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पूर्वी राजस्थान में 31 अक्टूबर को फुहारों का दौर, 1 नवंबर से शुष्क मौसम और पारे में उछाल के संकेतराजस्थान
31 अक्तू॰ 2026, 5:58 am (2 घंटे पहले)· 0

पूर्वी राजस्थान में 31 अक्टूबर को फुहारों का दौर, 1 नवंबर से शुष्क मौसम और पारे में उछाल के संकेत

पश्चिमी विक्षोभ और परिसंचरण तंत्र कमजोर पड़ने से राजस्थान में बारिश का दायरा सिमट रहा है, जहां 31 अक्टूबर को कोटा और भरतपुर में हल्की वर्षा के बाद 1 नवंबर से प्रदेशभर में मौसम साफ रहेगा।

अक्टूबर महीने के समापन के साथ ही राजस्थान की आबोहवा में साफ बदलाव देखा जा रहा है। हाल ही में सक्रिय हुए मौसमी तंत्रों के प्रभाव से राज्य के कई अंचलों में बादलों का डेरा रहा और हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। अब यह मौसमी हलचल धीरे-धीरे शांत होने की ओर बढ़ रही है। 31 अक्टूबर को प्रदेश के केवल पूर्वी हिस्सों, विशेषकर कोटा और भरतपुर संभागों में कहीं-कहीं हल्की अथवा मध्यम फुहारें पड़ने के आसार हैं। दूसरी तरफ, पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश क्षेत्रों में वातावरण पूरी तरह शांत और शुष्क रहने का अनुमान लगाया गया है। राज्य के किसी भी जिले के लिए भारी बरसात, तेज आंधी या वज्रपात की कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है, जिससे स्थिति सामान्य बनी रहेगी।

बीते 24 घंटों का वर्षा आंकड़ा और पारे की चाल

बीते चौबीस घंटों के दौरान पूर्वी राजस्थान के विभिन्न कस्बों और ग्रामीण इलाकों में मेघ बरसे। वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो खैरथल और हरसोली क्षेत्रों में सबसे अधिक 43 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसी प्रकार जयपुर जिले के पावटा क्षेत्र में भी 40 मिलीमीटर पानी बरसा। इस असमय वर्षा और दिनभर छाए रहे बादलों की वजह से कई क्षेत्रों में अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। धूप न खिलने से दिन के समय हल्की सिहरन महसूस हुई। हालांकि मरुस्थलीय इलाके बाड़मेर में गर्मी का असर बना रहा, जहां राज्य का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 34.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। पश्चिमी राजस्थान में 31 अक्टूबर से ही परिस्थितियां शुष्क होने लगी हैं, जबकि पूर्वी जिलों में यह बदलाव 1 नवंबर से पूरी तरह प्रभावी होगा।

सक्रिय मौसमी तंत्र और बादलों की संरचना

वायुमंडलीय परिस्थितियों के विश्लेषण से पता चलता है कि एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पंजाब और उसके नजदीकी इलाकों में समुद्र तल से 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के तौर पर सक्रिय बना हुआ है। इसके साथ ही मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल में पछुआ पवनों के बीच एक द्रोणिका भी स्थित है। इसके अलावा एक दूसरी द्रोणिका उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तरी छत्तीसगढ़ तथा उससे सटे पूर्वी मध्य प्रदेश में बने निम्न दबाव क्षेत्र तक समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर फैली हुई है। अब इन दोनों प्रणालियों का असर मंद पड़ने लगा है। फिर भी बची हुई नमी और पुरवाई हवाओं के चलते पूर्वी राजस्थान के सीमित पॉकेट्स में छिटपुट बौछारें गिर सकती हैं।

सोशल मीडिया मंच पर मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने X पर लिखा कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते पूर्वी राजस्थान में 30 अक्टूबर को बादल छाए रहने तथा कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश की प्रबल संभावना बनी हुई थी, जबकि 31 अक्टूबर से गतिविधियों में निरंतर कमी दर्ज होगी और नवंबर के प्रथम सप्ताह में पूरे राज्य का मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहेगा।

संभागवार मौसम का रुख: कोटा, भरतपुर, जयपुर और पश्चिम

संभाग स्तर पर 31 अक्टूबर का मौसमी मिजाज अलग-अलग रूपों में नजर आएगा। पूर्वी संभागों में शामिल कोटा और भरतपुर के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा होने की संभावना है। वहीं राजधानी जयपुर, अजमेर और उदयपुर संभागों में मौसम अधिकांशतः शांत, साफ और शुष्क बने रहने का अनुमान है। पश्चिमी संभागों जोधपुर और बीकानेर के विस्तृत मरुस्थलीय इलाकों में भी आसमान खुला रहेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्षा की कोई गुंजाइश नहीं है। राजधानी जयपुर, जोधपुर अथवा उदयपुर समेत किसी भी जिले में मौसम को लेकर कोई अलर्ट या चेतावनी प्रभावी नहीं है, क्योंकि मौसमी गतिविधियां बेहद सीमित और कमजोर दायरे में सिमटी हुई हैं।

1 नवंबर से साफ आसमान और दिन के तापमान में इजाफा

नवंबर महीने की शुरुआत के साथ ही पूरे राजस्थान में मौसमी परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा। 1 नवंबर से राज्य के सभी संभागों में शुष्क मौसम स्थापित होने की प्रबल संभावना है। आने वाले लगभग एक सप्ताह तक किसी नए मौसमी तंत्र के सक्रिय होने की संभावना नहीं है, जिससे वर्षा की गतिविधियां पूरी तरह थमी रहेंगी। आसमान साफ होने और सीधी चटख धूप खिलने के कारण दिन के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, खुले आसमान के कारण रात के समय विकिरण जनित ठंडक बढ़ेगी, जिससे सुबह और देर रात हल्की सर्दी का अहसास बरकरार रहेगा।

किसानों और कृषि मंडियों के लिए जरूरी परामर्श

खेती-किसानी के वर्तमान दौर को देखते हुए खुले आसमान के नीचे रखी गई फसलों को लेकर विशेष एहतियात बरतने को कहा गया है। कृषि उपज मंडियों में खुले में रखे अनाज और विभिन्न जिंसों को भीगने से बचाने के लिए पुख्ता प्रबंध करने की सलाह दी गई है। चूंकि पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में 31 अक्टूबर को छिटपुट फुहारें गिर सकती हैं, इसलिए किसानों और व्यापारियों को अपनी कटी हुई या खलिहान में पड़ी फसल को सुरक्षित शेड में रखने अथवा तिरपाल से ढकने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। कुल मिलाकर 31 अक्टूबर के बाद राज्य में बारिश का अध्याय समाप्त होकर शुष्क मौसम और दिन में पारे की क्रमिक बढ़ोतरी का दौर शुरू हो जाएगा।

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सवाल-जवाब

31 अक्टूबर को राजस्थान के किन जिलों में बारिश होने की संभावना है?
पूर्वी राजस्थान के कोटा और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।
क्या 31 अक्टूबर के लिए किसी जिले में आंधी या भारी बारिश की चेतावनी है?
नहीं, मौसम विभाग ने प्रदेश के किसी भी जिले के लिए बारिश, आंधी या मेघगर्जन को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की है।
पिछले 24 घंटों में राज्य में सबसे अधिक वर्षा कहां दर्ज की गई?
खैरथल और हरसोली में सबसे अधिक 43 मिलीमीटर, जबकि जयपुर के पावटा में 40 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।
1 नवंबर से राजस्थान के मौसम में क्या बदलाव आएगा?
1 नवंबर से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क हो जाएगा और दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है।
किसानों को मौसम विभाग की ओर से क्या सलाह दी गई है?
किसानों और व्यापारियों को खुले आसमान या मंडियों में रखे अनाज को बारिश से बचाने के लिए सुरक्षित शेड या तिरपाल से ढकने की सलाह दी गई है।
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टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·23 मिनट पहले

अक्टूबर जाते-जाते ठंडक तो ले आया, अब 1 नवंबर से धूप खिलेगी तो हल्की गर्मी भी महसूस होगी। मौसम बदल रहा है, अच्छा है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अक्टूबर जाते-जाते भी पानी गिरा गया। खैरतल-हरसोली में तो अच्छा खासा बरस लिया, पर नवंबर से गर्मी फिर लौटने के पूरे आसार लग रहे हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

रवि जी, पावटा में भी तो चालीस मिलीमीटर बरसा है, खैरथल के साथ उसका जिक्र भूल गए आप!

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

मौसम विभाग कह रहा है अब बारिश नहीं होगी, पर आसमान में अभी भी बादल टिके हुए हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, बारिश भले थम जाए लेकिन नमी और बादलों की वजह से अगले कुछ दिन उमस परेशान कर सकती है।

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