उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक ट्रांसपोर्टर ने अपनी पांच नई भारी ट्रेलरों को कार्यालय के मुख्य द्वार पर आड़ा-तिरछा खड़ा कर पूरा रास्ता अवरुद्ध कर दिया। मड़ियाहूं क्षेत्र के रहने वाले वाहन स्वामी विनय कुमार सिंह ने परिवहन विभाग के कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाते हुए यह कदम उठाया। विनय सिंह का आरोप है कि लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई इन व्यावसायिक गाड़ियों का आधिकारिक रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी करने के बदले RTO के कर्मचारियों द्वारा 50,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। इस विरोध प्रदर्शन के कारण कार्यालय परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।
अवैध वसूली के आरोपों से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में खड़ा हुआ विवाद
यह पूरा मामला मड़ियाहूं निवासी वाहन मालिक विनय कुमार सिंह द्वारा व्यावसायिक बेड़े में किए गए भारी निवेश से जुड़ा है। विनय सिंह ने हाल ही में लगभग छह करोड़ रुपये की कुल लागत से पांच नई भारी-भरकम ट्रेलर गाड़ियां खरीदी थीं। ऑटोमोबाइल एजेंसी को वाहनों का पूरा भुगतान करने के बाद वे गाड़ियों का आधिकारिक रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त करने के लिए जौनपुर RTO कार्यालय पहुंचे। नियमानुसार रिजिस्ट्रार्ड इंस्पेक्टर (RI) ने सभी पांचों ट्रेलरों की भौतिक जांच की और उन्हें तकनीकी रूप से पूरी तरह सही (फिटनेस ओके) पाया। हालांकि, तकनीकी स्वीकृति मिलने के बावजूद फाइल को आगे नहीं बढ़ाया गया। विनय सिंह का आरोप है कि कार्यालय में तैनात कर्मचारी गणेश बाबू ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के एवज में प्रति गाड़ी 10,000 रुपये यानी पांचों गाड़ियों के लिए कुल 50,000 रुपये की अवैध रकम की मांग की। वाहन स्वामी ने स्पष्ट किया कि वे सरकार द्वारा निर्धारित सभी वैध कर और शुल्क रसीद के साथ जमा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन बिना किसी रसीद के अतिरिक्त पैसों की मांग का विरोध कर रहे हैं।
पारिवारिक मजबूरी और प्रशासनिक लापरवाही से बढ़ी परेशानी
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी का कारण केवल रिश्वत की मांग ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और झूठे आश्वासन भी रहे। विनय कुमार सिंह ने बताया कि उनके घर में तेरहवीं का कार्यक्रम होने के कारण वे तीन दिनों तक RTO कार्यालय नहीं आ सके थे। इस पारिवारिक मजबूरी के दौरान उन्होंने टेलीफोन के माध्यम से परिवहन अधिकारियों से संपर्क साधकर अपनी स्थिति बताई और खड़ी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कार्य पूरा करने का अनुरोध किया। उस समय अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि अगले दिन काम पूरा कर दिया जाएगा। लेकिन जब वे व्यक्तिगत रूप से RTO दफ्तर पहुंचे, तो संबंधित अधिकारी के लखनऊ जाने की बात कहकर फाइल को फिर से टाल दिया गया। इस तरह पिछले चार दिनों से छह करोड़ रुपये मूल्य की गाड़ियां कार्यालय के बाहर बिना रजिस्ट्रेशन के खड़ी रहीं और काम लटका रहा।
अन्य राज्यों में रजिस्ट्रेशन कराने को मजबूर हो रहे स्थानीय वाहन मालिक
चार दिनों तक दफ्तर के चक्कर लगाने और लगातार हो रही परेशानी से तंग आकर विनय सिंह ने पांचों ट्रेलरों को RTO कार्यालय के मुख्य दरवाजे पर खड़ा कर अपना विरोध जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बिना वैध रजिस्ट्रेशन के इन वाहनों को सड़कों पर नहीं चलाना चाहते। आक्रोश व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "हमने करीब छह करोड़ रुपये लगाकर गाड़ियां खरीदी हैं, फिर भी रजिस्ट्रेशन के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे जा रहे हैं।" उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि विभाग को लगता है कि गाड़ियों में कोई तकनीकी या कानूनी कमी है, तो वे वाहनों की चाबियां अपने कब्जे में ले लें और उनकी गलती स्पष्ट करें। विनय सिंह ने यह भी बताया कि उनके पास पहले से लगभग 20 ट्रक मौजूद हैं, जिनका काम पूर्व में बिना किसी रुकावट के हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि जौनपुर RTO में फैल रही इस तरह की अवैध वसूली और जटिलताओं के कारण क्षेत्र के कई वाहन मालिक अपनी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन पड़ोसी राज्य बिहार में कराने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
तकनीकी जांच में गाड़ियां पास, उच्च अधिकारियों ने दिए जांच के आदेश
मामले के तूल पकड़ने पर जब वाहन स्वामी ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत रिजिस्ट्रार्ड इंस्पेक्टर (RI) से की, तो इंस्पेक्टर ने भी स्वीकार किया कि वे वाहनों की जांच कर पहले ही उन्हें हरी झंडी दे चुके हैं। इंस्पेक्टर ने माना कि उनकी तरफ से हरी झंडी मिलने के बाद भी संबंधित पटल के बाबू ने फाइल को आगे बढ़ाने से रोक रखा था। RTO दफ्तर के बाहर भारी वाहनों के जमावड़े और रास्ता जाम होने की सूचना मिलते ही विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच कराने की बात कही है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने जौनपुर RTO कार्यालय की कार्यप्रणाली और वहां चल रही कथित रिश्वतखोरी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



















