चित्रकूट जिले का पाठा इलाका लंबे समय से क्षेत्र के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शुमार रहा है। यहां आजीविका के साधन बेहद सीमित होने और आर्थिक तंगी के चलते स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर आदिवासी समुदायों के लिए खुद का पक्का मकान होना एक असंभव सपने जैसा था। पूरे इलाके में दूर-दूर तक सिर्फ कच्ची झोपड़ियां ही दिखाई देती थीं। मौसम चाहे भीषण गर्मी का हो या फिर बारिश का, इन परिवारों को अपनी पूरी जिंदगी इन्हीं अस्थायी आशियानों में गुजारने की विवशता थी। बरसात के दिनों में टपकती छतें और तेज आंधी-तूफान के बीच झोपड़ी के ढह जाने का डर हमेशा इन लोगों की रातों की नींद उड़ा देता था।
प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली राहत
इस विकट परिस्थिति के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना ने पाठा अंचल के गरीब और जरूरतमंद परिवारों की जिंदगी की तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है। इस योजना के जरिए पक्का आवास मिल जाने से कई आदिवासी परिवारों का दशकों पुराना सपना आखिरकार साकार हो गया है। आज इस इलाके के अनगिनत परिवार सिर पर पक्की छत पाकर एक सुरक्षित और सुकून भरा जीवन जी रहे हैं। बरसात के मौसम में जहां पहले उन्हें अपनी झोपड़ी की सुरक्षा को लेकर हर पल फिक्र सताती थी, वहीं अब वे अपने नए पक्के मकानों में बिना किसी खौफ के चैन की जिंदगी बिता रहे हैं। गौरतलब है कि चित्रकूट का पाठा क्षेत्र मूल रूप से एक आदिवासी बहुल इलाका है, जहां की बहुसंख्यक आबादी अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह से मजदूरी पर ही निर्भर रहती है।
बारिश में जागकर कटती थीं रातें
पाठा क्षेत्र की स्थानीय निवासी बिट्टी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि पहले उनके परिवार के पांच से छह सदस्य एक बेहद छोटी और जीर्ण-शीर्ण झोपड़ी में रहने को अभिशप्त थे। जगह की भारी कमी के साथ-साथ बरसात और तेज हवाओं के चलते उनकी मुश्किलें और अधिक बढ़ जाती थीं। कई बार तो हालात ऐसे हो जाते थे कि झोपड़ी की छत से लगातार पानी टपकने के कारण पूरे परिवार को अपनी पूरी रात जागकर ही गुजारनी पड़ती थी। उनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति ऐसी कतई नहीं थी कि वे अपनी बलबूते पर कोई पक्का मकान खड़ा कर पाते। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने के बाद आज गांव में उनका भी खुद का एक पक्का घर बन चुका है, जहां वे अपने पूरे परिवार के साथ बेहद आराम से रह रही हैं।
बदल गया जीवन जीने का अंदाज
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने उन्हें केवल चार दीवारों वाला एक मकान भर नहीं दिया है, बल्कि उनकी पूरी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव ला दिया है। पहले जहां आसमान में बादल घिरते ही झोपड़ी को बचाने और सुरक्षित रखने की चिंता उन्हें सताने लगती थी, वहीं अब उनका पूरा परिवार किसी भी प्रकार के डर या संशय के बिना अपने आशियाने में सुरक्षित महसूस करता है। इस सरकारी मदद ने पाठा के इन जरूरतमंद परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें एक गरिमापूर्ण जीवन देने का काम किया है, जिससे उनकी पीढ़ियों से चली आ रही लाचारी और बेबसी अब दूर हो चुकी है।























