देश के विशाल हिस्से में मौसमी परिस्थितियां तेजी से करवट ले रही हैं, जिसके चलते प्रायद्वीपीय तटों से लेकर उत्तरी मैदानी इलाकों तक वर्षा का एक नया दौर शुरू हो रहा है. हालांकि चक्रवात अर्नब का असर अब कमजोर पड़कर सीमित हो गया है, फिर भी वायुमंडलीय अस्थिरता कम नहीं हुई है. इसके पीछे मुख्य कारण समुद्र में तैयार हो रही एक अन्य मौसमी हलचल है, जो आने वाले पांच से छह दिनों तक आकाशीय बिजली चमकने, बादलों की भारी गड़गड़ाहट और तेज झोंके वाली हवाओं का सिलसिला बनाए रखेगी. मौसम विज्ञान से जुड़े अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस दौरान हवाओं का बहाव चालीस से साठ किलोमीटर प्रति घंटे के बीच पहुंच सकता है, जिससे सामान्य जनजीवन पर असर पड़ने की पूरी आशंका है.
समुद्र में गहराता दबाव और चक्रवाती प्रणालियों का जाल
अंडमान सागर के दक्षिणी हिस्से के ऊपर हवा के कम दबाव का एक बड़ा दायरा विकसित हुआ है, जो लगातार पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है. इकतीस अक्टूबर के आसपास इसके दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के निकट एक स्पष्ट डिप्रेशन का रूप लेने की पूरी संभावना जताई गई है. इसके उपरांत यह मौसमी हलचल अगले अड़तालीस घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश की तटीय पट्टी के करीब पहुंचेगी. इस गतिविधि के कारण प्रायद्वीपीय भारत के पूर्वी समुद्री किनारों पर लहरों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है. खासकर पहली नवंबर से चार नवंबर की अवधि में आंध्र प्रदेश के समुद्री क्षेत्रों में स्थिति काफी अशांत रहने वाली है.
इस बीच, उनतीस अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के मध्य भाग और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में मौजूद अर्नब चक्रवात कमजोर होकर निम्न दबाव में तब्दील हो चुका था. इसके बावजूद समूचे देश के ऊपर कई अन्य प्रणालियां आपस में जुड़कर सक्रिय बनी हुई हैं. उत्तरी पंजाब के वातावरण में एक मजबूत चक्रवाती परिसंचरण घूम रहा है. वहीं, उत्तर प्रदेश से शुरू होकर उत्तरी छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थित कम दबाव के केंद्र तक हवाओं की एक ट्रफ रेखा फैली है. दूसरी तरफ, पूर्व-मध्य अरब सागर से महाराष्ट्र के तटीय रास्ते होते हुए छत्तीसगढ़ तक भी बादलों की एक ट्रफ खिंची हुई है. इसके साथ-साथ दक्षिणी गुजरात और असम के वायुमंडल में भी अलग-अलग परिसंचरण सक्रिय हैं. इन सभी कारकों के एक साथ मिलने से वातावरण में व्यापक अस्थिरता पैदा हो गई है.
पूर्वी और मध्य राज्यों में बरसात का विस्तार
पूर्वी भारत के भूभाग में इन मौसमी प्रणालियों का प्रभाव काफी गहरा दिखने वाला है. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में इकतीस अक्टूबर को व्यापक तौर पर पानी बरसने की संभावना है, जबकि इसी तारीख को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के ऊंचे इलाकों में भी जोरदार बौछारें पड़ सकती हैं. गंगा से सटे पश्चिम बंगाल के मैदानी भूभाग, बिहार तथा झारखंड के इलाकों में भी व्यापक स्तर पर बादल बरसने के आसार बने हुए हैं. इन तीनों राज्यों में बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला इकतीस अक्टूबर से लेकर पांच नवंबर तक लगातार जारी रहने का आकलन है. इस समयावधि में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने के साथ भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है.
ओडिशा के तटीय तथा आंतरिक जिलों में बादलों का आगमन पहली नवंबर को दर्ज किया जा सकता है. इसके बाद राज्य में इकतीस अक्टूबर के अलावा दो नवंबर से पांच नवंबर के बीच कई दौर की बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है. विशेष रूप से दो नवंबर की तारीख को ओडिशा के कुछ भागों में मूसलाधार पानी बरसने का खतरा बना हुआ है. इस पूरी अवधि में वायुमंडल में नमी का स्तर बहुत ऊंचा रहेगा, जिससे आकाश लगातार बादलों से ढका रह सकता है.
उत्तर भारत के मैदानी और पर्वतीय राज्यों का हाल
उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानों में पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय परिसंचरण का दोहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है. पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में इकतीस अक्टूबर को आकाशीय बिजली गिरने, मेघ गर्जन और तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटे के झोंकों के साथ भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है. राज्य के भीतर बादलों का यह जमावड़ा इकतीस अक्टूबर से दो नवंबर तक सक्रिय रहेगा. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान तथा मुजफ्फराबाद के ऊंचाई वाले इलाकों में भी दो नवंबर तक हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा दर्ज की जा सकती है.
मैदानी भागों में दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ के क्षेत्रों में अब दो नवंबर को वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र समेत इन सभी इलाकों और पंजाब में चालीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे की तेज धूल भरी हवाएं चलने, बिजली कड़कने और बादलों की तेज गर्जना का पूर्वानुमान है. पंजाब तथा पश्चिमी राजस्थान के छिटपुट स्थानों पर भी बूंदाबांदी संभव है, जबकि पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इकतीस अक्टूबर को पानी गिर सकता है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में इकतीस अक्टूबर से दो नवंबर तक लगातार व्यापक वर्षा का प्रभाव देखने को मिलेगा, जिससे खेतों और सड़कों पर पानी जमा हो सकता है.
दक्षिणी प्रायद्वीप में तेज आंधी और बारिश का प्रकोप
प्रायद्वीपीय भारत में आगामी पांच दिनों तक मौसमी हलचल बहुत तेज रहने वाली है. तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के तटीय भूभागों में इकतीस अक्टूबर से पांच नवंबर के दौरान विभिन्न स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा संभावित है. हालांकि दो और तीन नवंबर को इन क्षेत्रों में तेज गर्जना, आकाशीय बिजली चमकने के साथ बहुत भारी वर्षा होने की आशंका है. केरल और माहे के तटों पर इकतीस अक्टूबर, तीन नवंबर और चार नवंबर को बारिश के दौर आएंगे, जबकि पहली, दूसरी और पांच नवंबर को वहां व्यापक वर्षा दर्ज की जाएगी. केरल के कई हिस्सों में पहली से तीन नवंबर के बीच अत्यधिक भारी बरसात होने की चेतावनी दी गई है.
कर्नाटक राज्य में भी यह मौसमी तंत्र पूरी मजबूती से सक्रिय रहेगा. तटीय कर्नाटक में इकतीस अक्टूबर से दो नवंबर तक पानी बरसने के बाद तीन से पांच नवंबर के बीच अत्यंत व्यापक वर्षा का अनुमान है. उत्तर आंतरिक कर्नाटक में इकतीस अक्टूबर से दो नवंबर और फिर चार व पांच नवंबर को बरसात होगी. वहीं दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के जनपदों में इकतीस अक्टूबर से पहली नवंबर तथा दो नवंबर से पांच नवंबर तक मेघ बरसने का क्रम जारी रहेगा. इस प्रकार उत्तर से लेकर दक्षिण तक कई दिनों तक मौसम अशांत बना रहेगा.



















