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छत्तीसगढ़ की मशहूर ठेठरी रोटी, कम समय में ऐसे बनाएं यह कुरकुरा और पारंपरिक स्नैकछत्तीसगढ़
16 सित॰ 2026, 6:46 am (9 दिन पहले)· 0

छत्तीसगढ़ की मशहूर ठेठरी रोटी, कम समय में ऐसे बनाएं यह कुरकुरा और पारंपरिक स्नैक

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक ठेठरी रोटी अपने कुरकुरे स्वाद और आसान रेसिपी के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंदीदा है। बेसन और मसालों से बनने वाले इस स्नैक को चाय के साथ या खाने के साथ पापड़ की तरह परोसा जाता है।

छत्तीसगढ़ की पहचान केवल उसकी समृद्ध लोक संस्कृति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां का अनूठा खानपान भी अपनी एक अलग छाप छोड़ता है। इस क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों में ठेठरी रोटी का एक बेहद खास और महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। बेसन, अजवाइन और कई तरह के देसी मसालों के मेल से तैयार होने वाली यह डिश खाने में बेहद कुरकुरी और स्वादिष्ट होती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि लोग ठेठरी को सुबह-शाम के नाश्ते के रूप में खाने के साथ-साथ दाल और सब्जी के साथ पापड़ के विकल्प के तौर पर भी बड़े चाव से खाते हैं।

राज्य के विभिन्न त्योहारों और मांगलिक अवसरों पर इसे विशेष रूप से घरों में पारंपरिक तरीकों से बनाया जाता है। बहुत कम सामग्री और बेहद आसान प्रक्रिया के जरिए तैयार होने वाली ठेठरी आज भी छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों की पुरानी संस्कृति और स्वाद को जीवंत बनाए हुए है।

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ठेठरी रोटी तैयार करने की सामग्री और शुरुआती प्रक्रिया

इस पारंपरिक व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत एक बड़े बर्तन में करीब एक किलो बेसन लेने से होती है। इस बेसन में स्वाद के अनुसार नमक और अजवाइन मिलाई जाती है। इसके बाद मिश्रण में खस्तापन और कुरकुरापन लाने के लिए मोवन के तौर पर थोड़ी मात्रा में फली का तेल डाला जाता है। इन सभी सामग्रियों को हाथों से आपस में अच्छी तरह मिला लिया जाता है ताकि तेल हर जगह समान रूप से समा जाए।

इसके बाद बेसन के इस मिश्रण में हल्दी पाउडर और लाल मिर्च पाउडर मिलाया जाता है, जिससे इसका रंग और स्वाद दोनों निखर जाते हैं। इसके बाद आवश्यकतानुसार पानी मिलाते हुए बेसन को अच्छी तरह गूंथ लिया जाता है और इसका एक नरम आटा तैयार किया जाता है। आटा गूंथ जाने के बाद इसकी छोटी-छोटी लोइयां तोड़कर अलग रख ली जाती हैं।

हाथों से तैयार किया जाता है इसका अनूठा पारंपरिक आकार

ठेठरी की सबसे बड़ी पहचान उसका खास और पारंपरिक डिजाइन वाला आकार होता है। आटे की हर एक लोई को हाथों से गोल-गोल घुमाते हुए और उंगलियों से खास डिजाइन देते हुए ठेठरी का शेप तैयार किया जाता है। इन सभी तैयार ठेठरियों को एक अलग बर्तन में सजाकर रख लिया जाता है, ताकि जब इन्हें कड़ाही में तलने की बारी आए तो आसानी से और करीने से तेल में छोड़ी जा सकें।

धीमी आंच पर तलने की सही तकनीक से आती है कुरकुराहट

आकार देने के बाद चूल्हे पर कड़ाही रखकर उसमें तेल गर्म किया जाता है। जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाता है, तब आंच को धीमा कर दिया जाता है ताकि ठेठरी अंदर तक पक सके। इसके बाद तैयार ठेठरियों को सावधानी के साथ कड़ाही के गर्म तेल में डाला जाता है। लगभग पांच से सात मिनट तक एक तरफ पकने के बाद इन्हें पलट दिया जाता है और दूसरी तरफ से भी अच्छी तरह सेंका जाता है।

जब ठेठरी दोनों तरफ से सुनहरे रंग की और पूरी तरह कुरकुरी हो जाती है, तब इन्हें तेल से बाहर निकाल लिया जाता है और इस तरह स्वादिष्ट ठेठरी पूरी तरह बनकर तैयार हो जाती है।

हर उम्र के लोगों की पसंद और पारंपरिक महत्व

छत्तीसगढ़ के लोग तैयार ठेठरी को आमतौर पर चाय और नाश्ते के वक्त खाना पसंद करते हैं। इसके अलावा दाल, चावल, सब्जी और अन्य पारंपरिक भोजन के साथ इसे पापड़ की तरह खाने का भी पुराना चलन है। इसका तीखा-मसालेदार और कुरकुरा स्वाद इसे घर के छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है।

ठेठरी रोटी छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खानपान की एक ऐसी अनमोल बानगी है, जो कम लागत और कम सामग्री में एक बेहतरीन व्यंजन तैयार करने का हुनर सिखाती है। आज के इस आधुनिक दौर में जहां खानपान की कई पुरानी और पारंपरिक चीजें लुप्त होती जा रही हैं, वहीं ठेठरी आज भी छत्तीसगढ़ी घरों की रसोई में अपनी खास जगह कायम रखे हुए है।

सवाल-जवाब

ठेठरी रोटी बनाने के लिए मुख्य सामग्री क्या है?
ठेठरी रोटी मुख्य रूप से बेसन, अजवाइन, नमक और मसालों से तैयार की जाती है।
ठेठरी में कुरकुरापन लाने के लिए क्या मिलाया जाता है?
बेसन में मोवन के लिए थोड़ी मात्रा में फली का तेल मिलाया जाता है जिससे कुरकुरापन आता है।
ठेठरी को तलने में कितना समय लगता है?
धीमी आंच पर ठेठरी को दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने में करीब 5 से 7 मिनट का समय लगता है।
इसे किस तरह खाया जाता है?
इसे आमतौर पर चाय के साथ नाश्ते में या दाल-सब्जी के साथ पापड़ की तरह खाया जाता है।
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टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों जैसे 'ठेठरी' का सांस्कृतिक महत्व तो है ही, लेकिन व्यावसायिक दृष्टि से यह पैकेज्ड फूड और एमएसएमई क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर है। स्थानीय खानपान को जब मानकीकृत पैकिंग और बेहतर शेल्फ-लाइफ के साथ बाज़ार में उतारा जाता है, तो इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलता है, बल्कि क्षेत्रीय स्टार्टअप्स के लिए नए रास्ते भी खुलते हैं। भारतीय स्नैक मार्केट में प्रामाणिक और पारंपरिक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·8 दिन पहले

रविकाश जी के व्यावसायिक पहलू के साथ-साथ पोषण और जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी ठेठरी का विशेष महत्व है। बेसन से बनने के कारण यह प्रोटीन और फ़ाइबर से समृद्ध है, जो मैदा आधारित प्रोसेस्ड स्नैक्स की तुलना में अधिक पौष्टिक विकल्प देता है। इसमें प्रयुक्त अजवाइन पाचन स्वास्थ्य के लिए गुणकारी है। हालांकि, इसके पारंपरिक रूप में तेल की मात्रा पर ध्यान देना आवश्यक है। यदि एमएसएमई और स्थानीय स्टार्टअप्स इसे एयर-फ़्राइंग तकनीक, स्वस्थ तेलों के प्रयोग और पारदर्शी पोषण लेबलिंग के साथ बाज़ार में पेश करते हैं, तो यह वेलनेस और फ़िटनेस के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए एक उत्कृष्ट देसी स्नैक बन सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

पारंपरिक व्यंजन केवल स्वाद तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे किसी क्षेत्र की आर्थिकी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लघु उद्योगों का एक मजबूत आधार भी होते हैं। छत्तीसगढ़ की 'ठेठरी' जैसी लोक संस्कृति से जुड़ी खाद्य सामग्री को यदि उचित मंच और महिला स्व-सहायता समूहों के जरिए बढ़ावा मिले, तो यह राज्य के पारंपरिक खानपान को राष्ट्रीय बाजार में एक नई पहचान और आर्थिक संबल दे सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

छत्तीसगढ़ की इस पारंपरिक खाद्य संस्कृति का दस्तावेजीकरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला आजीविका के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है। त्योहारों और मांगलिक अवसरों पर बनने वाली ठेठरी जैसे व्यंजन न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर पारंपरिक पाक कला के व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने में भी सक्षम हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

छत्तीसगढ़ की इस पारंपरिक खाद्य संस्कृति का दस्तावेजीकरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला आजीविका के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है। त्योहारों और मांगलिक अवसरों पर बनने वाली ठेठरी जैसे व्यंजन न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर पारंपरिक पाक कला के व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने में भी सक्षम हैं। एक क्राइम रिपोर्टर के रूप में मेरा मानना है कि खाद्य सुरक्षा और स्थानीय खानपान के इन पारंपरिक आयामों को बढ़ावा देने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए रास्ते खुलते हैं, जिससे आर्थिक सुदृढ़ता के साथ आपराधिक प्रवृत्तियों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से अंकुश लगता है।

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