राजस्थान में जारी पंचायत चुनाव की सरगर्मियों के बीच झालावाड़ जिले के ग्रामीण अंचल से एक बेहद अजीबोगरीब वाकया सामने आया है। यहां एक महिला उम्मीदवार सरपंच बनने की तैयारी में पूरे जोश के साथ जुटी हुई थीं। वह गांव में घूम-घूम कर वोटरों को साधने में इतनी अधिक तल्लीन हो गईं कि चुनाव मैदान में उतरने की सबसे प्राथमिक और अनिवार्य शर्त यानी अपना नामांकन पत्र जमा कराना ही भूल गईं। सूमर ग्राम पंचायत में सामने आए इस अजब मामले ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जहां उम्मीदवार का प्रचार तो चरम पर पहुंच गया लेकिन कागजी औपचारिकता धरी की धरी रह गई।
प्रचार में जुटी रहीं और हाथ से निकल गया पर्चा भरने का समय
सूमर ग्राम पंचायत से सरपंच पद के लिए ताल ठोकने की तैयारी कर रहीं मनभर बाई ने चुनावी बिगुल बजते ही गांव में मतदाताओं के बीच अपनी सक्रियता बढ़ा दी थी। वह अपने पक्ष में चुनावी माहौल तैयार करने के लिए सुबह से शाम तक बस्ती में घर-घर जाकर चौपालों पर लोगों से समर्थन जुटा रही थीं। गांव के विकास और स्थानीय मुद्दों को लेकर वह मतदाताओं से सीधा संवाद कर रही थीं। चुनावी गहमागहमी में वह इतनी उलझ गईं कि निर्वाचन आयोग की तय समयसीमा के भीतर निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय पहुंचकर नामांकन फॉर्म जमा करने की सबसे बुनियादी बात उनके जेहन से पूरी तरह उतर गई।
सड़क पर जोनल मजिस्ट्रेट की गाड़ी रोकी, गुहार बेअसर रहने पर हुईं बेहोश
जब मनभर बाई को अपनी इस भारी चूक का अहसास हुआ, तब तक नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख और समय दोनों बीत चुके थे। चुनाव लड़ने के सारे मंसूबों पर पानी फिरता देख वह बुरी तरह घबरा गईं। आनन-फानन में उन्होंने सड़क पर गुजर रही जोनल मजिस्ट्रेट की गाड़ी को रोक लिया और अपना नामांकन स्वीकार करने की गुहार लगाने लगीं। हालांकि, निर्वाचन नियमों की बंदिशों के चलते अधिकारियों के लिए तय वक्त के बाद पर्चा लेना संभव नहीं था। जब अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए नामांकन लेने से इनकार कर दिया, तो गहरे सदमे और निराशा की वजह से मनभर बाई सड़क पर ही अचेत होकर गिर पड़ीं। मौके पर मौजूद उनके समर्थकों और ग्रामीणों ने तुरंत उन्हें संभाला और पानी पिलाकर होश में लाने का प्रयास किया।
निर्वाचन नियमों की अनदेखी से छिना चुनाव लड़ने का हक
पंचायती राज संस्थाओं के किसी भी चुनाव में प्रत्याशी बनने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के कायदों का कड़ाई से पालन करना जरूरी होता है। किसी भी व्यक्ति के लिए चुनावी राजनीति में उतरने का पहला कदम निर्धारित प्रारूप में नामांकन पत्र भरना, जरूरी हलफनामे व दस्तावेज संलग्न करना और तय समयसीमा के भीतर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उसे प्रस्तुत करना होता है। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी सभी आवेदनों की जांच करते हैं और वैध पाए जाने पर ही योग्य प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की जाती है। यदि कोई दावेदार नामांकन दाखिल ही नहीं करता, तो चाहे उसने जमीन पर कितना भी सघन जनसंपर्क किया हो या मतदाताओं का कितना भी समर्थन हासिल कर लिया हो, उसे आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर मान्यता नहीं मिल सकती।
पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बनी यह लापरवाही
सूमर ग्राम पंचायत का यह मामला अब आसपास के पूरे क्षेत्र में उत्सुकता और चर्चा का विषय बना हुआ है। चुनाव की तैयारियों में जुटने के बावजूद समय पर पर्चा न भर पाने की इस भूल के चलते मनभर बाई इस बार सरपंच पद के चुनावी दंगल से पूरी तरह बाहर हो चुकी हैं। स्थानीय लोग अब इस बात पर हैरत जता रहे हैं कि कैसे एक प्रत्याशी ने वोट मांगने में पूरी ताकत लगा दी, लेकिन उस कानूनी प्रक्रिया को ही बिसरा दिया जिसके बिना चुनावी रण में उतरना नामुमकिन था।
























