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चरखी दादरी में बिना किसी दल के झंडे के कुलदीप बिश्नोई का बड़ा जमावड़ा, ऊंट पर सवार होकर दिखाया सियासी दमहरियाणा
2 अक्तू॰ 2026, 1:25 pm (35 दिन पहले)· 1

चरखी दादरी में बिना किसी दल के झंडे के कुलदीप बिश्नोई का बड़ा जमावड़ा, ऊंट पर सवार होकर दिखाया सियासी दम

हिसार के पूर्व सांसद और भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई ने चरखी दादरी में बिना किसी पार्टी के झंडे या बैनर के भारी भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में ऊंट पर सवार होकर पहुंचे बिश्नोई ने कहा कि पुराने साथी चाहे किसी भी दल में हों, वे आज भी उनके साथ खड़े हैं।

दक्षिण हरियाणा के सियासी गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हिसार से पूर्व सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता कुलदीप बिश्नोई ने चरखी दादरी के शगुन गार्डन में आयोजित स्नेह मिलन समारोह के जरिए एक विशाल जनसमूह एकत्र किया। इस बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में उनके साथ विधायक रणधीर पनिहार भी मुख्य रूप से मंच पर उपस्थित रहे। इस पूरे आयोजन में राजनीतिक जानकारों का ध्यान सबसे ज्यादा इस बात ने खींचा कि आयोजन स्थल पर किसी भी राजनीतिक दल का कोई झंडा, पोस्टर अथवा बैनर नजर नहीं आया। बिना किसी दल के चुनाव चिह्न या झंडे के इतनी तादाद में लोगों का पहुंचना क्षेत्रीय राजनीति में एक नए समीकरण की ओर इशारा कर रहा है।

ऊंट की सवारी और पुरानी यादों का भावनात्मक जिक्र

कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे समर्थकों ने कुलदीप बिश्नोई का बेहद गर्मजोशी और पारंपरिक रीति-रिवाजों से स्वागत किया। बिश्नोई को ऊंट पर बैठाकर पूरे सम्मान के साथ सभा स्थल तक लाया गया। इस भव्य स्वागत से गदगद बिश्नोई ने बातचीत करते हुए कहा कि दादरी का इलाका हमेशा से उनके परिवार की तरह रहा है और यह उनका मजबूत सियासी गढ़ भी है। उन्होंने अपने अतीत को याद करते हुए बताया कि जब वे भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से पहली बार सांसद चुने गए थे, उस समय भी जनता ने उनका इसी तरह ऊंट पर बैठाकर स्वागत किया था। वह दौर उनके राजनीतिक सफर में बेहद भाग्यशाली और शुभ साबित हुआ था। उन्होंने कहा कि दादरी के लोगों ने जिस तरह उनका और विधायक रणधीर पनिहार का ऐतिहासिक स्वागत किया है, उसके लिए आभार व्यक्त करने के लिए उनके पास शब्द कम पड़ रहे हैं।

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पुराने संघर्ष के साथियों पर बिश्नोई का खुला बयान

मंच या पंडाल में किसी भी दल का प्रतीक चिह्न न होने पर कुलदीप बिश्नोई ने अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि आज सड़कों से लेकर कार्यक्रम के पंडाल तक जो भारी हुजूम उमड़ा है, उसमें वही चेहरे मौजूद हैं जिन्होंने संघर्ष के दिनों में उनका साथ निभाया था। बिश्नोई के मुताबिक, उनके साथी आज चाहे घर पर बैठे हों या फिर किसी भी राजनीतिक दल में सक्रिय हों, उनके चेहरे देखकर यह साफ महसूस होता है कि वे दिल से आज भी उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दादरी की इस सरजमीं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जनता के साथ उनका यह पारिवारिक और सियासी रिश्ता पूरी तरह अटूट है।

सवाल-जवाब

कुलदीप बिश्नोई ने चरखी दादरी में कौन सा कार्यक्रम आयोजित किया?
उन्होंने चरखी दादरी के शगुन गार्डन में 'स्नेह मिलन' कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें भारी भीड़ जुटी।
इस आयोजन में कुलदीप बिश्नोई के साथ कौन से विधायक मौजूद थे?
इस कार्यक्रम में विधायक रणधीर पनिहार विशेष रूप से कुलदीप बिश्नोई के साथ मौजूद रहे।
चरखी दादरी के कार्यक्रम में समर्थकों ने बिश्नोई का स्वागत कैसे किया?
समर्थकों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया और उन्हें ऊंट पर बैठाकर कार्यक्रम स्थल तक लाया गया।
कार्यक्रम में सियासी चर्चा का मुख्य विषय क्या रहा?
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि इस विशाल जनसभा में किसी भी राजनीतिक दल का कोई झंडा, पोस्टर या बैनर नहीं था।
बिना पार्टी सिंबल के जुटी भीड़ पर कुलदीप बिश्नोई ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भीड़ में उनके संघर्ष के दिनों के साथी हैं, जो चाहे आज किसी भी दल में हों या घर बैठे हों, दिल से उनके साथ खड़े हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·34 दिन पहले

बिना किसी पार्टी के झंडे के इतनी भीड़ जुटाना और वो भी ऊंट की सवारी के साथ, सच में पुराने दिनों की याद ताजा कर देता है।

Ravikash Gupta@ravikash·34 दिन पहले

बिना पार्टी के झंडों के इतनी भीड़ जुटाना वाकई दिलचस्प है। क्या आने वाले समय में यह किसी नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत है?

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

रविकेश, सच कह रहे हो। मैंने भी जब हिसार में इनकी रैलियां कवर की थीं, तब भी समर्थकों का ऐसा ही जोश देखा था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·34 दिन पहले

बिना किसी पार्टी के झंडे के इतनी भीड़ जुटाना अपने आप में बड़ा खेल है। क्या यह किसी नई सियासी खिचड़ी की तैयारी है या बीजेपी पर दबाव बनाने का पैंतरा? समझ नहीं आ रहा।

Rohan Verma@rohan-verma·34 दिन पहले

करण भाई, हर चीज़ को सियासी खिचड़ी या दबाव बनाना क्यों समझना? पुराने साथियों का मिलना और पुराने दिन याद करना भी तो हो सकता है।

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