षणिक स्थिति, हासिल की गई उच्चतम डिग्री, पढ़ाई के विषय अथवा स्ट्रीम के साथ-साथ रोजगार की स्थिति पर सवाल पूछे जाएंगे। इसमें यह भी दर्ज किया जाएगा कि व्यक्ति ने पिछले एक वर्ष में कार्य किया है या नहीं, और उसके उद्योग, व्यापार या सेवा की प्रकृति क्या है। इसके साथ ही, कार्यस्थल तक आवागमन के साधन, काम की तलाश, पिछले प्रवास के बाद वर्तमान स्थान पर रहने की अवधि और परिवार में जीवित बच्चों की संख्या संबंधी जनसांख्यिकीय आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे।



















